By संतोष उत्सुक | Mar 22, 2024
तनाव भरी इस दुनिया में कोई भी किसी का न हुआ। ज़िंदगी और दुनिया में बढ़ते तनाव से निबटने के लिए अनेकानेक फार्मूले ईजाद किए गए हैं। वह बात दीगर है कि उनमें से ज्यादातर फेल हो गए हैं। ज़्यादा और बढ़ते काम के दबाव से मानवीय शरीर और दिमाग पर कसते तनाव को ढीला करने के उपदेश देते देते लाखों लोग राहत विशेषज्ञ बन गए हैं। लाखों कमा रहे हैं, लेकिन उन्हें भी यह तनाव रहने लगा है कि लोगों का तनाव कम हो जाने या इस लाभ क्षेत्र में उनसे और बेहतर विशेषज्ञ आने से उनकी कमाई कम न हो जाए।
तनाव पर अध्ययन करने वालों ने यह राज़ जाहिर किया कि जीवन के उतार चढाव से जूझना सेहत के लिए बेहतर रहता है। तनाव से रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधरती है। उनकी यह बात ठीक लगती है। हमारे यहां अधिकांश लोगों की बढ़िया इम्युनिटी होने की वजह, उनके जीवन में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक तनाव का निरंतर रहना है। बात बिलकुल सही है। यह सचमुच जीवन का ज़रूरी हिस्सा है। तनाव के दौरान संयम बरतने वाले, संयत प्रतिक्रिया देने वाले सेहतमंद रहते हैं। उदाहरण के तौर पर हमारे नेता दिन रात तनाव में लिपटे रहते हैं लेकिन सफ़ेद कपडे पहन, झूठ बोलकर, नकली मुस्कुराहटें देकर, शांत बने रहते हैं। अगर तनाव न हो तो इंसान में लचीलापन विकसित नहीं हो सकता। अध्ययन के मुताबिक व्यायाम भी एक तरह का तनाव ही है जो शरीर को मज़बूत बनाता है। हर एक दोस्त के ज़रूरी होने की तरह तनाव भी लाज़मी है। थोडा सा तनाव रखना ज़रूरी समझिए और बार बार गुनगुनाते रहिए थोडा सा तनाव ज़रूरी होता है.....ताकि तनाव महसूस न हो।
- संतोष उत्सुक