जब Pakistan में एक कान के छेद ने फंसाया था Ajit Doval को, पढ़ें RAW Agent की अनसुनी Spy Story

By प्रेस विज्ञपति | Mar 01, 2026

हमारे देश के राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल,IPS का 81वां जन्मदिन समारोह अहमदाबाद में चंगोदर स्थित श्रीमती एन.एम.पाडलिया फार्मेसी कॉलेज में मगनभाई पटेल की अध्यक्षता में मनाया गया। इस मौके पर केक काटकर ईश्वर से उनके दीर्घायु के लिए मंगलकामनाए की गई,प्रसाद बाटा गया और उनकी उपलब्धियाँ को प्रेजन्टेशन के रूप में स्क्रीन पर बताई गई,कॉलेज के सभी छात्र उनकी उपलब्धियाँ देखकर काफी प्रभावित हुए और अपने स्थान पर खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया एव एक शूर में कहा कि देश के लिए समर्पण,साहस और सेवा का प्रतीक,जुग-जुग जिओ हमारे अजित डोभाल। आपको जन्मदिन की ढेर सारि शुभकामनाएं। इस मौके पर कॉलेज के प्रिन्सिपल जीतूभाई भंगाले, कॉलेज के सभी प्रोफेसर और लगभग 150 फार्मेसी स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में मौजूद थे।


इस अवसर पर कॉलेज के चेरमेन एव मैनेजिंग ट्रस्टी मगनभाई पटेल ने अपनी स्पीच में कहा कि हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी साहब के नेतृत्व में भारतीय डिफेंस सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव आया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के मंत्र की बदौलत है। अजीत डोभाल जैसी शक्तिशाली शख्सियत से आज हमारे देश की बॉर्डर सिक्योरिटी, होम सिक्योरिटी और हमारे देश के सरहदी इलाका पूरी तरह से सुरक्षित हैं।जब-जब दुश्मन देशोंने भारत की शांति भंग करने के लिए देश के नागरिकों एव सुरक्षाकर्मियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है तब-तब प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी साहब और उनकी टीम के नेतृत्व में अजीत डोभालजीने दुश्मन देशों को उनकी सोच से भी परे मुंहतोड़ जवाब दिया है, जिसका आज न केवल भारत बल्कि दुनिया के देश ध्यान दे रहे हैं।अजीत डोभालजी की तेज बुद्धि और तुरंत मजबूत फैसले लेने की काबिलियत की वजह से आज दुश्मन देश भारत के लिए खतरा बनने से पहले सौ बार सोचते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक,ऑपरेशन सिंदूर,एयर स्ट्राइक जैसे कई ऑपरेशन के मास्टरमाइंड अजीत डोभाल को इंडियन “जेम्स बॉन्ड” भी कहा जाता है। उनकी देशभक्ति लाखों युवाओं को प्रेरित करती है।

 

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मगनभाई पटेल साहबने प्रोफेसरों और स्टूडेंट्स को अजीत डोभाल के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी,1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की। उन्हें स्कूल के दिनों से ही मिलिट्री डिसिप्लिन की समझ थी। स्कूल पूरा करने के बाद उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में MA किया और पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद IPS की तैयारी शुरू कर दी। उनके पिता मेजर गुणानंद डोभाल भी भारतीय सेना में अधिकारी थे।उन्होंने 36 वर्षों तक बंगाल सैपर्स में सेवा की है। अजित डोभाल साल 1968 में केरल कैडर से IPS के लिए चुने गए उसके बाद 1971 में थालास्सेरी के ASP बनाए गए। यहां उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दंगों को शांत कराने में गजब की भूमिका निभाई। जिसकी वजह से वह हीरो बन गए। साल 1972 में उन्हें IB यानि इंटेलिजेंस ब्यूरो की ऑपरेशनल विंग में शामिल किया गया। उन्होंने 7 साल तक पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट के तौर पर भी काम किया। साल 1981 से 1987 तक इस्लामाबाद में भारतीय हाईकमीशन में तैनात रहनेवाले अजित डोभाल पाकिस्तान से खुफिया जानकारियां जुटाकर भारत भेजा करते थे।1999 में जब इंडियन एयरलाइंस का एक प्लेन हाईजैक करके कंधार ले जाया गया, तो तालिबान के साथ बातचीत में अजीत डोभाल ने बहुत अहम भूमिका निभाई थी। साल 2005 में एक तेज-तर्रार इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर स्थापित अजीत डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए। इसके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बने। इस दौरान उन्होंने अखबारों में आर्टिकल भी लिखे। 30 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने अजीत डोभाल को देश का 5वां राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। इससे पहले शिवशंकर मेनन भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर थे। अजीत डोभाल पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान चर्चा में आए थे। उत्तराखंड के एक साधारण गढ़वाली परिवार में जन्मे अजीत डोभाल को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी, श्रीनगर ने अपने 7वें कॉन्वोकेशन के मौके पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है।उन्होंने साल 1972 में अरुणी डोभाल से शादी की और उनके दो बच्चे शौर्य और विवेक डोभाल हैं।


