CM समेत 35 में से 22 मंत्री चुनाव हार गये, फिर भी ममता बनर्जी बोलीं, हम हारे नहीं हैं

By नीरज कुमार दुबे | May 05, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हार मानने से साफ इंकार कर दिया है और स्पष्ट कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। कोलकाता में प्रेस वार्ता के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी है बल्कि साजिश का शिकार हुई है। उन्होंने कहा, "हम हारे नहीं हैं। इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप किया।

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उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए। उनके अनुसार करीब 90 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से अदालत के हस्तक्षेप के बाद 32 लाख नाम वापस जोड़े गए। उन्होंने इसे चुनावी धांधली का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह बेहद सुनियोजित और गलत तरीके से किया गया खेल था। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी लगभग 100 सीटें जबरन छीनी गई हैं। ममता बनर्जी ने आगे की रणनीति के लिए विचार विमर्श की बात कही है और एक जांच दल बनाने की घोषणा भी की है। ममता बनर्जी ने कहा, "सोनिया जी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन ने मुझे फ़ोन किया। INDIA गठबंधन के सभी साथियों ने मुझसे कहा कि वह पूरी तरह से मेरे साथ हैं। मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मज़बूत रहेगी। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने मुझसे अनुरोध किया कि क्या वह आज ही आ सकते हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि कल आएँ। तो, वह कल आएँगे। एक-एक करके सब आएँगे। मेरा लक्ष्य बहुत साफ़ है। मैं INDIA गठबंधन को मज़बूत करूँगी, बिल्कुल एक आम आदमी की तरह। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम आदमी हूँ। इसलिए, आप मुझसे यह नहीं कह सकते कि मैं अपनी कुर्सी का इस्तेमाल कर रही हूँ। मैं अब एक आज़ाद पंछी हूँ। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी लोगों की सेवा में लगा दी, इन 15 सालों में मैंने पेंशन का एक पैसा भी नहीं निकाला। मैं तनख्वाह का एक पैसा भी नहीं ले रही हूँ। लेकिन अब, मैं एक आज़ाद पंछी हूँ।"

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस जीत को जनता के भरोसे का परिणाम बताया है। पार्टी के अनुसार, इस जीत के पीछे कई अहम कारण रहे। महिलाओं का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा, सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का वादा आकर्षित कर गया और मध्यम वर्ग तथा युवाओं ने विकास के मुद्दे पर भाजपा का समर्थन किया। इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती ने मतदाताओं में भयमुक्त मतदान का भरोसा पैदा किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेरोजगारी, उद्योगों की कमी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने तृणमूल सरकार के खिलाफ माहौल तैयार किया। पंद्रह साल के शासन के बाद जनता में बदलाव की इच्छा साफ नजर आई। ममता बनर्जी ने चुनाव को बंगाली अस्मिता बनाम केंद्र की राजनीति के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति अपेक्षित असर नहीं डाल सकी। भाजपा ने इस नैरेटिव का जवाब सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए दिया। मछली और स्थानीय खानपान के मुद्दे को लेकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह बंगाल की संस्कृति के खिलाफ नहीं है। इसके साथ ही घुसपैठ और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।

हम आपको यह भी बता दें कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की भारी हार ‘प्रबल सत्ता-विरोधी लहर और अलोकप्रियता’ को दर्शाती है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 35 मंत्रियों में से 22 को पराजय का सामना करना पड़ा। इस तरह कैबिनेट मंत्रियों में से 63 प्रतिशत मंत्री अपनी सीटें नहीं जीत सके और यह दर्शाता है कि राज्य में शासन करने वाले नेतृत्व को सीधे तौर पर नकार दिया गया। इस हार को और भी महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि हारने वाले मंत्री कद्दावर नेता थे जिनके पास महत्वपूर्ण विभाग थे।

दूसरी ओर, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इस दौड़ में शुभेन्दु अधिकारी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। इसके अलावा समिक भट्टाचार्य, स्वप्न दासगुप्ता और दिलीप घोष भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। इसी बीच, गृहमंत्री अमित शाह को भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पार्टी आलाकमान की ओर से केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी को सह पर्यवेक्षक बनाया गया है। भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को प्रस्तावित है, जो महान साहित्यकार रबिन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के दिन होगा। बहरहाल, चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह बदल गए हैं।

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