मोदी सरकार के अध्यादेश से बौखलाए केजरीवाल! कहा- केंद्र का अध्यादेश ‘असंवैधानिक’ है, दिल्ली सरकार से शक्तियां छीनने की कोशिश

By रेनू तिवारी | May 20, 2023

सुप्रीम कोर्ट के दस दिन पहले दिए गए आदेश का विरोध करते हुए, केंद्र ने शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि दिल्ली के नौकरशाहों के स्थानांतरण और पोस्टिंग पर अंतिम अधिकार उपराज्यपाल का था, न कि दिल्ली सरकार का। केंद्र सरकार ने स्थानांतरण पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों से संबंधित मामलों के संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल को सिफारिशें करने के लिए एक अध्यादेश के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी सेवा प्राधिकरण की स्थापना की है।

इसे भी पढ़ें: भगवान का दूत बनकर संकट में भारतीय सेना ने बचाई 500 लोगों की जिंदगी, सिक्किम में आये भूस्खलन में बुरी तरह फंसे थे पर्यटक

गौरतलब है कि अध्यादेश जारी किए जाने से महज एक सप्ताह पहले ही उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि को छोड़कर अन्य सभी सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंप दिया था। आतिशी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह अध्यादेश दर्शाता है कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को (दिल्ली के) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल’’ और ईमानदार राजनीति की शक्ति से ‘‘डर लगता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (मोदी को) डर लगता है कि यदि उन्हें (केजरीवाल को) शक्ति मिल गई, तो वह दिल्ली के लिए असाधारण काम करेंगे। यह अध्यादेश 11 मई को उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘आप’ को दी गई शक्तियां छीनने की एक कोशिश है।’’ मंत्री ने कहा कि यह अध्यादेश कहता है कि दिल्ली के लोगों ने भले ही केजरीवाल को वोट दिया है, लेकिन वह दिल्ली को नहीं चलाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र ने इस अध्यादेश को लाने के लिए जानबूझकर कल (शुक्रवार) रात का समय चुना। उच्चतम न्यायालय छह सप्ताह के अवकाश के कारण बंद हो गया है और यह काम को बाधित करने के लिए जानबूझकर की गई कोशिश है।’’ आतिशी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने आठ साल की लंबी लड़ाई के बाद दिल्ली सरकार को शक्तियां दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन केंद्र इसे बर्दाश्त नहीं कर सका। अध्यादेश तीन सदस्यों वाले राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के गठन की बात करता है, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे और मुख्य सचिव एवं प्रमुख गृह सचिव इसके सदस्यों के रूप में काम करेंगे, लेकिन इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि मुख्य सचिव एवं प्रमुख गृह सचिव की नियुक्ति केंद्र करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्राधिकरण बहुमत से फैसले करेगा। इसका मतलब है कि फैसले केंद्र के नौकरशाहों द्वारा किए जाएंगे। अगर वह कोई ऐसा फैसला करता है, जो केंद्र को पसंद नहीं है, तो उपराज्यपाल के पास उसे पलटने का अधिकार होगा।

प्रमुख खबरें

Akshaya Tritiya 2026: Akshaya Tritiya 2026 पर Gold Purchase से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानें सबसे शुभ मुहूर्त

Nari Shakti की उड़ान को रोका गया, Womens reservation Bill पर PM मोदी बोले- विपक्ष को उनके पाप की सजा जरूर मिलेगी

West Asia में बढ़ते तनाव पर High Level Meeting, राजनाथ सिंह ने बनाई Risk Management की रणनीति

IPL 2026: डेविड मिलर की आंधी में नहीं टिक पाई RCB, रोमांचक मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स की बेहतरीन जीत