By रेनू तिवारी | Apr 02, 2026
: झारखंड के हजारीबाग जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक मां ने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के अंधविश्वास में अपनी ही नाबालिग बेटी की बलि दे दी। पुलिस ने इस मामले में किशोरी की 35 वर्षीय मां, एक महिला तांत्रिक और एक अन्य सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन और हजारीबाग के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अंजनी झा ने देर रात एक संवाददाता सम्मेलन में इन गिरफ्तारियों की घोषणा की। पुलिस ने बताया कि उन्होंने लड़की की मां रेशमी देवी, 55 वर्षीय शांति देवी (जो एक तांत्रिक है) और 40 वर्षीय भीम राम को गिरफ्तार किया है, ये सभी एक ही गांव के रहने वाले हैं।
पुलिस का दावा है कि तांत्रिक ने लड़की के गुप्तांगों में लकड़ी की छड़ी डाली, जबकि भीम राम ने अनुष्ठान के लिए खून निकालने के लिए उसके सिर पर प्रहार किया। लड़की की हत्या करने के बाद उन्होंने उसके शव को एक बगीचे में दफना दिया। अंजन ने बताया कि तीनों ने बलात्कार होने का दावा करके जांचकर्ताओं को गुमराह करने की कोशिश की, जो पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में साबित नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि भीम राम पर अपनी एक रिश्तेदार और एक अन्य व्यक्ति की हत्या के आरोप भी हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को हजारीबाग के बिष्णुगढ़ में लड़की से कथित बलात्कार और हत्या का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस घटना का संज्ञान लिया। इससे पहले, लड़की की मां ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी का अपहरण कर लिया गया था और उसका शव 25 मार्च को गांव के एक खेत में मिला था। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हत्या के विरोध में सोमवार को हजारीबाग में 12 घंटे का बंद आहूत किया।