मगनभाई पटेलने आगे कहा कि “अजीत डोभाल के बारे में कहा जाता है कि वह अपने काम को लेकर इतने जुनूनी हैं कि उसे पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अपनी 37 साल की सर्विस में अजीत डोभालने सिर्फ सात साल वर्दी पहनी और 30 साल तक जासूसी की।जब भारतने साल 1972 में अपना पहला न्यूक्लियर टेस्ट किया तो अमेरिका ही नहीं बल्कि पाकिस्तान भी परेशान हो गया था और तब घबराकर पाकिस्तानने फ्रांस और चीन से मदद मांगी और अपना न्यूक्लियर कैंपेन शुरू कर दिया। जब फ्रांस को पता चला कि पाकिस्तान सिर्फ भारत के खिलाफ न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो उसने इस प्लान से दूरी बना ली,जबकि चीन और नॉर्थ कोरियाने पाकिस्तान का साथ दिया। ऐसी खबरें थीं कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद के कहूटा शहर में खान रिसर्च सेंटर में न्यूक्लियर टेस्टिंग की तैयारी चल रही है,लेकिन कोई पक्की जानकारी नहीं थी। उस समय अजीत डोभाल पाकिस्तान के कहूटा शहर पहुंचे और वहां खान रिसर्च सेंटर के बाहर भिखारी बनकर बैठने लगे और उन्होंने रिसर्च सेंटर के साइंटिस्ट्स का पीछा करना शुरू किया और पाया कि एक नाइ की दुकान जहाँ वे साइंटिस्ट अपने बाल कटवाते थे,तब उन्होंने किसी तरह उन साइंटिस्ट के बालों के सैंपल इकट्ठा किये और चुपके से इंडिया भेज दिया,क्योंकि ऐसा माना जाता है की न्यूक्लियर टेस्टिंग के दौरान उसका रेडिएशन इंसान के शरीर के अंग जैसे बाल,नाखून,स्किन वगैरह पर लग जाता है।जब इंडियन साइंटिस्टने उन बालो को एनालाइज किया तो वे हैरान रह गए । उन बालो में हाई ग्रेड यूरेनियम पार्टिकल्स पाए गए और रेडिएशन का लेवल इतना मिला कि यह साबित करने के लिए काफी था कि पाकिस्तान न सिर्फ न्यूक्लियर पावर बना रहा था बल्कि न्यूक्लियर बम बनाने के बहुत करीब था, अजीत डोभाल का वह एक सैंपल भारत सरकार के लिए बहुत बड़ी जीत थी। अगर अजीत डोभाल के इस काम में एक छोटी सी भी चूक होती तो उसका नतीजा दर्दनाक मौत होता। जब पाकिस्तान को खबर मिली कि उनके न्यूक्लियर टेस्ट की जानकारी इंडिया तक पहुँच गई है,तो पाकिस्तानने इंडिया के RAW के इंटेलिजेंस एजेंट्स को मार डाला। 


