आर्टिकल 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में तेज हुई विकास की रफ्तार, युवाओं को भी मिल रहा रोजगार

By अंकित सिंह | Aug 04, 2020

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के खात्मे के बाद राज्य में एक अलग सा माहौल है। इस ऐतिहासिक फैसले का 1 साल पूरा होने जा रहा है। देश में इस बात को लेकर खुशी है। कश्मीर आर्टिकल 370 के हटने के बाद मुख्यधारा में लौटने लगा है। अगर देखा जाए तो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कश्मीर में शांति बनी रही। लेकिन जम्मू कश्मीर के लिए एक ऐसी समस्या भी है जो फिलहाल खत्म करना बड़ी चुनौती है। दरअसल यह चुनौती स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने का है।एक बात सच और भी है इससे जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में विकास का मुद्दा भी काफी अहम है। सड़क, पानी, बिजली जैसी समस्या वहां खत्म करना वहां की सबसे बड़ी जरूरत है। मोदी सरकार उस दिशा में बढ़ भी रही है। सरपंच और पंचों के जरिए जम्मू कश्मीर में विकास के कार्य करवाए जा रहे हैं। केंद्रीय परियोजनाएं भी खूब शुरू हो रही हैं।

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स्थानीय लोगों को नौकरी देने के लिए सरकार की ओर से सबसे बड़ी पहल की गई है कि जम्मू कश्मीर सिविल सेवा अधिनियम को गृह मंत्रालय ने संशोधित कर दिया। इस संशोधन में कहा गया है कि धारा तीन को में वर्णित ग्रुप 4 को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर किसी भी पद को नहीं जोड़ा गया है। यानी कि अब प्रदेश के लोगों को भी सरकारी पद के लिए मौके मिल सकेंगे। 1 अप्रैल को जारी सरकारी गजट के अनुसार 138 कानूनों में संशोधन कर दिया गया था। आर्टिकल 370 और 35a हटने के बाद जमीन तथा नौकरी को लेकर प्रदेश वासियों की चिंता को देखते हुए केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि जल्दी ही डोमिसाइल कानून लागू किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में डॉक्टरों, पशुचिकित्सकों और पंचायत सहायकों के कुल 10,000 पदों पर भर्ती की जा रही है जबकि आगामी महीनों में विभिन्न विभागों में 25,000 लोगों की भर्ती करने की योजना है। 

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जम्मू कश्मीर में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाया गया है। ग्राम के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से 4483 पंचायतों को 366 करोड़ रुपए की राशि देगी। युवा सरपंचों को महत्व दिया गया तथा सरपंचों को प्रतिमाह ₹2500 और पंचों को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जाने की शुरुआत कर दी गई है। ग्राम पंचायतों की बही खाते की देखरेख के लिए दो हजार से ज्यादा अकाउंटेंट की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने का फैसला लिया गया ताकि युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे। इसके अलावा सड़क, बिजली और पानी के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर में खूब काम किए जा रहे है। मनरेगा के तहत स्थानीय लोगों को ही रोजगार प्रदान किए जा रहे है। केंद्र सरकार कौशल विकास योजना के तहत भी जम्मू-कश्मीर में रोजगार को बढ़ावा देने में जुटी हुई है। कोरोना संक्रमण के दौरान भी राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिल सके इसके लिए भी सरकार प्लान तैयार कर रही है।

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आर्टिकल 370 के खात्मे के बाद जम्मू कश्मीर में समय-समय पर केंद्रीय मंत्रियों ने भी दौरा किया है। सरकार की ओर से यह कहा गया कि मंत्रियों के इस दौरे का उद्देश्य जम्मू कश्मीर के सर्वांगीण विकास के लिए मेगा प्लान तैयार करना है। जनवरी महीने में मंत्रियों ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया था। मंत्रियों का अप्रैल में भी दौरा होना था लेकिन कोरोनावायरस के कारण यह दौरा नहीं हो पाया। लेकिन इस दौरे के बाद कश्मीर के विकास के लिए जो भी सुझाव दिए गए उस पर अमल करने के प्रयास किए गए हैं। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना संक्रमण के दौरान कश्मीर में विकास कार्य धीरे पड़ गए हैं। देश अनलॉक 3 में आगे बढ़ रहा है तो कश्मीर में भी विकास की रफ्तार में तेजी देखने को मिल रही है। उम्मीद यही की जा सकती है कि आर्टिकल 370 के हटने के बाद कश्मीर के युवा रोजगार के सहारे मुख्यधारा में लौटेंगे।

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