85 सैन्य ठिकाने फोड़ दिए, ईरान ने अमेरिका से तुरंत लिया तगड़ा इंतकाम!

By अभिनय आकाश | Jul 08, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद अब ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों समेत कुल 85 लक्ष्यों पर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी इरना के अनुसार ईरान की यह सैन्य कारवाही अमेरिकी हमलों का सीधा जवाब है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के भीतर कई सैन्य अड्डों, रक्षा प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था| जिसके बाद जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया गया है। 

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ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका की ओर से आगे कोई सैन्य कारवाई होती है तो ईरान भी अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकता है। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। जानकार मानते हैं कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कारवाही का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति भी इसी की चपेट में आ सकते हैं। विशेष रूप से होम जलडम मध्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जहां से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है। किसी भी प्रकार की अस्थिरता, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। मध्य पूर्व के कई देशों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है। 

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जानकार मानते हैं कि मौजूदा हालात इलाके को व्यापक सैन्य संघर्ष की ओर धकेल रहे हैं। हालांकि अभी भी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूर्ण पैमाने का युद्ध कब शुरू होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक नए और ज्यादा गंभीर चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। अगर तनाव कम करने के प्रयास सफल नहीं होते तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। लेकिन अब उसी अमेरिका को अफगानिस्तान से खुली चुनौती मिल रही है। जिस तालीबान को कभी अमेरिकी सेना ने दो दशक तक खत्म करने की कोशिश की। आज वही तालीबान अमेरिका के दावों पर तंज कस रहा है। 

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