जासूसी की दुनिया में एक कहावत है कि आप हजार बार कामयाब हो सकते हैं लेकिन एक छोटी सी गलती हारने के लिए काफी होती है और अजीत डोभाल के साथ यही हुआ। लाहौर में एक मशहूर दरगाह जहाँ बहुत बड़ी तादाद में भीड़ थी,अपनी पहचान बनाए रखने के लिए वह अक्सर उस दरगाह पर नमाज पढ़ने जाते थे और लोगों के बीच एक पक्के मुसलमान की तरह रहते थे। एक बार शाम को वह उस दरगाह में एक कोने में बैठे थे,माहौल एकदम शांत था तब उन्हें  लगा कि कोई उन्हें देख रहा है। जब उन्होंने इधर-उधर देखा तो पाया कि उनके सामने एक बूढ़ा मुसलमान आदमी बैठा है, जिसकी लंबी सफेद दाढ़ी और लाल आँखें थीं, वह आदमी सिर्फ डोभाल को देख रहा था,डोभालने उस आदमी की तरफ देखा-अनदेखा किया और जाने लगे,तभी उस आदमीने उन्हें रोका और धीमी आवाज में पूछा,"क्या तुम हिंदू हो?" यह सुनकर अजीत डोभाल के पैरों तले से जमीन खिसक गई।अगर यह बात किसी को पता चल जाती कि यहाँ एक हिंदू जासूस है, तो भीड़ उसे वहीं जिंदा जला देती,लेकिन अजीत डोभाल हार माननेवालों में से नहीं थे। उन्होंने बड़े कॉन्फिडेंस से कहा,"नहीं बाबा,मैं मुसलमान हूँ।" उसी पल उस बूढ़े आदमीने डोभाल के कान की तरफ इशारा करके कहा,"अगर तुम मुसलमान हो,तो तुम्हारे कान क्यों छिदे हुए हैं?" फिर डोभाल को बचपन में की गई अपनी गलती याद आ गई, हिंदू कल्चर के हिसाब से उनके कान छिदे हुए थे। वे पूरी तैयारी के साथ पाकिस्तान गए थे, उन्होंने भाषा बदल ली थी, कपड़े बदल लिए थे,लेकिन कान छिदवाने से उनकी जान खतरे में पड़ गई थी,फिर वह बूढ़ा आदमी डोभाल को अपने साथ एक अंधेरे कमरे में ले गया और मोमबत्ती की धीमी रोशनी में एक छोटी सी अलमारी खोली। जब डोभालने देखा कि उस अलमारी में भगवान शंकर और देवी दुर्गा की एक छोटी सी मूर्ति है, तो डोभाल हैरान रह गए। वह बूढ़ा आदमी कोई और नहीं बल्कि एक हिंदू था,जिसने साल 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान अपने परिवार को खो दिया था। अपनी जान बचाने के लिए उसने अपना धर्म बदल लिया था और तब से वह मुसलमान बनकर पाकिस्तान में रह रहा था, लेकिन उसने अपनी असली पहचान इस अंधेरे कमरे में छिपा रखी थी। उस बूढ़े आदमीने डोभाल को सलाह देते हुए कहा कि आज तुम बच गए,लेकिन अगर तुम जिंदा रहना  चाहते हो तो यह निशान हटाना होगा। डोभालने उनकी सलाह मानी और अगले दिन प्लास्टिक सर्जरी करवाकर अपने कान का छेद भर लिया। अजीत डोभाल फिर 7 साल तक पाकिस्तान में रहे और न सिर्फ न्यूक्लियर प्लानिंग बल्कि ISI के कई सीक्रेट भी भारत सरकार को भेजे। उसके बाद भारतने पाकिस्तान को इस हद तक बर्बाद कर दिया कि उनके न्यूक्लियर टेस्ट को कई सालों तक टालना पड़ा।


