By रेनू तिवारी | Aug 06, 2026
वर्ष 2013 के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 'तहलका' पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मापुसा ट्रायल कोर्ट के मई 2021 के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें तेजपाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की डिवीजन बेंच ने सुनाया। हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं—376(2)(f) (भरोसेमंद स्थिति में रेप), 376(2)(k) (अधिकार या स्थिति का फायदा उठाकर रेप), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354B (महिला को विवस्त्र करने के इरादे से हमला)—के तहत दोषी पाया है।
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अधिकतम सजा देने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के बार-बार मना करने के बावजूद तेजपाल ने आगे बढ़ने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने कहा कि पीड़िता की उम्र तेजपाल की बेटी के बराबर थी और तेजपाल एक भरोसेमंद पद पर थे।
मेहता ने बेंच से कहा, "पीड़िता के मना करने के बावजूद, वह आगे बढ़ते रहे। वह पिता समान थे और उन्हें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। इस कोर्ट को समाज में एक स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि जब कोई लड़की 'ना' कहती है, तो उसका मतलब 'ना' ही होता है। 'ना' का मतलब 'ना' है।" उन्होंने कहा कि यह मामला एक कड़ा उदाहरण पेश करने वाला है।
तेजपाल का कहना है कि वह खुद पीड़ित हैं
सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट को संबोधित करते हुए तेजपाल ने नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा, "मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है, और इसके अलावा कहने के लिए बहुत कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। बाकी तथ्य रिकॉर्ड पर हैं।"
मामले के बारे में
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में 'थिंकफेस्ट' इवेंट के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल द्वारा अपनी एक पूर्व जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोपों से जुड़ा है। बाद में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसके बाद गोवा सरकार ने उस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।