Nepal Flood में साड़ी बनी की लाइफलाइन, 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों की ऐसे बचाई जान

By एकता | Sep 01, 2026

आपको जानकर हैरानी होगी कि नेपाल की भयानक बाढ़ में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों की जान एक साड़ी ने बचा ली। ये सभी यात्री कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए हिमालय की यात्रा पर निकले थे। लेकिन अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने उनकी यात्रा को जिंदगी और मौत की जंग में बदल दिया। पानी के साथ मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर तेजी से नीचे की ओर आने लगे। हालात इतने खतरनाक थे कि यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बस छोड़कर ऊंचाई की तरफ भागना पड़ा।

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एक मंजिल जितनी ऊंची चढ़ाई बनी मुसीबत

बस से बाहर निकलने के बाद यात्रियों के सामने एक और बड़ी चुनौती थी। उन्हें करीब एक मंजिल जितनी ऊंची कीचड़ भरी चढ़ाई पार करनी थी। पुरुष यात्री किसी तरह ऊपर पहुंचने लगे, लेकिन महिलाओं और खासकर बुजुर्ग यात्रियों को काफी परेशानी हो रही थी। कीचड़ की वजह से पैर फिसल रहे थे और कई यात्री कुछ फीट ऊपर चढ़ने के बाद फिर नीचे आ जा रहे थे। ऐसे में एक महिला ने ऐसा तरीका निकाला, जिसने पूरे समूह की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

साड़ी बनी जिंदगी की रस्सी

इस महिला का नाम पूंगोडी बताया गया है। वह किसी तरह चढ़ाई के ऊपर पहुंच गई थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी साड़ी उतारी और स्वेटर पहन लिया। पूंगोडी ने साड़ी को नीचे फंसे यात्रियों की तरफ लटका दिया। देखते ही देखते साड़ी एक अस्थायी रस्सी बन गई। नीचे मौजूद यात्रियों ने साड़ी के साथ वहां मौजूद एक केबल को भी पकड़ लिया और एक-दूसरे को ऊपर खींचने लगे। एक यात्री के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे में सभी 21 लोग चढ़ाई पार करके सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंच गए।

साड़ी से महिला को भी खींचकर बचाया

इस दौरान एक महिला ऐसी भी थीं, जो चढ़ाई नहीं कर पा रही थीं। उनके साथियों ने उन्हें साड़ी अपनी कमर के चारों ओर बांधने के लिए कहा। इसके बाद ऊपर मौजूद लोगों ने साड़ी की मदद से उन्हें धीरे-धीरे ऊपर खींच लिया। इस तरह रोजमर्रा की जिंदगी, पूजा और खास मौकों पर पहनी जाने वाली एक साधारण साड़ी उस वक्त 21 लोगों के लिए जिंदगी बचाने वाली रस्सी बन गई।

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सुरक्षित जगह पहुंचने के बाद मिली राहत

ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सभी 21 यात्री किसी तरह आर्म्ड पुलिस फोर्स के कैंप तक पहुंचे। वहां उन्हें पानी और बिस्किट दिए गए। बाद में इन यात्रियों को नेपाल से सुरक्षित बाहर निकाला गया और वे आखिरकार चेन्नई पहुंचे। बाढ़ से बचने के बाद यात्रियों ने अपनी पूरी कहानी बताई, जिसे बीबीसी ने भी रिपोर्ट किया है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आया संकट

ये 21 यात्री कुल 57 लोगों के एक समूह का हिस्सा थे। यह समूह तीन बसों में नेपाल के रसुवा जिले से होते हुए नेपाल-चीन सीमा की तरफ जा रहा था। यात्रा का आयोजन कुंभकोणम की एक ट्रैवल एजेंसी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किया था। 26 अगस्त को समूह स्याब्रुबेसी से चीनी इमिग्रेशन पॉइंट की ओर बढ़ रहा था, तभी अचानक हालात बदल गए।

शुरुआत में कुछ यात्रियों को लगा कि दूर धूल का गुबार उठ रहा है। लेकिन कुछ ही देर बाद तेज आवाज सुनाई दी। एक यात्री के मुताबिक, आवाज किसी धमाके जैसी थी और बस के आसपास पत्थर गिरने लगे। इसके कुछ ही पल बाद घाटी में बाढ़ का पानी बेहद तेजी से आगे बढ़ने लगा। यात्रियों को समझ आ गया कि अब वहां रुकना जानलेवा हो सकता है। उन्होंने तुरंत बस छोड़ी और ऊंचाई की तरफ भागकर अपनी जान बचाई।

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