RBI के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई रूपरेखा से इस साल बाहर आ सकते हैं 3-4 बैंक

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 24, 2019

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय अगले छह से आठ महीनों में तीन से चार और बैंकों के कमजोर बैंकों की सूची से बाहर आने की उम्मीद कर रहा है। इसका कारण पूंजी डाले जाने के बाद बैंकों की वित्तीय सेहत में सुधार तथा फंसे कर्ज में कमी है। सूत्रों ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों में 48,239 करोड़ रुपये की पूंजी डाले जाने से कारपोरेशन बैंक तथा इलाहबाद बैंक को अगले कुछ सप्ताह में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा से बाहर आने में मदद मिलेगा। हाल में पूंजी डाले जाने से कारपोरेशन बैंकों को सर्वाधिक 9,086 करोड़ रुपये की पूंजी प्राप्त होगी। उसके बाद इलाहाबाद बैंक का स्थान है जिसे 6,896 करोड़ रुपये की पूंजी प्राप्त होगी। इस पूंजी से इन बैंकों को साझा इक्विटी पूंजी अनुपात 7.375, शेयर पूंजी अनुपात (टायर-1) 8.875 प्रतिशत, जोखिम भारांश संपत्ति के अनुपात में पूंजी 10.875 प्रतिशत तथा शुद्ध एनपीए अनुपात की 6 प्रतिशत से नीचे रखने जैसी नियामकीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

आईडीबीआई बैंक की वित्तीय सेहत भी सुधर रही है और उसका शुद्ध फंसा कर्ज(एनपीए) भी कम हो रहा है। इससे यह भी पीसीए निगरानी से बाहर आ जाएगा। इस बैंक में अब एलआईसी की बहुलांश हिस्सेदारी है।अगर बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में निरंतर सुधार लाता है, ऐसी संभावना है कि आरबीआई सितंबर आंकड़े के बाद आईडीबीआई को इस सूची से बाहर कर देगा। इसके अलावा सेंट्रल बैंक तथा यूको बैंक भी अपनी स्थिति में सुधार लाने की दिशा में काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस तरीके से चार और बैंकों से आरबीआई अगले 6 से आठ महीनों में पाबंदी हटा सकता है।

प्रमुख खबरें

NIA कोर्ट ने PFI के 4 सदस्यों को शशिकुमार मर्डर केस में सुनाई उम्रकैद

AIIMS Nagpur: सुरक्षा के आश्वासन के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल खत्म

Odisha School Textbooks में मिलीं 1741 गलतियां, सरकार ने पूर्व निदेशक सहित चार को किया निलंबित

S Jaishankar ने नाविकों पर हमलों को बताया अस्वीकार्य, Liberia के साथ मिलकर बनाया मित्र समूह