PM मोदी की अपील के बाद क्यों अचानक बाजार में बढ़ी मोमबत्ती की मांग

By निधि अविनाश | Apr 04, 2020

नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में रविवार पांच अप्रैल को देशवासियों से अपने घरों की बालकनी में खड़े रहकर नौ मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा, ''हमें कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में 130 करोड़ देशवासियों के महासंकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। इसलिये पांच अप्रैल, रविवार को रात नौ बजे मैं आप सबके नौ मिनट चाहता हूं। आप घर की सभी लाइटें बंद करके, घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर नौ मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं।’’ उन्होंने कहा कि इस रविवार हम सबको मिलकर, कोविड-19 के संकट के अंधकार को चुनौती देनी है। मोदी ने लोगों से सामाजिक दूरी को बनाये रखने की अपील भी की। 

मोमबत्ती निर्माताओं को मांग बढ़ने की उम्मीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को रात नौ बजे मोमबत्ती, दीये, टॉर्च, मोबाइल फोन टॉर्च जलाने के आह्वान से मोमबत्ती निर्माताओं को उम्मीद है कि इससे उनके उत्पाद की मांग बढ़ेगी। प्रधानमंत्री द्वारा शुक्रवार सुबह किए गए आह्वान के बाद सजावटी मोमबत्ती बनाने में महारत रखने वाली लक्की कैंडल इंडिया कंपनी की प्रर्वतक एम सुजाता को लगातार ग्राहकों के फोन आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता प्रकट करने के लिए रविवार रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने अपने घरों की बालकनी और दरवाजे पर मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल फोन की टॉर्च जलाने का आह्वान किया है। 

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प्रधानमंत्री द्वारा किए गए इस ऐलान के बाद से मोमबत्ती कंपनी लक्की कैंडल को लगातार  ग्राहकों के फोन आ रहे हैं, इससे मोमबत्ती की मांग भी काफी बढ़ रही है। नौ मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया जलाने से बिजली कंपनियों के सामने संकट पैदा हो गई है। कहा जा रहा है कि अगर पूरे भारत में 9 मिनट के लिए बिजली जाने के बाद अचानक बिजली चालू की जाती है तो इससे पूरे देश में ब्लैकआउट होने का डर है। समझा जाता है कि इससे ग्रिड की स्थिरता को लेकर पावर ग्रिड के प्रबंधकों की चिंता बढ़ गयी है।देश में ‘लॉकडाउन ’ (प्रतिबंध)के कारण बिजली की मांग पहले से कम है, ऐसे में अचानक से मांग ‘बंद’ होने से क्या ग्रिड स्थिति से निपट सकता है?बिजली मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि आपदा के समय भी उतार-चढ़ाव को ग्रिड झेलती है और स्थिर रहती है। और ये स्थिति तो पहले से पता है। ऐसे में पावर ग्रिड और दूसरी एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं और उन्हें ग्रिड को स्थिर बनाये रखने का पूरा भरोसा है। सूत्र ने कहा, ‘‘पूरा बिजली क्षेत्र अभी दबाव में है। लॉकडाउन के कारण मांग पहले से ही कम है। कुछ मिनटों केलिये एकदम से बिजली बंद होने से कुछ दबाव हो सकता है लेकिन हमें समय का पहले से पता है, हम पहले से इसकी योजना बना सकते हैं।’’ बिजली मंत्रालय की ओर से जारी आंकडों के अनुसार दो अप्रैल को बिजली की मांग 25 प्रतिशत घटकर 1,25,810 मेगावाट रह गयी जो पिछले साल दो अप्रैल को 1,68,320 मेगावाट थी।

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