Ayodhya Ram Mandir के गर्भग्रह में स्थापित होगी रामलला की 51 इंच की मूर्ति, जानें इसकी खासियत

By रितिका कमठान | Jan 09, 2024

अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम 22 जनवरी को होना है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने वाली मूर्ति को लेकर भी अहम जानकारी साझा की है। इस मूर्ति के संबंध में जानने और इसे देखने के लिए लोगों में बेहद उत्सुकता है। 

मूर्ति की लंबाई की है खासियत

चंपत राय ने बताया कि भगवान श्री राम की मूर्ति की लंबाई और इसकी स्थापना की ऊंचाई को लेकर काफी गहन चर्चा की गई है। भारत के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सलाह पर इस मूर्ति को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि राम नवमी को स्वयं भगवान सूर्य श्री राम का अभिषेक करें। दरअसल गर्भग्रह में मूर्ति की स्थापना कुछ ऐसे की जाएगी की दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे रामलला के माथे पर पड़ेंगी जिससे उनकी मूर्ति चमक उठेगी।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंयरव्यू में चंपत राय ने कहा कि भगवान श्री राम लला की बनी मूर्ति पांच साल के बच्चे के रूप में है। यह प्रतिमा 51 इंच ऊंची है, जो काले पत्थर से बनी है और बहुत ही आकर्षक ढंग से बनाई गई है। मूर्ति का चयन चेहरे की कोमलता, आंखों के भाव, मुस्कान और शरीर को ध्यान में रखकर किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक समारोह से पहले प्रदर्शित की जाने वाली मूर्ति को कमल के आकार के मंच पर रखा जाएगा। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से अबतक मूर्ति के संबंध में कोई घोषणा नहीं की है।

इसी बीच एक मूर्तिकार चंद्रेश पांडे ने कहा है कि उनका डिज़ाइन दौड़ से बाहर है। उन्होंने कहा कि इस मूर्ति को जयपुर में बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मूर्ति के निर्माण के लिए सबसे पहली शर्तों में ये भी कहा गया था कि सिर्फ उसी डिजायन का चयन होगा जिसका निर्माण अयोध्या में किया जाएगा। इस मूर्ति में बचपन के अंश के साथ भगवान राम और भगवान विष्णु की झलक देखने को मिलती है। मैं अयोध्या में मूर्ति तैयार नहीं कर सका मगर मैंने इसे जयपुर में तैयार किया। उन्होंने कहा कि मेरा डिजाइन दौड़ से बाहर है मगर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने मेरी मूर्ति को स्वीकार किया गया है।

उन्होंने कहा कि उपरोक्त शर्त के अलावा भी ये प्रतिमा स्थापित नहीं होगी क्योंकि ट्रस्ट किसी और मूर्ति को अंतिम रूप दे चुका है। वहीं चंपत राय ने ये भी जानकारी दी है कि भव्य मंदिर की पहली मंजिल पर सीता, हनुमान और भगवान राम के भाइयों की मूर्तियां भी रखी जाएंगी। हालांकि पहली मंजिल का काम पूरा होने में कम से कम आठ महीने का समय और लग सकता है।

कर्नाटक को माना जाता है कि वो भगवान हनुमान की जन्मस्थली है। वहीं ऐसी खबरें भी है कि कर्नाटक के ही एक प्रसिद्ध मूर्तिकार ने रामलला की मूर्ति का निर्माण किया है, जिसका चयन राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए किया गया है। हाल ही में एक केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि “जहाँ राम हैं, वहाँ हनुमान हैं, अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति के चयन को अंतिम रूप दे दिया गया है। हमारे देश के एक प्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरवान्वित श्री @योगीराज_अरुण, उनके द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी। उन्होंने लिखा कि यह राम-हनुमान के अटूट रिश्ते का एक और उदाहरण है। इसमें कोई गलती नहीं है कि यह हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामलला के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा है।

बता दें कि राम मंदिर में कई तरह की मूर्तियों को लगाया गया है जो मूल रूप से हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित है। इसमें भगवान विष्णु के 'वाहन' कहे जाने वाले हाथियों, शेरों, भगवान हनुमान और गरुड़ की मूर्तियां भव्य राम मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थापित किया गया है।

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