2 CM, 12 मंत्री...RSS-मोदी की सीक्रेट मीटिंग के बाद बीजेपी से लेकर सरकार तक में होगा बड़ा बदलाव, अमित शाह को लेकर चौंकाने वाली खबर!

By अभिनय आकाश | Aug 08, 2025

संसद का मानसून सत्र कई मामलों में ऐतिहासिक है। चर्चा संसद में हो रही है, लेकिन सत्ता के गलियारों में असली हलचल मची है। ये हलचल आने वाले बड़े सत्ता संतुलन के संकेत दे रही है। सरकार और भारतीय जनता पार्टी दोनों स्तर पर एक व्यापक फेरबदल की तैयारियां लगभग तय मानी जा रही है। इस बार का बदलाव सिर्फ नामों का नहीं होगा। बल्कि रणनीति, ताकत और नेतृत्व की परिभाषा तक को नया आकार देने वाला हो सकता है। 2024 के आम चुनावों में हालात बदले और बीजेपी 272 के जादुई आंकड़े से पीछे रह गई। 240 सीटे लाकर बीजेपी ने गठबंधन के सहारे सरकार बना ली। भाजपा ने इस साल 8 राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव लड़ा। इसमें 5 राज्यों- आंध्र, अरुणाचल, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा या गठबंधन की सरकार बनी। 

राजस्थान में वसुंधरा फैक्टर भी से आएगा नजर

अभी हाल ही में आपने देखा कि वसुंधरा राजे सिंधिया ने मुलाकात की। ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब 20 मिनट तक मुलाकात की। वैसे तो  मुलाकात अनौपचारिक थी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष बात यह है कि वसुंधरा राजे ने इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। पिछले कुछ समय से राजस्थान भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कहा जा रहा है कि भजन लाल शर्मा की कुर्सी जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा हाईकमान अब राजस्थान में एक बार फिर वसुंधरा राजे को बड़ी भूमिका देने पर विचार कर सकता है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल का मामला थोड़ा अलग है। उन्होंने खुद कहा है कि वो इस जिम्मेदारी को दोबारा नहीं निभाना चाहते। अब ये अलग बात है कि ये इच्छा उनकी खुद की है या हाईकमान की अनकही सलाह, ये अभी क्लियर नहीं।  

बीजेपी अध्यक्ष पद में रखा जाएगा ये ख्याल

बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर अभी तक ऐलान नहीं हुआ और कहा जा रहा है कि संघ और मोदी एक पेज पर नहीं हैं। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष के चयन में पॉ़लिकल कैलकुलेशन का ध्यान रखा जाता है। संघ का मानना है कि हमें पॉलिटिकल मैसेजिंग के तरीके से अध्यक्ष चुनने की आवश्यकता नहीं है। हमें ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो कार्यकुशल है और संगठन को लीड कर सकता हो। इसके अलावा उपराष्ट्रपति का चयन भी होना है। इसमें दो गवर्नर प्रमुख दावेदार हैं, जम्मू कश्मीर और कर्नाटक के गवर्नर को भी रेस में बताया जा रहा है। ऐसे में कास्ट कंबीनेशन कुछ ऐसा होगा कि अगर उपराष्ट्रपति सामान्य वर्ग से होता है तो अध्यक्ष ओबीसी या एससीएसटी वर्ग से हो सकता है। इसका उल्टा भी हो सकता है। 

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धनखड़ प्रकरण के बाद संघ हुआ सर्तक

कुछ समय पहले खबरें आई थी कि प्रधानमंत्री मोदी और सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच रिश्तों में दूरी आ गई है। लेकिन वो फेज अब गुजर चुका है। अब संघ और भाजपा दोनों ने समझ लिया है कि जब देश और पार्टी बदलाव के मूड में है तो साथ मिलकर काम करना ज्यादा जरूरी है। इसी सोच के तहत ये तय किया जा रहा है कि भाजपा का नया अध्यक्ष न सिर्फ मोदी का करीबी होगा। बल्कि संघ की सोच को भी समझने और निभाने वाला होगा। दरअसल, संघ अब और ज्यादा सर्तक हो गया है। उन्हें ये बात जगदीप धनखड़ जैसे प्रयोगों से समझ में आ गई है कि अगर ऐसे किसी व्यक्ति को अहम पद दे दिया जाए जिसकी पृष्ठभूमि संघ से नहीं रही है। तो वो कई बार मुश्किलें खड़ी कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी अब 2029 के आम चुनाव की रणनीतिक तैयारी में जुट चुके हैं। लेकिन उनका मकसद केवल चुनाव जीतना नहीं है वो भारत को एक वैश्विक नेता के रूप में खड़ा करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें ऐसा संगठन और सरकार चाहिए जिसमें किसी भी स्तर पर सुस्ती या ढीलापन न हो। इसलिए आने वाले समय में न सिर्फ सरकार में बैठे मंत्रियों के काम की समीक्षा की जाएगी। ये भी देखा जाएगा कि वो चुनावी लिहाज से कितने उपयोगी हैं और संगठन के लिए कितना योगदान दे सकते हैं। इन सबसे खास बात कि सबसे महत्वपूर्ण सीसीएस में भी बदलाव संभव है। 

सीसीएस में भी होगा बदलाव?

12-13 मंत्रियों की भी छुट्टी की खबर है। कहा जा रहा है कि वैसे चेहरों को मौका मिल सकता है जो पहले कभी मंत्री नहीं रहे। तमिलनाडु के अन्नामलाई और हिमाचल के अनुराग ठाकुर को बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा तेजस्वी सूर्या को भी जगह मिल सकती है। वहीं 2014 से लगातार मंत्री बनते चले आ रहे चेहरों में बदलाव हो सकता है। इसके अलावा सीसीएस में भी बड़े बदलाव की खबर है। गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका इस समिति में बनी रहेगी। लेकिन वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय या विदेश मंत्रालय जैसे बड़े विभागों में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही भाजपा के संगठन में नए नाम और युवा चेहरे और ऐसे नेता जो 2029 तक पार्टी को मजबूती से आगे ले जा सके। उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी। कहा तो ये भी जा रहा है कि अमित शाह वित्त मंत्रालय भी संभाल सकते हैं। हालांकि ये अटकलें भी हो सकती हैं। लेकिन जब किसी नेता का नाम एक साथ दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों से जोड़ा जाता है तो सामान्यत: इसे केवल राजनीतिक अटकल माना जाता है। लेकिन यही बात अमित शाह के मामले में थोड़ा उलट है। लोगों को विश्वास हो जाता है कि अमित शाह को जो भी काम दिया जाएगा वो कर लेंगे। 

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