By अंकित सिंह | Jan 02, 2026
भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (आईएनएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने एक विवादास्पद टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारत में भी श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हाल ही में हुए आंदोलनों की तरह ही आंदोलन होने चाहिए, जिन्होंने इन देशों में सरकारों को गिरा दिया। एक व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो में चौटाला ने कहा कि इन देशों में मुख्य रूप से युवाओं के नेतृत्व में हुए जन विरोध प्रदर्शनों को भारत में वर्तमान सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक आदर्श के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीलंका में जिस तरह बांग्लादेश के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, जिस तरह नेपाल के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, उसी तरह की रणनीति भारत में भी अपनानी होगी ताकि मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाया जा सके। उनके ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताया।
एक वीडियो संदेश में पूनावाला ने विपक्षी नेताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना में संविधान-विरोधी, भारत-विरोधी मानसिकता अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी अंबेडकर के संविधान के खिलाफ जाने की इच्छा को दर्शाती है और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास को कमजोर करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि ये टिप्पणियां दिखाती हैं कि विपक्षी दल अपने हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रख रहे हैं।
सत्ताधारी दल भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विपक्षी नेताओं के बीच उभर रहे "भारत-विरोधी विमर्श" की ओर इशारा किया। भंडारी ने चौटाला की टिप्पणी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी समेत वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने एक ऐसा विमर्श फैलाया है जो भारत की राजनीतिक व्यवस्था की वैधता को चुनौती देता है।