मगनभाई पटेलने स्टूडेंट्स को नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) का पद साल 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री माननीय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयीजी की सरकार में बनाया गया था। वाजपेयी सरकार में उस समय के चीफ सेक्रेटरी ब्रजेश मिश्रा को 19 नवंबर,1998 को NSA अपॉइंट किया गया था। साल 2019 तक नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को मिनिस्टर ऑफ स्टेट का दर्जा मिला हुआ था, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार के बाद उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा दिया गया। NSA का पद सबसे पावरफुल पद माना जाता है। NSA प्रधानमंत्री को न सिर्फ नेशनल सिक्योरिटी बल्कि फॉरेन पॉलिसी से जुड़े मामलों पर भी सलाह देता है। चाहे सर्जिकल स्ट्राइक करनी हो या एयरस्ट्राइक से जवाब देना हो, सारे फैसले NSA की सलाह पर ही लिए जाते हैं। 2016 में उरी हमले के बाद पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा हमले के बाद एयरस्ट्राइक के साथ-साथ ऑपरेशन सिंदूर में भी अजीत डोभाल की भूमिका अहम थी। इतना ही नहीं, 2017 में जब डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा, तो डोभालने उसे खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाई थी। अजीत डोभाल कीर्ति चक्र से सम्मानित होनेवाले पहले पुलिस अफसर हैं। NSA नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) का हेड होता है। NSA प्रधानमंत्री को अंदरूनी और बाहरी खतरों से जुड़े मामलों पर रोजाना जानकारी देता है और प्रधानमंत्री की तरफ से स्ट्रेटेजिक और सेंसिटिव मामलों पर नजर रखता है। NSA हर दिन IB और RAW जैसी एजेंसियों से इंटेलिजेंस इकट्ठा करता है और उसकी जानकारी प्रधानमंत्री को देता है। NSA की मदद के लिए एक डेप्युटी NSA होता है। अभी रिटायर्ड IPS दत्तात्रेय पडसलगीकर, पूर्व RAW चीफ राजिंदर खन्ना और पूर्व IFS ऑफिसर पंकज सरन डेप्युटी NSA हैं। भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी कहती है कि भारत कभी भी किसी देश पर पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करेगा। अगर कोई देश भारत पर न्यूक्लियर हमला करता है, तो वह हमला सेल्फ-डिफेंस में किया जाएगा। लेकिन न्यूक्लियर हमले का ऑर्डर देने से पहले कई बातों पर सोचा जाता है। कोई भी न्यूक्लियर वेपन लॉन्च करने से पहले एक सीक्रेट कोड होता है जो NSA के पास होता है। इस कोड को डालने के बाद ही न्यूक्लियर वेपन लॉन्च किए जा सकते हैं। जब कोई नया प्राइम मिनिस्टर आता है, तो नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर उसे न्यूक्लियर वेपन के सीक्रेट कोड सौंप देता है। इसके साथ NSA ही उन्हें न्यूक्लियर वेपन से जुड़ी सारी जानकारी देता है।

हमारे देश की सुरक्षा के लिए,जब से देश आजाद हुआ है, कई बहादुर सैनिकों एव जासूसोंने भारत की रक्षा में अहम योगदान दिया है,जिनमें से कुछ की जानकारी हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।

 

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अनंत नारायण मिश्रा-द अनसंग हीरो (1965 वॉर) :-भारत-पाकिस्तान 1965 वॉर के दौरान अनंत नारायण मिश्रा पाकिस्तान के लाहौर रेलवे कंट्रोल रूम में पोस्टेड थे। वह एक सीक्रेट नेटवर्क के जरिए पाकिस्तानी सैनिकों की मूवमेंट, हथियारों की सप्लाई और रेडियो कम्युनिकेशन जैसी जरूरी जानकारी भारत भेजते थे। उनकी दी गई जानकारी के आधार पर भारत ने कई हमलों का समय और दिशा तय की, जिससे उसे युद्ध में स्ट्रेटेजिक फायदा मिला।


“नूर बेगम”–लेडी स्पाई (1971 वॉर):- नूर बेगम एक पाकिस्तानी नागरिक थीं लेकिन 1971 के बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान उन्होंने भारत के लिए एक इंटेलिजेंस एजेंट के तौर पर काम किया। उन्होंने समय-समय पर भारत को पाकिस्तानी मिलिट्री एक्टिविटीज और अत्याचारों के बारे में जानकारी दी। उनकी जानकारी के आधार पर भारतीय सेनाने कई हमलों का सफलतापूर्वक जवाब दिया।


रविंदर कौशिक:-

रविंदर कौशिक को इंडियन RAW का सबसे सफल जासूस माना जाता है। उन्होंने 1975 से 1983 तक भारत-पाकिस्तान के खुफिया ऑपरेशन में हिस्सा लिया। रविंदरने अपना धर्म बदलकर "नबी अहमद शाकिर" नाम रख लिया और पाकिस्तानी आर्मी में मेजर के पद तक पहुंचने में कामयाब रहे। उन्होंने लगातार पाकिस्तानी आर्मी की खुफिया जानकारी, युद्ध की योजनाएं और तैनाती की जानकारी भारत भेजी, जिससे भारत को कई ऑपरेशन में फायदा हुआ। उन्हें 1983 में गिरफ्तार किया गया और 14 साल तक पाकिस्तानी जेल में रहने के बाद उनकी मौत हो गई। RAW ने उन्हें "ब्लैक टाइगर" का टाइटल दिया था।


