Manipur | जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए INDIA के 20 सांसद संघर्ष प्रभावित मणिपुर के लिए रवाना

By रेनू तिवारी | Jul 29, 2023

विपक्षी गठबंधन - भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) के 16 दलों के 20 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल 29 और 30 जुलाई को मणिपुर का दौरा करेगा। नेता हिंसा प्रभावित राज्य में जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे।

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अधीर रंजन चौधरी ने कहा, हम वहां राजनीतिक मुद्दे उठाने नहीं बल्कि मणिपुर के लोगों का दर्द समझने जा रहे हैं। उन्होंने विस्तार से बताया हम सरकार से मणिपुर में उभरी संवेदनशील स्थिति का समाधान खोजने की अपील कर रहे हैं। यह कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं है, बल्कि वहां सांप्रदायिक हिंसा है। इसका असर उसके पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ रहा है। सरकार ने इसे पूरा नहीं किया है। यह जिम्मेदारी है। हम मणिपुर में जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति का आकलन करने जा रहे हैं।

 

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हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी टीम

कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन के मुताबिक, भारतीय सांसद शनिवार सुबह दिल्ली से रवाना होंगे और दोपहर तक इंफाल पहुंचेंगे। वे राज्य के पहाड़ी इलाकों और घाटी के हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा प्रतिनिधिमंडल रविवार को मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मुलाकात करेगा। हुसैन के मुताबिक, सांसद अपने निष्कर्षों पर संसद में चर्चा करना चाहते हैं। हालांकि, अगर संसद में चर्चा की अनुमति नहीं दी गई, तो सांसद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। हुसैन ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं देने के लिए ''जिद्दी'' है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की और कहा कि मणिपुर में गंभीर हिंसा, महिलाओं के साथ बलात्कार और "जातीय सफाया" हुआ है लेकिन प्रधानमंत्री के पास राज्य के लिए "समय नहीं है"।

नसीर हुसैन ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे चुनावी राज्यों का दौरा करने का समय है जहां वह विपक्षी नेताओं के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन मणिपुर के लोगों के लिए उनके पास कोई शब्द नहीं हैं।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मणिपुर में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने के विपक्ष के फैसले से संसद से राज्य के प्रभावित लोगों को संदेश जाएगा कि उनकी दुर्दशा को लेकर चिंता है।

विपक्ष जातीय संघर्षग्रस्त मणिपुर की स्थिति पर संसद में प्रधानमंत्री के बयान और उसके बाद इस पर पूर्ण चर्चा की मांग कर रहा है। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर 3 मई से जातीय हिंसा की चपेट में है, जिसमें 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

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