त्रिवेणी तट पर सजा धर्म, संस्कृति, आस्था, आध्यात्म, व आधुनिकता का अद्भुत संगम

By दीपक कुमार त्यागी | Jan 14, 2025

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की दिव्य धरती पर धर्म-संस्कृति व प्राचीन परंपराओं के अद्भुत संगम से परिपूर्ण दिव्य शहर गंगा यमुना व सरस्वती के संगम तट की रेती पर अब अपना स्वरूप पूरी तरह से ले चुका है। अपनी भव्यता के चलते ही आस्था, धर्म, आध्यात्म व संस्कृति के विशाल संगम का महाकुंभ शुरू होने से पहले ही जबरदस्त चर्चा में आ चुका है। क्योंकि संगम तट पर आधुनिक व प्राचीन के अद्भुत संगम की आस्था और अध्यात्म एक पूरी दुनिया प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अपनी थीम के ही अनुरूप भव्य-दिव्य व नव्य आकार ले चुकी है। दिन-रात की मेहनत के बाद अब संगम तट की रेती पर बसी एक बड़ी अद्भुत भव्य अनोखी नगरी महाकुंभ के आयोजन के साक्षी बनने आ रहे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं व पर्यटकों का दिल खोलकर के स्वागत करने के लिए तैयार हो गयी है। संगम तट की पूजनीय दिव्य धरा पर संत, महात्माओं, श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए एक ऐसा भव्य शहर तैयार हो चुका है, जिसको शिल्पकारों ने इस तरह से तराशा है कि धार्मिक आस्था व प्राचीन संस्कृति के साथ-साथ भौतिक सुख साधनों की कामना रखने वाले लोगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध की गयी हैं, जिसकी भव्यता देखकर के देखने वाले की आंखें चौंधिया जायेंगी।

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इस बार के महाकुंभ 2025 के आयोजन के बजट पर एक नज़र डालें तो महाकुंभ के आयोजन के लिए करीब 7,500 करोड़ रुपए का खर्च सामने आ रहा है। जिस में से 2,100 करोड़ रुपए का आवंटन केंद्र सरकार के द्वारा किया है, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने 5,435.68 करोड़ रुपए का विशाल बजट निर्धारित किया है। जबकि वर्ष 2019 में कुंभ मेले के लिए 4,200 करोड़ रुपए का बजट था। आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो हर कुंभ मेले की तरह ही इस बार भी महाकुंभ का देश की जीडीपी में एक बहुत ही बड़ा योगदान रहने की संभावना है, जिसके चलते ही मेला क्षेत्र छोटे व बड़े व्यापारियों, दुकानदारों आदि को आकर्षित करने का कार्य बखूबी कर रहा है, लोग महाकुंभ क्षेत्र में तरह-तरह का व्यापार करने के लिए उत्साहित हैं।

हालांकि सनातन धर्म संस्कृति व परंपराओं के अनुसार महाकुंभ का यह पूरा समय ही अनुष्ठानों का एक भव्य दिव्य समागम है। जिसमें पूरे समय ही पूजा पाठ व स्नान आदि मुख्य रूप से होता है, लेकिन इस मेले में कुछ विशेष तिथि पर स्नान करने को बहुत ही शुभ माना जाता है। जिसमें भाग लेने के लिए ही संगम के किनारे करोड़ों संत, महात्मा व तीर्थयात्री एकत्रित होते हैं और उन सभी का अटूट, श्रद्धा व विश्वास होता है कि शाही स्नान के लिए तय तिथियों में संगम के पवित्र जल में स्नान करने से उनका जीवन धन्य हो जाता है, उनको सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और वह स्वयं खुद के साथ-साथ अपने पूर्वजों को भी पुनर्जन्म के जीवन चक्र से मुक्त कर सकते हैं, इसलिए शाही स्नान की तिथि पर कुंभ नगरी में भारी भीड़ रहती है। इस बार महाकुंभ में शाही स्नान की वह विशेष तिथियां हैं - 

