भारत और पाक के विदेश मंत्री गये थे चीन, किसको मिली सफलता ?

By नीरज कुमार दुबे | Aug 13, 2019

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी गये तो थे कश्मीर मुद्दे पर चीन का समर्थन हासिल करने लेकिन चीन ने झटका देते हुए कह दिया कि भारत और पाकिस्तान, दोनों उसके पड़ोसी मित्र हैं और दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और शिमला समझौते के माध्यम से कश्मीर मुद्दे को सुलझाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कश्मीर मुद्दे पर किसी भी प्रकार की मध्यस्थता करने से एक बार फिर इंकार कर दिया है और इसी के साथ पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर अपनी हार मान ली है। जी हाँ, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है, 'हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए और इस बात को मान लेना चाहिए कि कश्मीरियों और पाकिस्तानियों के साथ कोई नहीं खड़ा है। चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद कुरैशी ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने की बात कही थी लेकिन अब वह कह रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी पाकिस्तान को कोई समर्थन मिलना मुश्किल है। कुरैशी ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र माला लेकर हमारा इंतजार नहीं करेगा। कुरैशी की यह निराशा दर्शाती है कि पाकिस्तान की हेकड़ी चीन को पसंद नहीं आई और उसने इस्लामाबाद को तगड़ा झटका दे दिया। दरअसल चीन को पाकिस्तान का घिनौना रूप तब देखने को मिला जब पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह कह दिया कि उनका देश ताइवान और तिब्बत के मुद्दे पर चीन के साथ है इसलिए उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर मुद्दे पर चीन उनका साथ देगा। पाकिस्तान को फंडिंग करने वाले चीन को यह उम्मीद नहीं थी कि कुरैशी अपनी हैसियत से बाहर आकर बराबरी पर बात करने लगेंगे। चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद शाह महमूद कुरैशी ने कह दिया कि पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जायेगा जहां उसे चीन का समर्थन मिलेगा। लेकिन चीन ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी प्रस्ताव के समर्थन की बात नहीं कही है जिसके बाद कुरैशी की निराशा छलकी।

इसे भी पढ़ें: चुनाव कैसे जीतेगी कांग्रेस जब पार्टी नेतृत्व का ही मनोबल गिरा हुआ है

दूसरी ओर, कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के फैसले के बाद भारत ने जिस तरह परिपक्व राजनय का परिचय देते हुए संयुक्त राष्ट्र के स्थायी सदस्यों सहित अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रों को तो भरोसे में लिया ही साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर को चीन की यात्रा पर भी रवाना कर दिया। जहाँ जयशंकर ने कश्मीर मुद्दे पर चीन की सारी शंकाएं दूर कर दीं। जयशंकर ने चीन को स्पष्ट रूप से बता दिया कि भारत ने जो फैसला लिया है वह संविधान के तहत लिया है और इसका पाकिस्तान और चीन की वर्तमान सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल चीन इस बात को लेकर आशंकित था कि भारत सरकार के इस फैसले का क्षेत्रीय अखंडता पर असर पड़ सकता है। जब चीनी उपराष्ट्रपति के साथ जयशंकर की साझा प्रेस वार्ता हो रही थी तो अक्साई चिन का मामला भी उठा था जिसको लेकर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कोई असर नहीं होगा बल्कि यह फैसला भारत की सीमा के अंदर आने वाले राज्य के प्रशासन से जुड़ा हुआ है।

 

जयशंकर ने जिस तरह से चीनी नेतृत्व को समझाया उससे स्पष्ट होता है कि क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्री पद के लिए इस बार जयशंकर का नाम तय किया था। मोदी कोई काम तुरंत नहीं करते बल्कि उसके लिए पूरी योजना बनाते हैं और फिर उसे अमली जामा पहनाते हैं। जयशंकर वर्ष 2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे थे। किसी भारतीय दूत का चीन में यह सबसे लंबा कार्यकाल था। उन्होंने चीन के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ बनाने में महती भूमिका निभाई। वर्ष 2017 में डोकलाम में 73 दिनों तक दोनों देशों की सेनाओं के बीच रही गतिरोध की स्थिति को सुलझाने और उसके बाद मोदी और शी जिनपिंग ने पिछले साल वुहान में अनौपचारिक वार्ता आयोजित करने में भी जयशंकर की अहम भूमिका रही थी। यहाँ इस आंकड़े पर भी गौर करना चाहिए कि इस साल पहली बार भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर पार करने की उम्मीद है जबकि पाकिस्तान चीन से सिर्फ कर्ज पर कर्ज लिये जा रहा है।

इसे भी पढ़ें: पेशेवर निराशावादी हैं चिदम्बरम, अय्यर और दिग्विजय सिंह जैसे नेता

खैर...पाकिस्तान अब अपने स्वतंत्रता दिवस यानि 14 अगस्त को कश्मीर मुद्दे पर हो-हल्ला मचाने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वह 14 अगस्त को ‘‘कश्मीर एकजुटता दिवस’’ और 15 अगस्त को ‘काला दिवस’ के तौर पर मनाएगा। इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 14 अगस्त को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा करेंगे और उसकी विधानसभा को संबोधित भी करेंगे। अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने के लिए हाथ-पैर मार रहे पाकिस्तान को जब कहीं से सफलता नहीं दिख रही तो अपने कब्जे वाले उन कश्मीरियों को जिनका जीना उसने बेहाल कर रखा है वहां कई बड़े नेता ईद मनाने पहुँचे। शाह महमूद कुरैशी ने मुजफ्फराबाद में ईद की नमाज अदा की तो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी ईद उल अजहा मुजफ्फराबाद में मनाया। पाकिस्तानी विदेश मंत्री खुद कुछ नहीं कर पाये तो कश्मीरियों और पाकिस्तानियों का आह्वान कर रहे हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब संयुक्त राष्ट्र जाएं तो उनके खिलाफ प्रदर्शन किया जाना चाहिए। अब जब कुरैशी संयुक्त राष्ट्र की बात कर रहे हैं तो आपको बता दें कि वहां पाकिस्तान की स्थायी राजदूत हैं मलीहा लोधी। मलीहा लोधी पर एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक पाकिस्तानी ने ही आरोप लगाया कि वह रिश्वत लेती हैं और पाकिस्तान के हितों को नुकसान पहुँचा रही हैं। तो यह है पाकिस्तान के हुक्मरानों का वह असली चेहरा जिससे वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी धोखा दे रहे हैं और अपने देशवासियों को भी।

 

-नीरज कुमार दुबे

 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Vancouver-Toronto रूट पर Air India की बदहाली, Congress MP ने नए मंत्री Rammohan Naidu को लिखी चिट्ठी.

Shahpur Kandi Dam से Pakistan पर वॉटर स्ट्राइक, अब रावी का पानी नहीं जाएगा पार

T20 World Cup Super 8 में महामुकाबला, South Africa और West Indies से भिड़ेगी Team India

Husband-Wife विवाद पर High Court का बड़ा आदेश, कहा- Maintenance कोई दान नहीं, बल्कि पत्नी का अधिकार