कश्मीर सिंह:-

कश्मीर सिंह इंडियन आर्मी के एक पुराने सैनिक थे,जिन्हें 1973 में जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें लाहौर और रावलपिंडी की जेलों में 35 साल तक टॉर्चर सहना पड़ा। साल 2008 में पाकिस्तान के उस समय के प्रधानमंत्री जनरल परवेज मुशर्रफने उन्हें माफ कर दिया, जिसके बाद वे भारत लौट आए।


भरतभाई सुथार:-

भरतभाई सुथारने इंडियन आर्मी में पंजाब, लेह लद्दाख, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, झांसी, राजस्थान बॉर्डर,कच्छ बॉर्डर, सिक्किम चीन बॉर्डर, गलवान वैली जैसे इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्हें कई मेडल भी मिले हैं, जिसमें कारगिल वॉर और सियाचिन ग्लेशियर, जो दुनिया का सबसे ठंडा बैटलफील्ड है जहां उन्होंने 18 महीने (1997-99) तक सेवाए दी है। उन्हें ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत के लिए मिलिट्री सर्विस मेडल भी मिले हैं। इसके अलावा उन्होंने साल 2002-2003 के दौरान गोवा में करीब 5000 सैनिकों को मिलिट्री ट्रेनिंग दी है। आज रिटायरमेंट के बाद भरतभाई सुथार युवाओं को सेना में भर्ती करने के लिए भुज में ग्लेशियर आर्मी एकेडमी चलाते हैं और अब तक लगभग 150 सैनिक देश की आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में शामिल हो चुके हैं। भरतभाई सुथार की बेटी हिनाबेन सुथार भी गुजरात पुलिस में कांस्टेबल के पद पर काम करती हैं।


भारत की खुफिया एजेंसियों जैसे RAW, आर्मी इंटेलिजेंस (AI), नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कई जासूस हैं जिनके नाम कभी सामने नहीं आते। लेकिन युद्धों में भारत की जीत में उनका योगदान बहुत अहम होता है। आज की पीढ़ी को इन लापता नायकों के बलिदान और साहस से प्रेरणा लेने की जरूरत है।


लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी:-

“ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान पाकिस्तानी आतंकवादियों को मिट्टी में मिला देनेवाली दो महिलाओं में से एक, लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी,जो गुजराती हैं और मूल रूप से गुजरात राज्य के वडोदरा शहर से हैं, वे इंडियन आर्मी की सिग्नल कोर में ऑफिसर हैं। गुजरात की लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी के पास बायोकेमिस्ट्री में पोस्टग्रेजुएट डिग्री है। उनका जन्म 1981 में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे मुकाम तय किए हैं, जो महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। सोफिया कुरैशीने आर्मी की मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री में सेवा देनेवाले मेजर ताजुद्दीन कुरैशी से शादी की। उनका एक नौ साल का बेटा समीर कुरैशी है। सोफिया कुरैशी के दादा भी आर्मी में थे और उनके पिताने भी कुछ सालों तक आर्मी में शिक्षक के तौर पर काम किया था। सोफिया कुरैशी 1999 में इंडियन आर्मी में शामिल हुईं। उन्होंने 1999 में चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से ट्रेनिंग ली। उसके बाद, सोफिया आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हुईं। उन्हें पंजाब बॉर्डर पर ऑपरेशन पराक्रम के दौरान उनकी सर्विस के लिए जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) से एक कमेंडेशन लेटर भी मिला। उन्हें नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में बाढ़ राहत ऑपरेशन के दौरान उनके शानदार काम के लिए सिग्नल ऑफिसर इन चीफ (SO-in-C) से भी एक कमेंडेशन लेटर मिला। उन्हें फोर्स कमांडर से भी कमेंडेशन मिला है।


फील्ड मार्शल सैम होरमासजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ :

