West Bengal में BJP की प्रचंड जीत के बाद खुलने लगे वर्षों से बंद पड़े मंदिर, हर ओर गूंज रहा जय श्री राम

By नीरज कुमार दुबे | May 06, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की शानदार और ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे राज्य में हिंदू समाज के बीच उत्सव का माहौल अब भी बना हुआ है। गांवों से लेकर शहरों तक जय श्री राम के नारों की गूंज सुनाई दे रही है। अनेक स्थानों पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन और धार्मिक आयोजनों का दौर जारी है। इसी बीच कई ऐसे पुराने मंदिर भी दोबारा खोले जा रहे हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान लंबे समय तक खुलने नहीं दिया गया था। इन घटनाओं को राज्य में बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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मंदिर के पुनः खुलने के बाद स्थानीय भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने इसे राज्य के बदलते राजनीतिक वातावरण का प्रतीक बताया है। आसनसोल दक्षिण सीट से चालीस हजार आठ सौ उनतालीस मतों के अंतर से जीत दर्ज करने वाली अग्निमित्रा पॉल का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है। स्थानीय भाजपा नेता तथा मंदिर समिति के सदस्य नीलू चक्रवर्ती ने कहा कि मंदिर के दोबारा खुलने से क्षेत्र के हिंदू समाज को बड़ी राहत मिली है। उनका कहना था कि पहले मंदिर में प्रवेश और पूजा की व्यवस्था केवल कुछ विशेष त्योहारों तक सीमित कर दी गई थी, जिससे आम श्रद्धालुओं में निराशा थी।

नीलू चक्रवर्ती ने यह भी दावा किया कि इस विषय को लेकर वर्षों तक दिल्ली के राजनीतिक नेतृत्व से लगातार गुहार लगाई जाती रही। उन्होंने मंदिर के पुनः खुलने को राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन से जोड़ते हुए कहा कि अब हिंदू समाज स्वयं को अधिक सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है। आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने भी अपनी जीत के बाद मंदिर पहुंचकर पूजा की। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने वादा किया था कि यदि वह विजयी होते हैं तो मंदिर को पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खुला रखा जाएगा। उनके मंदिर पहुंचने के साथ ही औपचारिक रूप से मंदिर के पुनः संचालन की शुरुआत हुई। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं बल्कि राज्य में आए व्यापक राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक भी बन गया है।

हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत ने राज्य की राजनीति में एक बड़े पुनर्संतुलन का संकेत दिया है। भाजपा समर्थकों का दावा है कि अब धार्मिक स्थलों के विकास, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक आस्थाओं को नया बल मिलेगा।

इसी बीच बीरभूम जिले के बोलपुर स्थित कंकालितला मंदिर में लगा एक बोर्ड भी चर्चा का विषय बन गया है। इसमें लिखा गया है कि केवल हिंदुओं को ही मंदिर में पूजा करने की अनुमति होगी। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह बोर्ड कुछ अज्ञात युवकों ने लगाया था। मंदिर के पुजारी बैद्यनाथ चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रशासन ने न तो इसको हटाया है और न ही इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में प्रवेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं है, हालांकि परंपरागत रूप से हिंदू श्रद्धालु ही देवी की पूजा करते हैं। वहीं तारापीठ मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पुलक चटर्जी ने कहा कि वहां कभी किसी श्रद्धालु की धार्मिक पहचान की जांच नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि अतीत में कई गैर हिंदू विशिष्ट व्यक्तियों ने भी मंदिर पहुंचकर श्रद्धा व्यक्त की है और कभी कोई विवाद नहीं हुआ। इस बीच, जिला भाजपा अध्यक्ष ने शक्तिपीठ के बगल में बनाये गये पब्लिक टॉयलेट को बंद करने की मांग करते हुए उस पर ताला जड़ दिया है।

बहरहाल, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विमर्श भी तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। मंदिरों के दोबारा खुलने, धार्मिक आयोजनों की बढ़ती संख्या और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने राज्य में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दिया है।

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