By अभिनय आकाश | Dec 30, 2024
चेंज इज द लॉ ऑफ नेचर यानी बदलाव प्रकृति का नियम है। इस नियम को आजकर कोई तोड़ नहीं पाया है। हर बदलते साल के साथ मौसम बदल रहे हैं। तरीके और तकनीक बदल रही है। हम बदल रहे हैं। हम इतिहास के सबसे टेक्नोलॉजिकल रिव्ल्यूशनरी के दौर से गुजर रहे हैं। ये एआई का अविष्कार है। एआई हर बाकी टेक्नोलॉजी से अलग है। क्योंकि ये सिर्फ एक टूल नहीं बल्कि एक एजेंट है। ये अपने दम पर फैसले ले सकता है और नए विचार सोच सकता है। सभी पहले की टेक्नोलॉजी चाहे वो एटम बम जैसी ताकतवर चीज ही क्यों न हो। ताकतवर होने के बावजूद भी उनकी चांबी इंसानों के हाथ में थी। केवल इंसान ही ये तय कर सकता है, एटम बम ये नहीं तय कर सकता है कि किस शहर पर हमला करना है। न ही वो कोई नई चीज इजाद कर सकता है। एआई अपने दम पर फैसले भी ले सकता है और नई चीजों को इजाद भी कर सकता है।
एआई एजेंट ने जमाया कब्जा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बाजार काफी तेजी से बढ़ा है। मेडिकल डॉग्नोस्टिक से लेकर पर्सनलाइज कस्टमर सर्विस तक एआई पावर सिस्टम की भूमिका और भी कॉप्लैक्स होने जा रही है। एआई एजेंट बिना किसी मार्गदर्शन के कुछ कार्य कर सकते हैं। अपनी गलतियों से सीख सकते हैं और यहां तक कि इन कार्यों पर निर्णय भी ले सकते हैं। उद्यम के साथ-साथ उपभोक्ता उपयोग के लिए एआई को अपनाने का अधिक लोकप्रिय तरीका बन जाएगा। विभिन्न प्रकार के उपयोग के मामलों के लिए एआई एजेंट बनाना आसान है, और उन्हें सांसारिक प्रक्रियाओं की देखभाल करने के लिए प्रशिक्षित करना आसान है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। दिसंबर 2024 तक, उपयोगकर्ताओं ने चैटजीपीटी पर 3 मिलियन से अधिक कस्टम जीपीटी बनाए हैं, जिनमें से केवल 5% ही जीपीटी स्टोर के माध्यम से सार्वजनिक रूप से पहुंच योग्य हैं।
डैशबोर्ड के इस्तेमाल पर असर
एआई टूल्स आपके वर्कफ्लो को बढ़ाने में मदद करते हैं। कोडिंग को जल्दी हल करने के लिए गिटहब, उत्पादकता और दक्षता में सुधार के लिए सर्विसनाउ और रोजमर्रा के कार्यों के लिए सेल्सफोर्स का एजेंट फोर्स आदि कारगर टूल्स हैं। एआई ने बड़े डेटा सेटों के विश्लेषण के पीछे कौशल की बाधाओं को दूर करते हुए डेटा को अधिक सुलभ बनाना शुरू कर दिया है। इससे धीरे-धीरे डैशबोर्ड को जेनएआई टूल से बदल दिया जाएगा जो विज़ुअलाइज़ेशन, ट्रेंड लाइन या यहां तक कि उनकी दृश्यता के आधार पर पूर्वानुमानों के साथ विशिष्ट डेटा प्रश्नों का उत्तर देते हैं। आप 2025 के अंत तक एनालिटिक्स दिखाने वाले उत्पादों को इस प्रारूप में आते हुए देख सकते हैं, भले ही इन प्रश्नों को संभालने में शामिल लागत कुछ समय के लिए संवादात्मक डेटा एनालिटिक्स को एंटरप्राइज़ उत्पादों तक सीमित कर सकती है।
टिकट बुकिंग में कारगर
