By Ankit Jaiswal | Apr 24, 2026
पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर इस बार एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली हैं। जहां आमतौर पर चुनाव के दौरान तनाव और हिंसा की खबरें सामने आती हैं, वहीं इस बार मतदान प्रतिशत और शांति दोनों ने ध्यान खींचा हैं।
गौरतलब है कि वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने न्यायालय को बताया कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में करीब 92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक आंकड़ा माना जा रहा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रवासी मजदूर भी अपने घर लौटे ताकि वे अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें हैं।
इस दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने भी एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान दिलाया कि इतने बड़े मतदान के बावजूद किसी तरह की बड़ी हिंसा की खबर सामने नहीं आई हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सहमति जताई और कहा कि सुरक्षा बलों ने बेहतर काम किया, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सका हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ छोटी घटनाएं जरूर सामने आईं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में रही हैं। इस बीच न्यायमूर्ति बागची ने एक बंगाली कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि अक्सर बड़े लोगों के संघर्ष में आम जनता को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस बार हालात अलग नजर आए हैं।
बता दें कि यह मामला मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी शिकायतों से संबंधित है। मौजूद जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने कहा कि जिन लोगों को इस प्रक्रिया से शिकायत है, वे उच्च न्यायालय या अपीलीय प्राधिकरण का रुख कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल के चुनावों में इस बार उच्च मतदान और उम्मीद के अनुसार शांत माहौल ने लोकतंत्र के प्रति लोगों के विश्वास को मजबूत किया है और यह संकेत देता है कि जब जनता जागरूक होती है तो चुनावी प्रक्रिया अधिक मजबूत और सुरक्षित बन सकती हैं।