By Ankit Jaiswal | Feb 19, 2026
साल 2004 में टी20 क्रिकेट सिर्फ एक नई अवधारणा था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फॉर्मेट की शुरुआत भी नहीं हुई थी। आज यही प्रारूप वैश्विक क्रिकेट का सबसे आकर्षक और व्यावसायिक रूप बन चुका है। इसी दौर में पाकिस्तान के गुजरांवाला में जन्मे 17 वर्षीय साद बिन जफर अपने परिवार के साथ कनाडा चले गए थे। क्रिकेट उस समय उनके जीवन का लक्ष्य नहीं, बल्कि शिक्षा प्राथमिकता थी।
कनाडा पहुंचने के बाद उन्होंने टोरंटो विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ वह स्थानीय सुपर 9 लीग में क्लब क्रिकेट खेलते रहे और 2008 में कनाडा के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। हालांकि 2008 से 2015 के बीच उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। टीम में चयन और बाहर होना लगातार चलता रहा, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
गौरतलब है कि 2015 के बाद उन्होंने टीम में अपनी जगह मजबूत की और धीरे-धीरे कनाडा की गेंदबाजी इकाई के अहम सदस्य बन गए। टी20 विश्व कप 2026 में वह टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी के रूप में उतरे हैं और अब तक चार विकेट लेकर अग्रणी विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले मुकाबले से पहले उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य अपनी पूरी क्षमता दिखाना है।
साद ने कनाडा को क्वालीफायर के जरिए टी20 विश्व कप तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई और बाद में टूर्नामेंट इतिहास में देश के पहले कप्तान भी बने। उनके नेतृत्व में कनाडा ने 2023 में वनडे दर्जा दोबारा हासिल किया। हालांकि अब वह कप्तान नहीं हैं, लेकिन टीम में एक सीनियर ऑलराउंडर के तौर पर युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
बता दें कि नवंबर 2021 में उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की थी। पनामा के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में एक भी रन नहीं दिया और दो विकेट झटके। इस प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई।
क्रिकेट लंबे समय तक कनाडा में पूर्णकालिक पेशा नहीं था। साद बीमा कंपनी में प्रोक्योरमेंट एनालिस्ट के तौर पर काम करते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहे। दौरों के लिए छुट्टी लेना और कभी-कभी यात्रा के दौरान दूरस्थ रूप से काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार नौकरी और क्रिकेट के बीच चुनाव करना पड़ा, लेकिन उन्होंने क्रिकेट नहीं छोड़ा।
2018 में जीटी20 फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच बनने और फ्रेंचाइजी लीगों में अवसर मिलने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया। वह कैरेबियन प्रीमियर लीग में भी खेल चुके हैं, जिससे उनके अनुभव में और इजाफा हुआ।
साद बताते हैं कि जब उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली और लगातार प्रदर्शन करने लगे, तब उनके माता-पिता का नजरिया बदला। जो पिता कभी पढ़ाई को प्राथमिकता देने की सलाह देते थे, वही अब उनके करियर पर गर्व महसूस करते हैं। दो दशकों की इस यात्रा में शिक्षा और संघर्ष दोनों साथ-साथ चले और आज वह कनाडा क्रिकेट की पहचान बन चुके हैं।