By अनन्या मिश्रा | May 29, 2026
वैसे तो दुनियाभर में भगवान शिव के कई प्राचीन, अद्भुत और विशाल मंदिर स्थापित हैं। इस शिव मंदिरों को लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसे में आज हम आपको उत्तर प्रदेश के एक अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि वास्तुकला की दृष्टि से बहुत अनोखा है। यह अपनी तरह का एक मात्र मंदिर है। वहीं सावन और महाशिवरात्रि के पावन मौके पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 'मेंढक मंदिर' के नाम से जाने वाले इस अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं।
साल 1860-1870 के बीच ओयल रियासत के राजा बख्श सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके पीछे एक कथा प्रचलित है, जिसके मुताबिक चाहमाना वंश के राजा बख्श सिंह के राज में भयंकर सूखा अकाल पड़ गया था।
राजा भोलेनाथ के भक्त थे और राजा ने एक तांत्रिक की सलाह पर 'मंडूक तंत्र' के आधार पर इस मंदिर का निर्माण मेंढक के आकार में कराया था। इस मंदिर के निर्माण का उद्देश्य बाढ़-सूखे से क्षेत्र की रक्षा करना था। ऐसे में ओयल कस्बे में स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जोकि राजस्थानी वास्तुकला पर आधारित है। मंदिर एक विशाल मेंढक की आकृति के ऊपर बना है। जिसके ऊपर भोलेनाथ का मंदिर है।
भोलेनाथ नंदी पर नहीं बल्कि मेंढक की पीठ पर बैठे हैं और यहां पर मेंढक की पूजा की जाती है।
अन्य शिव मंदिरों में नंदी को बैठी हुई मुद्रा में देखा होगा, वहीं इस मंदिर में नंदी खड़ी मुद्रा में नजर आते हैं, जोकि अपने आप में अनूठा है।
नर्मदेश्वर मंदिर मांडुक तंत्र पर आधारित है।
इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग नर्मदा नदी से लाया गया था। इसको लेकर मान्यता है कि यह शिवलिंग दिन में 3 बार रंग बदलता है।