9 Years of Modi Sarkar: स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार 2014 से 2023 तक कितना बदला देश, काम और कमालों से जानें क्या हम 'अच्छे दिन' के करीब हैं?

By अभिनय आकाश | May 26, 2023

महाभारत के शांतिपर्व में एक श्लोक है- स्वं प्रियं तु परित्यज्य यद् यल्लोकहितं भवेत अर्थात् राजा को अपने प्रिय लगने वाले कार्य की बजाय वही कार्य करना चाहिए जिसमें सबका हित हो। केंद्र की मोदी सरकार के 9 साल के कार्यों का मूल्यांकन उनके संकल्प पत्र में किए गए वादे से करते समय महाभारत में वर्णित यह श्लोक और इसका भावार्थ स्वाभाविक रूप से जेहन में आता है। अच्छे दिन आने वाले हैं हम मोदी जी को लाने वाले हैं, बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार जैसे नारे जब 2014 के लोकसभा चुनाव में सामने आए तो एक दशक के यूपीए शासन से नाखुश जनता को एक उम्मीद नजर आई। याद कीजिए 2014 की मोदी की यात्राएं और सभाएं। भ्रष्टाचार के आरोपों से धूमिल मनमोहन के मंत्रिमंडल के मुकाबले उन्होंने राजनीति में अलादीन का चिराग रख दिया। गुजरात की चौहद्दी से निकले मोदी ने 2014 के चुनाव में उतरते ही एक इतनी बड़ी लकीर खींच दी थी जिसके सामने सब अपने आप छोटे हो गए थे। लोगों में उम्मीद दिखी की मोदी सरकार आने के बाद वाकई अच्छे दिन आ जाएंगे। बीजेपी तो पहले भी जीत चुकी है लेकिन ऐसी जीत पहले कभी नहीं मिली। 182 की चौखट पर हांफने वाली बीजेपी अपने बूते बहुमत के आंकड़े को पार किया। एक चाय वाले ने भारतीय राजनीति के प्याले में तूफान ला दिया। 17 करोड़ से ज्यादा लोगों ने बीजेपी को वोट दे दिया। 29 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। सोलहवीं लोकसभा अपनी सोलहों कलाओं के साथ नरेंद्र दामोदर दास मोदी पर कुर्बान हुई ही लेकिन 17वीं ने तो नरेंद्र मोदी ने खुद को प्रधानमंत्री और निरंतर प्रधानमंत्री के दोराहे पर मूर्धन्य की तरह स्थापित कर दिया। 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो मोदी के आलोचकों को लगा ही बीजेपी 2014 वाला करिश्मा नहीं दोहरा पाएगी और मोदी वेब को भी अब उतना कारगन नहीं बताने से चूके। लेकिन लहर इस बाक के चुनाव में तो सुनामी में तब्दील होती दिखी। 23 करोड़ से अधिक लोगों ने बीजेपी को वोट दिया। नरेंद्र दामोदरदास मोदी के वादों पर एक बार फिर देश ने यकीन किया और एक बार फिर से उन्हें शासन चलाने का जिम्मा सौंपा। 30 मई 2019 को दूसरी बार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मोदी सरकार को देश की सत्ता में काबिज हुए आज पूरे 9 साल हो गए हैं। इन 9 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चाहने वालों के दिलों में, विपक्ष के निशाने पर और दुनिया के सभी बडे देशों की नजरों में लगातार बने रहें। नौ सालों में काफी कुछ बदला और देश की जीडीपी दोगुनी हो गई। आम आदमी की सालाना कमाई भी दोगुनी हो गई। लेकिन महंगाई भी बढ़ी है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर आटा-चावल तक के मूल्यों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इन वर्षों में कौन से ऐसे बड़े मुकाम रहे, जो नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के लिए गेम चेंजर बने और क्या वाकई अच्छे दिन आए या फिर पुराने दिन ही ज्यादा बेहतर थे। 

मोदी सरकार के कार्यकाल में वैसे तो उपलब्धियों की कमी नहीं है, जैसे धारा 370 खत्म करना, राम मंदिर, ट्रिपल तलाक और नागरिकता संशोधन कानून। इन सभी उपलब्धियों के इतर कोरोना काल में तमाम कड़े निर्णय लेने और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करवाने में सफलता हासिल करने की वजह से मोदी सरकार की विश्व भर में काफी प्रशंसा हुई। विश्व के तमाम नेता मोदी सरकार के साथ-साथ पीएम मोदी की भी तारीफ कर चुके हैं। किसी ने मोदी को बताया महान तो किसी ने संजीवनी लाने वाला हनुमान। हाल ही में तो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मोदी का ऑटोग्राफ मांगते नजर आए तो पापुआ गिनी के राष्ट्राध्यक्ष अपने गुरु मोदी के चरणों में शीश नवाते नजर आए। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने तो पीएम मोदी को बॉस ही बना दिया। कुल मिलाकर कहे तों वैश्विक परिदृश्य में मोदी भारत की कूटनीति का वो सिक्का हैं जिनका डंका दुनिया भर की चौपालों पर बज रहा है। 

