By एकता | Mar 06, 2026
मार्च का महीना आते ही हर तरफ से टैक्स बचाने की सलाह और निवेश के कॉल्स आने लगते हैं। अक्सर लोग प्लानिंग की कमी के कारण आखिरी वक्त पर जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। असल में, फाइनेंशियल ईयर के अंत का मतलब सिर्फ टैक्स बचाना नहीं है, बल्कि यह पूरे साल के अपने खर्चों और कमाई का हिसाब देखने का समय है। इस समय की गई छोटी सी लापरवाही अगले साल बड़ी समस्या बन सकती है।
कोई भी निवेश करने से पहले यह साफ कर लें कि आप पुराना या नया टैक्स रिजीम कौन सा चुनने वाले हैं। ज्यादातर गलतियां यहीं होती हैं। अगर आप नया टैक्स सिस्टम चुनते हैं, तो आप धारा 80C या 80D जैसी छूट का फायदा नहीं उठा पाएंगे। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी पसंद तय कर लें। हालांकि, टैक्स बचे या न बचे, भविष्य के लिए निवेश जारी रखना हमेशा फायदेमंद रहता है।
सैलरी पाने वालों के लिए 31 मार्च से ज्यादा जरूरी उनके ऑफिस की डेडलाइन होती है। अगर आप समय पर प्रूफ जमा नहीं करते, तो आपका ज्यादा टैक्स कट सकता है, जिससे हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाएगी। वहीं, फ्रीलांसरों को अपने खर्चों की रसीदें और इनवॉइस तैयार रखने चाहिए। ऑफिस के काम और निजी खर्चों को अलग-अलग ट्रैक करना जरूरी है ताकि जुलाई में रिटर्न भरते समय कोई उलझन न हो।
अगर आपके पास कई FD या RD हैं, तो उन पर मिलने वाला ब्याज चुपचाप बढ़ता रहता है। एक तय सीमा से ज्यादा ब्याज होने पर बैंक खुद ही TDS काट लेते हैं। मार्च खत्म होने से पहले एक बार अंदाजा लगा लें कि आपको कुल कितना ब्याज मिल रहा है। पैन कार्ड अपडेट रखें और अगर जरूरत हो तो टैक्स छूट के फॉर्म समय पर जमा करें, ताकि बैंक बेवजह टैक्स न काटे।
टैक्स बचाने के चक्कर में ऐसी चीजें न खरीदें जिनकी आपको जरूरत नहीं है। उदाहरण के लिए, अगर आपको हेल्थ इंश्योरेंस चाहिए, तो उसका प्रीमियम देना आपकी जरूरत है, सिर्फ 'टैक्स बचाने का तरीका' नहीं। साथ ही, साल खत्म होने से पहले अपने बैंक खातों, डीमैट और इंश्योरेंस में 'नॉमिनी' का नाम जरूर अपडेट करें। सबसे पहले ऊंचे ब्याज वाले कर्ज चुकाएं और एक इमरजेंसी फंड बनाकर रखें।