पौष पूर्णिमा 13 जनवरी 2025। 

मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025। 

मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025। 

बसंत पंचमी 03 फ़रवरी 2025। 

माघी पूर्णिमा 12 फ़रवरी 2025।

महा शिवरात्रि 26 फ़रवरी

2025 हैं, जिन पर स्नान करने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपनों के दिव्य भव्य व नव्य महाकुंभ की

बहुत सारी विशेषताएं हैं। सरकार ने महाकुंभ-2025 को भव्य, दिव्य और नव्य स्वरूप प्रदान करते हुए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का कार्य किया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे महाकुंभ स्थल को एक जनपद का दर्जा दिया गया है और वहां पर जनपद स्तरीय अधिकारियों की पूरी टीम तैनात की गयी है। एक जनपद की तरह ही जरूरी विभिन्न विभागों के कार्यालय सर्किट हाउस और पुलिस लाइन का निर्माण किया गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आने की उम्मीद को देखते हुए इस बार कुंभ क्षेत्र का विस्तार 4000 हेक्टेयर में किया गया है, भारी भीड़ के मद्देनजर महाकुंभ की बसावट में बदलाव किया गया है। इस बार 25 सेक्टर में महाकुंभ नगरी को बसाया गया है। एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर जाने के लिए गंगा पर 30 पोंटून पुल बनाये गये हैं। 

महाकुंभ में 'स्वच्छ भारत मिशन' को अमली जामा पहनाने के लिए स्वच्छता का माडल प्रस्तुत होगा। योगी सरकार ने महाकुंभ को स्वच्छता के माडल के रूप में देश व दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए पूरी तैयारी की है। योगी सरकार ने स्वच्छ महाकुंभ के मद्देनजर इस बार 1.5 लाख शौचालय बनाये हैं, मेला क्षेत्र में 25 हज़ार कूड़ेदान लगाए गए हैं, 15 हज़ार स्वच्छता कर्मी तैनात किए हैं, 160 अपशिष्ट प्रबंधन वाहनों का इंतजाम किया है।

महाकुंभ को दिव्य व भव्य बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मंदिर एवं घाटों का सौंदर्यीकरण किया गया है, 29 मंदिरों का सौंदर्यीकरण किया गया है, 11 कॉरिडोर का विकास किया गया है, 12 किमी अस्थायी घाट का निर्माण किया गया है, 8 किमी रिवर फ्रंट सड़कें बनाई गयी हैं।

महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए सबसे बड़ा अस्थायी शहर बनाया गया है, 1.5 लाख टेंट लगाये गये हैं, 69 हज़ार एलईडी लाइटिंग और सौर हाइब्रिड स्ट्रीट लाइटिंग लगायी गयी हैं। 400 किलोमीटर से अधिक की अस्थायी सड़कें और चेक-ओर्ड प्लेट शीट बनायी गयी हैं।

महाकुंभ की तैयारियों के लिए प्रयागराज को स्मार्ट सिटी के रूप में तैयार किया गया है।

1800 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पार्किंग विकसित की गयी है,

201 सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया, 40 जंक्शनों और 48 सड़कों का सौंदर्यीकरण किया गया, 14 आरओबी और फ्लाईओवर का विकास किया गया है।

डिजिटल कुंभ के लिए 1.5 लाख

टेंट और शौचालयों की निगरानी की जा रही है, 2600 से अधिक 

भीड़ निगरानी सेटअप कैमरे जगह-जगह लगाए गए हैं, 24x7 आईसीसीसी निगरानी रहेगी,

10 डिजिटल खोया-पाया केंद्र बनाए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महाकुंभ की इन विश्व स्तरीय अत्याधुनिक तैयारियों के दम पर ही कहा जा सकता है कि इस बार 13 जनवरी से 26 फ़रवरी तक चलने वाले महाकुंभ के मेले मे त्रिवेणी संगम तट और गंगा, यमुना, सरस्वती मिलन के स्थल पर संत, महात्मा, श्रद्धालु व पर्यटक भारी संख्या में आकर के सुलभता के साथ स्नान करते हुए अपने जीवन को धन्य करेंगे और देश व प्रदेश की जीडीपी में अपना  योगदान देंगे।

- दीपक कुमार त्यागी

वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक

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