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मेरा वचन ही शासन

वादे हैं वादों का क्या? चुनाव में वादों के पिटारे के रूप में घोषणापत्र जारी किये जाते हैं। जिसके जरिये सभी पार्टियां अपनी विचारधारा, नीतियां और कार्ययोजना का ब्यौरा जनता के सामने रखती है। सरल भाषा में कहें तो ये बताती है कि अगर वह सत्ता में आई तो आपके, हमारे और सभी जनता के लिए क्या-क्या करेगी। वैसे तो चुनाव में और भी कई पहलु अहम हैं लेकिन घोषणापत्र का एक अहम रोल होता है। जनता भी यह उम्मीद करती है कि इनके द्वारा किये गए वादों पर वो खरे उतरेंगे और उसी के अनुसार वो मतदान कई बार करती भी है। इस तरह पार्टियां अपने घोषणापत्र में ऐसी घोषणाएं करती हैं जो मतदाताओं को लुभा सकें और वो चुनाव जीत सकें। लेकिन आजकल तो घोषणापत्र का नाम ही बदल गया है। शायद इन राजनीतिक पार्टियों को अहसास हो चुका है कि इन घोषणापत्रों से जनता का  विश्वास उठ रहा है। अब घोषणापत्र को संकल्प-पत्र, शपथपत्र, वचन-पत्र, अटल दृष्टि इत्यादि के नाम से जारी किया जाता रहा। जेपी ने 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने, नागरिकता संशोधन कानून लाने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने का वादा किया था। इन तमाम वादों के साथ बीजेपी ने आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए यूएपीए और एसपीजी संशोधन बिल को पास कराने में कामयाब रही है। 

स्वाथ्य सुविधा 

कोरोना महामारी ने देश के लिए एक बेहद ही मजबूत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत को रेखांकित किया। मोदी सरकार में स्वास्थ्य बजट करीब 140 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस साल स्वास्थ्य के लिए सरकार ने 89 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट रखा है। 2014 में देश के अंदर मेडिकल कॉलेज की संख्या 387 थी, जो अब बढ़कर 692 हो चुकी है। 2023 में एम्स की संख्या बड़कर 24 हो चुकी है। 2014 में केवल 6 थी। 2014 तक देश में 723 यूनिवर्सिटी थी, 2023 में जिसकी संख्या बढ़कर 1472 हो चुकी है। 

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अर्थव्यवस्था का कैसा है हाल?

नरेंद्र मोदी ने जब प्रधानमंत्री का पद संभाला तो उस वक्त भारत की जीडीपी 112 लाख करोड़ के करीब थी। लेकिन वर्तमान समय में भारत की जीडीपी 272 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। भारत इस वक्त दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पीएम मोदी ने 2025 तक देश की जीडीपी को 5 ट्रिलियन डॉलर तर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए इस लक्ष्य का समय तक पूरा हो पाना कठिन लग रहा है।

रोजगार पर कितना काम हुआ

मोदी सरकार के दौरान बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हुई है। बेरोजगारी के आंकड़ों पर नजर रखने वाली एजेंसी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों की माने तो देश में वर्तमान समय में करीब 41 करोड़ लोगों के पास रोजगार है। वहीं मोदी सरकार के आने से पहले 43 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। यहां तक की 2019 के चुनाव के बाद सरकार के ही एक सर्वे में सामने आया था कि देश में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत है। इस आंकड़ो को तब 45 सालों में सबसे ज्यादा बताया गया था। 

शिक्षा

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा के अहम रोल निभाता है और उसके विकसित भी बनाता है। मोदी सरकार में शिक्षा का बजट तो बढ़ा है। 9 साल में शिक्षा पर 30 हजार करोड़ रुपये बढ़ा है। 2014 तक देश में 16 आईआईटी संस्थान थे, 2023 में बढ़कर 23 हो चुके हैं। 2014 तक देश में 13 आईआईएम थे, जो अब 20 हो चुके हैं। 

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कुछ घटनाक्रमों पर एक नजर

26 मई 2014: नरेंद्र मोदी ने पीएम के रूप में शपथ ली

21 जून 2015: भरत में पहली बार योग दिवस मनाया गया।

8 नवंबर 2016: नरेंद्र मोदी ने नोटबन्दी का ऐलान किया।

1 जुलाई 2017: पूरे देश मे जीएसटी लागू किया गया।

26 फरवरी 2019: भारतीय सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की।

5 अगस्त 2019: कश्मीर से धारा 370 हटाई गई।

24 मार्च 2020: पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया गया।

5 अगस्त 2020: अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ।

25 फरवरी 2022: यूक्रेन से भारतीयों को लाने का अभियान शुरू किया गया।

9 बड़ी योजनाएं

पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान जनता के स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत गांवों और शहरों में 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण कराया गया। 

मोदी सरकार की जनधन योजना के तहत देशभर में 48.93 करोड़ लोगों ने अपने बैंक खाते खुलवाए। 

पीएम मोदी की मुद्रा योजना में लोगों को बिना गारंटी के सस्ता कर्ज दिया गया। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के लिए 3.45 करोड़ घर बनाए गए। 

मोदी सरकार की उज्जवला योजवा के अंतर्गत 9.59 करोड़ घरों में एलपीजी कनेक्शन की पहुंच बनी। 

केंद्र सरकार की जन आरोग्य योजना के तहत 4.44 करोड़ लोगों का इलाज हुआ। 

मोदी सरकार की किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के 12 करोड़ किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। 

पीएम मोदी की हर धर जल योजा के तहत अब तक 11.66 करोड़ परिवारों को पीने का साफ पानी मुहैया कराया जा चुका है। 

कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुए कोविड टीकाकरण में अब तक 220.67 करोड़ वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है।

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