अभी ट्रेन में तत्काल टिकट लेना किसी जंग जीतने जैसा है। जब तक फॉर्म भरने की फॉर्मेलिटी पूरी करते हैं, तब तक टिकट ही खत्म हो जाता है। अगले साल तक ऐसे एआई चैटबॉट्स आ सकते हैं, जो इंटरनेट नहीं होने पर आपके ऐसे काम बखूबी कर सकेंगे। यह सिर्फ टिकट बुकिंग ही नहीं, ट्रैफिक मैनेजमेंट, कचरा प्रबंधन, बिजली सप्लाई, आपके ऑफिस से जुड़े रूटीन काम आदि सबकुछ कर सकेंगे।
बायोनिक एआई
अभी किसी इंसान का हाथ हादसे में कट गया तो उसे आर्टिफिशल हाथ लगा दिया जाता है, लेकिन उससे वह इंसान पहले की तरह काम नहीं कर सकता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए बायोनिक एआई आ सकता है। बायोनिक एआई आर्टिफिशल अंगों को इस तरह से कंट्रोल करेगा कि वे इंसान के मस्तिष्क के संकेतों को समझे और उसी के मुताबिक काम करें। इससे कभी लगेर ही नहीं कि आर्टिफिशल अंग लगाया गया है।
2024 रहा बड़े बदलावों का साल
1. ओपन एआई ने अपने जीपीटी-40 को लॉन्च किया, जो जीपीटी-4 का अडवांस वर्जन है। यह टेक्स्ट, वॉयस और इमेज फॉर्मेट में काम कर सकता है। इसी साल ChatGPT सर्च को भी कंपनी ने फ्री किया।
2. गूगल ने एआई क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण अपडेट्स जारी किए। जेमिनि 2.0, ट्रिलियम एआई एक्सेलेरेटर चिप, प्रोजेक्ट मारिनर, प्रोजेक्ट ऑस्ट्रा, व्यो 2 और इमेगन 3 के लॉन्च ने सबको चौका दिया।
3. इस साल अल्फाफोल्ड एआई को केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार मिला। यह एआई सिस्टम प्रोटीन संरचनाओं को समझ सकता है। इसकी मदद से दवाओं के डिवेलपमेंट में तेजी आई। कोरोना में इसी सिस्टम से वैक्सीन भी बनी।
4. एप्पल ने अपना एआई मॉडल एप्पल इंटेलिजेंस लॉन्च किया। इसकी खास बात यह रही कि यूजर्स के डेटा को किसी और जगह शेयर किए बगैर काम करता है। आईफोन, आईपैड और मैक में डिवाइस पर प्रोसेसिंग से काम करता है।
5. फेसबुक, इंस्टाग्राम, वट्सऐप की कंपनी मेटा ने Meta AI लॉन्च किया है, जो जटिल तर्क, निर्देशों का पालन, विचारों की कल्पना और छोटी समस्याओं को भी हल कर सकता है। यह मेटा के प्रॉडक्ट पर फ्री है।
6. इलॉन मस्क की कंपनी एक्स ने 'ग्रोक' एआई चैटबॉट को साल के अंत में सभी यूजर्स के लिए फ्री कर दिया। यह चैटबॉट तेज, और कई भाषाओं में जवाब देने और इमेज बनाने में समझम है। पहले यह प्रीमियम यूजर्स के लिए ही था।
7. एनवीडिया ने 'लाल्मा-3.1 नाम से एक लार्ज लैंग्वेज 4 मॉडल डिवेलप किया, जो यूजर्स की क्वेरी के साथ ही उससे जुड़े आगे के सभी सवालों को जवाब देने में सक्षम था। हालांकि अभी भी यह एक्सपेरिमेंटल फेज में है।
8. टेलिकॉम कंपनी जियो ने जियो ब्रेन नाम से अपना एआई लॉन्च किया। इसे डेटा प्रोसेसिंग, वॉयस असिस्टेंट, पर्सनलाइजेशन में को ध्यान में रखते हुए बनाया गया।