अनुशासन से आई चुस्ती (बाल कहानी)

By संतोष उत्सुक | Mar 24, 2026

शेखू को कई साल तक यह पता नहीं था कि उसका  नाम ऐतिहासिक है। बचपन से उसे राजकुमारों की तरह एक टांग मोड़कर उस पर दूसरी टांग टिकाकर  हाथ में दूध की बोतल पकड़कर आराम से दूध पीने की आदत रही। धीरे धीरे बड़ा हुआ तो उसकी आदतों में आलस शुमार होने लगा। स्कूल में सहपाठियों ने उसके नाम का अर्थ पूछा तो उसे पता नहीं था। उसने अपने पापा से पूछा तो बताया कि तुम्हारा नाम महान कहे जाने वाले मुगल सम्राट अकबर के बेटे सलीम के नाम पर है। सलीम को घर में प्यार से शेखू पुकारा जाता था। शेखू यह सुनकर बहुत खुश हुआ और उसके दोस्त बोले, क्या नाम है तुम्हारा वाह! 

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अपने कमरे में जाकर आँखें मीचकर वह कुछ देर अकेला बैठा रहा फिर एक कागज़ पर बार बार कुछ लिखता रहा। कुछ देर बाद उसके पापा ने आकर उसे प्यार से समझाया कि यूं उदास हो जाने से कुछ नहीं होगा। घबराओ मत यह तो आपके जीवन की पहली प्रतियोगिता थी। अभी तो तुमने सैकड़ों प्रतियोगिताओं में शामिल होना है। जीवन एक प्रतियोगिता है जिसमें जीत हार तो चलती रहती है। तुम्हें अपने आप से वायदा करना है कि तुम सुस्ती छोड़ दोगे और अपने सभी प्रयास पूरी मेहनत, निश्चित समय में तत्परता से करोगे। शेखू ने नीची नज़र कर वह कागज़ पापा को थमा दिया था। जिस पर सुन्दर शब्दों में सौ बार लिखा हुआ था, पापा अब मैं सुस्ती नहीं करूंगा। उसकी आँखों में निश्चय की चमक थी वह बदल चुका था। पापा ने उसे एक घड़ी उपहार में दी और कहा यह लो कल से अलार्म लगाकर उठना और अपना वादा निभाना। अगली सुबह सचमुच अच्छी रही शेखू ने अलार्म बजते ही बिस्तर छोड़ दिया था और कुछ देर व्यायाम के बाद पढ़ने बैठ गया था। उसके जीवन में चुस्ती प्रवेश कर चुकी थी। 

- संतोष उत्सुक

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