पिछले 5 सालों में हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल का 60 फीसदी वक्त, अब तक 6 बार हुआ है रद्द

By अंकित सिंह | Sep 04, 2020

कोरोनावायरस के कारण संसद का मानसून सत्र इस बार देर से शुरू हो रहा है। कोरोना महामारी के इस दौर में पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों के बीच होने जा रहे इस सत्र में शून्य काल को भी सीमित कर दिया गया है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक दोनों सदनों की कार्यवाही अलग-अलग पालियों में सुबह नौ बजे से एक बजे तक और तीन बजे से सात बजे तक चलेगी। शनिवार तथा रविवार को भी संसद की कार्यवाही जारी रहेगी। संसद सत्र की शुरुआत 14 सितम्बर को होगी और इसका समापन एक अक्टूबर को प्रस्तावित है। सिर्फ पहले दिन को छोड़कर राज्यसभा की कार्यवाही सुबह की पाली में चलेगी जबकि लोकसभा शाम की पाली में बैठेगी। खासकर प्रश्न काल के निलंबन से, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाकपा सहित कई विपक्षी दलों के नेता भडक उठे और प्रश्नकाल स्थगित करने के फैसले की आलोचना करते हुए सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोविड-19 महामारी के नाम पर ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ और ‘‘संसद को एक नोटिस बोर्ड’’ बनाने की कोशिश कर रही है। 

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राज्यसभा सचिवालय की मानें तो 2015 से 19 के दौरान कुल प्रश्नकाल का 40 फ़ीसदी वक्त ही इस्तेमाल किया गया है। 5 साल की अवधि में राज्यसभा ने 332 बैठकें हुई है। हर दिन 1 घंटे का प्रश्नकाल उपलब्ध होता है लेकिन केवल 133 घंटे और 17 मिनट का ही उपयोग प्रश्न को उठाने और जवाब प्राप्त करने के लिए किया गया है। सरकार की ओर से इस प्रश्नकाल को रद्द किए जाने पर यह कहा जा रहा है कि फिलहाल सरकार यह चाहती है कि सदस्य कम समय के लिए दिल्ली में रहे और अपना कार्य पूरा कर अपने संसदीय क्षेत्र में लौट सकते है। आपको बता दें कि भारतीय संसद  के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के बाद शुन्यकाल होता है। प्रश्नकाल का समय 11:00 से 12:00 बजे तक तय किया गया है जबकि शुन्यकाल दोपहर 12:00 बजे से आरंभ होता है।

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प्रश्नकाल के दौरान संसद सदस्य सरकार और प्रशासन से विभिन्न मुद्दों पर जानकारी मांगते हैं। सरकार के मंत्री सदस्यों के सवाल का खड़े होकर जवाब देते है। प्रश्नकाल के दौरान कई तरह के सवाल किए जाते हैं इनमें तारांकित प्रश्न, गैर तारांकित प्रश्न, अल्प सूचना प्रश्न, गैर सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न शामिल रहते है। प्रश्नकाल के दौरान ही सरकार को कसौटी पर परखा जाता है। भारत ने प्रश्नकाल की पद्धति इंग्लैंड से ग्रहण की है जहां सबसे पहले 1721 में इसकी शुरुआत हुई थी। भारत में संसदीय प्रश्न पूछने की शुरुआत 1892 के भारतीय परिषद् अधिनियम के तहत हुई। आजादी के पहले पूछने को लेकर कई प्रतिबंध थे परंतु आजादी के बाद इसे हटा लिया गया।

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