गुजरात के बाद कर्नाटक के भी स्कूलों में पढ़ाई जा सकती है गीता, दारुल उलूम ने बताया मुस्लिम विरोधी फैसला

By अभिनय आकाश | Mar 18, 2022

गुजरात सरकार ने स्कूली बच्चों को गीता का सार पढ़ाने का फैसला किया है। अब कर्नाटक के भी स्कूली पाठ्यक्रम में भगवद गीता को शामिल किया जा सकता है। कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भगवद गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है बल्कि सभी के लिए है। इस पर विवाद शुरू हो गया।स्कूलों में गीता पाठ पढ़ाने को लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का बयान सामने आया है। उन्होंने इस पर तंज कसते हुए कहा कि इनके कर्म रावण वाले हैं और भगवत गीता की बात कर रहे हैं। 

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि भगवद गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, यह सभी के लिए है। जानकारों की माने तो इसे स्कूल में जरूर पढ़ाया जाना चाहिए। पहले हमें तय करना है कि नैतिक शिक्षा को स्कूल में फिर से शुरू करना है या नहीं। बीसी नागेश ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की कमेटी बनानी होगी। जो तय करेंगे कि नैतिक शिक्षा में कौन से विषय होने चाहिए। बच्चों पर जो अच्छा प्रभाव डालता है, उसे पढ़ाना शुरू किया जा सकता है-चाहे वो भगवद गीता हो, रामायण हो या महाभारत हो। 

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गुजरात में छठी से 12वीं कक्षा तक पढ़ाया जाएगा गीता पाठ 

इसकी शुरुआत गुजरात सरकार के फैसले से हुई है। गुजरात सरकार ने जो नई शिक्षा नीति लागू की है उसमें क्लास 6 से बारह के बच्चों को श्रीमदभगवत गीता का सार, इसके मूल पढ़ाने की बात है। गुजरात सरकार ने भगवद् गीता को अकादमिक वर्ष 2022-23 से पूरे राज्य में छठी से 12वीं कक्षाओं तक के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने की बृहस्पतिवार को विधानसभा में घोषणा की। शिक्षा मंत्री जीतू वघानी ने शिक्षा विभाग के लिए बजटीय आवंटन पर विधानसभा में एक चर्चा के दौरान यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि भगवद् गीता में मौजूद नैतिक मूल्यों एवं सिद्धांतों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय केंद्र की नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की तर्ज पर लिया गया है।

दारुल उलूम ने मुस्लिम विरोधी फैसला बताया 

देवबंद दारुल उलूम के काजी इसे मुसलमान विरोधी फैसला बता रहे हैं। वो मुस्लिम बच्चों को गीता पाठ से अलग रखने की डिमांड कर रहे हैं। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने स्कूलों में गीता पाठ को लेकर कहा कि मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं। ये एक अच्छा फैसला है। लेकिन जो लोग इसे लेकर आए हैं उन्हें अपने जीवन में गीता का अनुसरण करना चाहिए। उसके बाद ही ऐसा कोई फैसला लेना चाहिए।

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