Trump Administration का बड़ा फैसला: H-1B Visa धारकों के लिए खत्म होगा 60-day Grace Period, भारतीयों पर जानें क्या होगा असर?

By अभिनय आकाश | Aug 29, 2026

ट्रंप प्रशासन के एक प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की रेगुलेटरी समीक्षा में मंज़ूरी मिल गई है। इस प्रस्ताव के तहत, नौकरी छूटने के बाद कुछ विदेशी कर्मचारियों को मिलने वाले 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म किया जा सकता है। इस मंज़ूरी के साथ ही यह कदम अब सार्वजनिक होने के और करीब आ गया है। ब्लूमबर्ग लॉ के अनुसार, गुरुवार को 'ऑफिस ऑफ़ इन्फॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स' (OIRA) ने 'डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी' (DHS) के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी। यह कदम H-1B वीज़ा धारक कर्मचारियों, खासकर भारतीयों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि अमेरिकी स्किल्ड-वर्कर वीज़ा प्रोग्राम के तहत फ़ायदा उठाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज़्यादा है।

60-दिन का ग्रेस पीरियड क्या है? 

2017 में लागू नियमों के तहत, कुछ नॉन-इमिग्रेंट वर्कर जिनकी नौकरी खत्म हो जाती है, वे आम तौर पर अमेरिका में लगातार 60 दिनों तक या अपने अधिकृत प्रवास (authorised stay) की अवधि खत्म होने तक इनमें से जो भी पहले रह सकते हैं। H-1B वर्करों के लिए, यह समय उन्हें स्पॉन्सर करने को तैयार कोई दूसरा एम्प्लॉयर खोजने, इमिग्रेशन स्टेटस बदलने या देश छोड़ने की तैयारी करने का मौका दे सकता है। यह नियम E-1, E-2, E-3, H-1B1, L-1, O-1 और TN वीज़ा होल्डर्स और उन पर निर्भर लोगों (डिपेंडेंट्स) समेत कई अन्य कैटेगरी के लोगों पर भी लागू होता है। 60 दिन की अवधि हर मामले में अपने आप लागू नहीं होती है। DHS के पास इसे लागू करने का अधिकार है, और जिस वर्कर का अधिकृत प्रवास (authorized stay) पहले खत्म हो जाता है, उसे पूरे दो महीने नहीं मिलेंगे।

 ट्रंप प्रशासन ने क्या प्रस्ताव रखा है? 

DHS का यह कदम नौकरी छूटने के बाद मिलने वाले 60 दिन के 'ग्रेस पीरियड' (छूट की अवधि) को खत्म करना चाहता है। ब्लूमबर्ग लॉ के अनुसार, इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की रेगुलेटरी समीक्षा से मंज़ूरी मिल गई है; हालांकि, इसका पूरा विवरण अभी जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि अभी यह पता नहीं है कि इसमें कौन से कर्मचारी शामिल होंगे, क्या कोई छूट मिलेगी या नहीं, और अगर DHS कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की योजना बना रहा है, तो वह क्या होगी।

भारतीय H-1B वर्कर क्यों बारीकी से नज़र रखे हुए हैं

यह संभावित बदलाव भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि H-1B वीज़ा पाने वालों में उनकी बड़ी हिस्सेदारी है। 'इंडिया टुडे' के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में मंज़ूर हुई H-1B याचिकाओं में 71 प्रतिशत भारतीय नागरिकों की थीं।

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