By निधि अविनाश | Jul 29, 2022
इस समय चीन के बैंक एक बुरे दौर से गुजर रहा है जिसको देखते हुए शहर के कई स्थानीय बैंकों ने पैसों की निकासी को फ्रीज कर दिया है। चीन ने ऐसा गंभीर नकदी सकंट से बचने के लिए किया है लेकिन इससे अब बैंक के ग्राहकों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। बता दें कि ग्राहकों ने अपने पैसे बैंकों में जमा कराए थे लेकिन अब वह इसे चाह कर भी निकाल नहीं पा रहे हैं। इस समय चीन के बैकों की हलात बहुत खराब चल रही है । इसका कारण देश में कोरोना महामारी के मामले बढ़ना और रियल एस्टेट में मंदी आना है। इससे बैंकों को काफी नुकसान पहुंचा है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस समय वित्तीय संकट का सामना कर रही है।
4,00,000 बैंक ग्राहक हुए प्रभावित
बता दें कि बैकों द्वारा निकासी फ्रीज कराने से लगभग 4,00,000 बैंक ग्राहक प्रभावित हुए हैं और इसमें 6 अरब डॉलर की राशि जमा है। बैंक पहले ही कोरोना महामारी से पैदा हुई आर्थिक मंदी झेल रहा है। हालांकि, सरकार ने ग्राहकों को छोटी निकासी लेने निकालने की अनुमति दे दी है। माना जाता है कि चीनी जीडीपी का एक तिहाई हिस्सा रियल एस्टेट और इससे जुड़े उद्योग 17.5 ट्रिलियन डॉलर हैं। ज्यादातर चीन के मध्यम वर्ग के लोग निवेश के लिए इसको ही प्रमुख साधन मानते है। यहां तक की चीन बैकों के कुल कर्ज का एक तिहाई हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। दिग्गज प्रॉपर्टी डेवलपर एवरग्रांडे ग्रुप को लोन डिफॉल्ट के कारण बड़ा झटका लगा और इससे कंपनी के शेयर में गिरावट आई थी।
चीन की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी
चीन की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के कारण बिक्री पर बुरी तरह गिरावट आई है। रियल एस्टेट कंपनियों ने समय पर परियोजनाओं का काम पूरा नहीं किया वहीं खरीदारों ने निर्माण में देरी की जिससे लोन का पुनर्भुगतान रोका गया। अगर अधिक लोग एक साथ अचानक लोन का पुनर्भुगतान करना बंद कर देते हैं, तो इससे डेवलपर्स के लिए नकदी प्रवाह खराब हो सकता है और प्रोजेक्ट में ज्यादा देरी हो सकती है।