International Nurses Day 2026: सेवा और समर्पण की मिसाल Nurses को सलाम, Florence Nightingale ने दिखाई थी सम्मान की राह

By योगेश कुमार गोयल | May 12, 2026

दया और सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिंग की जन्मदाता माना जाता हैं, जिनकी इस वर्ष हम 206वीं जयंती मना रहे हैं। प्रतिवर्ष उन्हीं की जयंती को 12 मई को एक विशेष थीम के साथ ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस’ के रूप में मनाया जाता है और इस विशेष अवसर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत नर्सिंग कर्मियों के योगदान को नमन करना बेहद जरूरी है। इस वर्ष यह दिवस ‘हमारी नर्सें। हमारा भविष्य। सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं।’ थीम के साथ मनाया जा रहा है। इस विषय का उद्देश्य सुरक्षित वातावरण, उचित वेतन और नेतृत्व के अवसरों के माध्यम से नर्सों को सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि रोगी देखभाल और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार किया जा सके। ‘लेडी विद द लैंप’ के नाम से विख्यात नाइटिंगेल का जन्म 206 वर्ष पहले 12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस शहर में हुआ था। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1973 में नर्सों द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों को सम्मानित करने के लिए उन्हीं के नाम से ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ की स्थापना की गई थी, जो प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाते हैं।

इसे भी पढ़ें: National Technology Day 2026: Pokhran-2 ने रखी 'Atmanirbhar Bharat' की नींव, दुनिया ने माना था लोहा

फ्लोरेंस का नर्सिंग के क्षेत्र में पहली बार अहम योगदान 1854 में क्रीमिया युद्ध के दौरान देखा गया। उस समय ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की की रूस से लड़ाई चल रही थी और सैनिकों को रूस के क्रीमिया में लड़ने के लिए भेजा गया था। युद्ध के दौरान सैनिकों के जख्मी होने, ठंड, भूख तथा बीमारी से मरने की खबरें आई। युद्ध के समय वहां उनकी देखभाल के लिए कोई उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ब्रिटिश सरकार द्वारा फ्लोरेंस के नेतृत्व में अक्तूबर 1854 में 38 नर्सों का एक दल घायल सैनिकों की सेवा के लिए तुर्की भेजा गया। फ्लोरेंस ने वहां पहुंचकर देखा कि किस प्रकार वहां अस्पताल घायल सैनिकों से खचाखच भरे हुए थे, जहां गंदगी, दुर्गंध, दवाओं तथा उपकरणों की कमी, दूषित पेयजल इत्यादि के कारण असुविधाओं के बीच संक्रमण से सैनिकों की बड़ी संख्या में मौतें हो रही थी। फ्लोरेंस ने अस्पताल की हालत सुधारने के अलावा घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल में दिन-रात एक कर दिया, जिससे सैनिकों की स्थिति में काफी सुधार हुआ। उनकी अथक मेहनत के परिणामस्वरूप ही अस्पताल में सैनिकों की मृत्यु दर में बहुत ज्यादा कमी आई। उस समय किए गए उनके सेवा कार्यो के लिए ही सभी सैनिक उन्हें आदर और प्यार से ‘लेडी विद द लैंप’ कहने लगे थे। दरअसल जब चिकित्सक अपनी ड्यूटी पूरी करके चले जाते, तब भी वह रात के गहन अंधेरे में हाथ में लालटेन लेकर घायलों की सेवा के लिए उपस्थित रहती थी

1856 में युद्ध की समाप्ति के बाद जब वह वापस लौटी, तब स्वयं महारानी विक्टोरिया ने पत्र लिखकर उनका धन्यवाद किया। उसके कुछ ही माह बाद रानी विक्टोरिया से उनकी मुलाकात हुई और उनके सुझावों के आधार पर ही वहां सैन्य चिकित्सा प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार संभव हुआ और वर्ष 1858 में रॉयल कमीशन की स्थापना हुई। उसके बाद ही अस्पतालों की सफाई व्यवस्था पर ध्यान देना, सैनिकों को बेहतर खाना, कपड़े और देखभाल की सुविधा मुहैया कराना तथा सेना द्वारा डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने जैसे कार्यों की शुरूआत हुई। सेवाभाव से किए गए फ्लोरेंस नाइटिंगेल के कार्यों ने नर्सिंग व्यवसाय का चेहरा ही बदल दिया था, जिसके लिए उन्हें रेडक्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति द्वारा सम्मानित किया गया। मरीजों, गरीबों और पीडि़तों के प्रति फ्लोरेंस की सेवा भावना को देखते हुए ही नर्सिंग को उसके बाद महिलाओं के लिए सम्मानजनक पेशा माना जाने लगा और उनकी प्रेरणा से ही नर्सिंग क्षेत्र में महिलाओं को आने की प्रेरणा मिली। फ्लोरेंस के अथक प्रयासों के कारण ही रोगियों की देखभाल तथा अस्पताल में स्वच्छता के मानकों में अपेक्षित सुधार हुआ। 90 वर्ष की आयु में 13 अगस्त 1910 को फ्लोरेंस नाइटिंगेल का निधन हो गया, जिनकी कब्र सेंट मार्गरेट गिरजाघर के प्रांगण में है। उनके सम्मान में ही उनके जन्मदिवस 12 मई को ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस’ के रूप में मनाए जाने की शुरूआत की गई।

- योगेश कुमार गोयल

(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)

प्रमुख खबरें

Jan Gan Man: Nashik Kumbh पर Justice Prasanna Varale के बयान पर मचा बवाल, आखिर सिर्फ Hindu आयोजनों पर ही क्यों उठाये जाते हैं प्रश्न?

दिल्ली में Swine Flu के 2300+ मामले, Influenza B और Covid की भी दस्तक: सरकार की एडवाइजरी

Delhi H1N1 Crisis: मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने बुलाई आपात बैठक, Health Minister बोले- हालात पूरी तरह काबू में

Raksha Bandhan 2026 पर चाहिए Royal Look? Step-by-Step आज़माएं Smoky Brown Winged Eye Makeup