आधार से राशन मिलता है, वोटिंग का अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर पूछा सवाल

By अभिनय आकाश | Nov 27, 2025

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयास को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम बहस शुरू की और स्पष्ट किया कि आधार को नागरिकता के निर्विवाद प्रमाण के रूप में नहीं माना जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि चुनाव आयोग के पास "फॉर्म 6 में प्रविष्टियों की शुद्धता निर्धारित करने की अंतर्निहित शक्ति" है, जिसका उपयोग मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। न्यायाधीशों ने दोहराया कि आधार का उद्देश्य सीमित है। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा आधार लाभ प्राप्त करने के लिए क़ानून द्वारा बनाया गया है। सिर्फ़ इसलिए कि किसी व्यक्ति को राशन के लिए आधार दिया गया है, क्या उसे मतदाता भी बनाया जाना चाहिए?

मान लीजिए कोई पड़ोसी देश का निवासी है और मज़दूरी करता है, तो क्या उसे वोट देने की अनुमति दी जानी चाहिए? सर्वोच्च न्यायालय ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि निर्वाचन निकाय को एक "डाकघर" की तरह काम करना चाहिए तथा प्रत्येक फॉर्म 6 को स्वतः स्वीकार कर लेना चाहिए। पीठ ने पूछा आप कह रहे हैं कि चुनाव आयोग एक डाकघर है जिसे आपके द्वारा प्रस्तुत फॉर्म 6 को स्वीकार करना चाहिए और उसमें आपका नाम भी शामिल करना चाहिए। कुछ याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि एसआईआर प्रक्रिया आम मतदाताओं पर असंवैधानिक बोझ डालती है, जिनमें से कई को कागजी कार्रवाई में परेशानी हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा भी हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: आखिर भारतीय संविधान से अपेक्षित मौलिक संशोधन कबतक? समझिए कितने हैं जरूरी?

हालाँकि, पीठ ने कहा कि यह दावा कि इस तरह का संशोधन पहले कभी नहीं किया गया है, चुनाव आयोग के इस प्रक्रिया को चलाने के अधिकार को कमज़ोर करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकतापीठ ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी नाम को हटाने से पहले उचित सूचना दी जानी चाहिए। अदालत ने तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में एसआईआर को अलग-अलग चुनौतियों के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की। चुनाव आयोग को तमिलनाडु की याचिकाओं का 1 दिसंबर तक जवाब देना होगा, उसके बाद 4 दिसंबर की सुनवाई से पहले दो दिनों के भीतर प्रत्युत्तर देना होगा। केरल की याचिकाओं पर 2 दिसंबर को सुनवाई होगी, जबकि चुनाव आयोग का जवाब 1 दिसंबर को आना है। 

प्रमुख खबरें

PM Modi की 7 अपीलों पर Sachin Pilot का बड़ा हमला, पूछा- Government सच क्यों छिपा रही है?

West Asia संकट पर Rajnath Singh की बैठक, सरकार का संदेश- Fuel Supply है, Panic की जरूरत नहीं

Somnath के आसमान में Suryakiran Team का शौर्य, PM Modi बोले- दिखा गौरव और वीरता का अद्भुत संगम

Matcha का दौर खत्म? Social Media पर छाया पर्पल ड्रिंक Ube का जादू, जल्द करें ट्राई