By अभिनय आकाश | Jul 12, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से सैन्य हमले हुए हैं, जिससे उनके बीच सीधा टकराव और बढ़ गया है और तीन हफ़्ते पहले हुआ नाज़ुक संघर्ष-विराम टूटने के कगार पर पहुँच गया है। वाशिंगटन ने ईरान के ठिकानों पर एक और दौर के हमले किए—यह कहते हुए कि इस ऑपरेशन का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाले कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा करना था—जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। तेहरान ने अमेरिका पर इस रणनीतिक जलमार्ग में दखल देने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि आगे कोई भी दखलंदाज़ी करने पर "करारा जवाब" दिया जाएगा; साथ ही ज़ोर देकर कहा कि यह जलडमरूमध्य केवल ईरान की देखरेख में ही दोबारा खुलेगा।
कुवैत की सेना ने कहा कि वे अभी कुवैत के हवाई क्षेत्र में दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को रोक रहे हैं। अधिकारियों ने लक्ष्यों की संख्या या उनके मूल स्थान के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं दी।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दूसरे जहाज़ पर हमला ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक दूसरे "नियम तोड़ने वाले जहाज़" पर हमला किया और उसे रोक दिया। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने एक बयान में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इज़राइल की "आक्रामक हरकतें" जारी रहीं, तो इसके जवाब में "और भी ज़्यादा विनाशकारी" कार्रवाई की जाएगी।
IRGC का कतर में अल-उदीद एयर बेस पर हमले का दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने मिसाइल हमलों से कतर में अल-उदीद एयर बेस को निशाना बनाया। IRGC का कहना है कि उसने बेस पर मौजूद फाइटर एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस सेंटर और कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर को नष्ट कर दिया है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही अमेरिकी या कतरी अधिकारियों की ओर से इस बारे में कोई तत्काल पुष्टि की गई है।
अमेरिका के हालिया हमलों में ईरान के अहम मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया
US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने इस हफ़्ते 11 जुलाई को ईरान के ख़िलाफ़ हमलों का तीसरा दौर पूरा किया, जो इस मिलिट्री कैंपेन का नया चरण है। CENTCOM के मुताबिक, इस ऑपरेशन में ज़मीन और समुद्र से उड़ान भरने वाले फ़ाइटर जेट, ड्रोन और नौसेना के जहाज़ों से सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों (precision-guided munitions) का इस्तेमाल करके ईरान के लगभग 140 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।