(3 अप्रैल,1914 – 27 जून,2008) :-

फील्ड मार्शल सैम होरमासजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ, जिन्हें सैम बहादुर ("सैम द ब्रेव") के नाम से जाना जाता है, एक जाने-माने भारतीय मिलिट्री लीडर और फील्ड मार्शल का फाइव-स्टार रैंक पानेवाले पहले ऑफिसर थे। उनकी चार दशकों की सर्विस में दूसरे वर्ल्ड वॉर और साल 1947,1965 और 1971 के इंडो-पाकिस्तानी युद्धों के साथ-साथ साल 1962 के चीन-इंडिया वॉर में हिस्सा लेना शामिल है। साल 1971 इंडो-पाकिस्तानी वॉरमे 8वें आर्मी चीफ के तौर पर मानेकशॉने साल 1971 के युद्ध में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके नतीजे में बांग्लादेश बना और पाकिस्तानी सैनिकोंने एक सरेंडर किया। साल 1942 में बर्मा कैंपेन के दौरान वे घायल हो गए थे और मेजर जनरल डेविड कोवानने उन्हें मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया था। मानेकशॉ अपनी तेज बुद्धि और सादगी के लिए जाने जाते थे। उनकी सर्विस को पद्म विभूषण (1972) और पद्म भूषण (1968) से सम्मानित किया गया है।


बॉर्डर इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर :-

बॉर्डर इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट के बारे में डिटेल में जानकारी देते हुए मगनभाई पटेल साहबने कहा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी साहब के नेतृत्व में भारतने अपने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक सुधार देखा है।आज,भारत तेजी से डिफेंस इंपोर्ट करनेवाले देश से एक्सपोर्ट करनेवाला देश बन गया है। साल 1960 से बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) भारत की उत्तरी और उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के कंस्ट्रक्शन,मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन के लिए लीडिंग एजेंसी रही है। साल 2020 की बॉर्डर घटनाओं के बाद कंस्ट्रक्शन की रफ्तार और तेज हो गई है।साल   2024-25 में खर्च ₹16,600 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड हाई पर पहुँच गया है और साल 2025-26 के लिए ₹17,900 करोड़ का टारगेट रखा गया है। BRO ने 64,100 km से ज्यादा सड़कें,1179 पुल और 22 एयरफील्ड बनाए हैं। घुसपैठ और तस्करी से निपटने के लिए, सरकार ने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर एक बड़ा इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS) और एक "स्मार्ट फेंसिंग सिस्टम" लागू किया है। साल 2020 में चीन के साथ गलवान में हुई झड़प के बाद, मौजूदा केंद्र सरकारने कनेक्टिविटी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सड़कें, पुल और सुरंगें बनाने को प्राथमिकता दी है। इसमें सेला टनल और शिंकू-ला टनल जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो मुश्किल इलाकों में कनेक्टिविटी देते हैं। हवाई सुविधाओं में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए लद्दाख में 37 नए एयरपोर्ट और हेलीपैड बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जबकि लॉजिस्टिक्स ट्रांसपोर्टेशन के लिए जम्मू-बारामुल्ला रेल लाइन और भालुकपोंग-तवांग रेल लाइन जैसी अहम रेल लाइनें बनाई जा रही हैं। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम जैसी पहलों का मकसद बॉर्डर इलाकों को डेवलप करना और दूर-दराज के बॉर्डर इलाकों सहित स्थानीय समुदायों की जिंदगी को बेहतर बनाना है। गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए "रिवर्स माइग्रेशन" को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


अत्याधुनिक शस्त्र :- 

आज हमारे देश के तीनों विंग अत्याधुनिक शस्त्र से सज्ज हैं, जिसमें 290-700 km की रेंजवाली सुपरसोनिक शॉर्ट-रेंज "ब्रह्मोस" क्रूज मिसाइल, 150-400 km  रेंजवाली शॉर्ट-रेंज "प्रलय" बैलिस्टिक मिसाइल, 2,000-3,500 km की रेंजवाली मीडियम-रेंज "अग्नि-II" बैलिस्टिक मिसाइल और 70-80 km की रेंजवाली सरफेस-टू-एयर "आकाश" मिसाइल शामिल हैं, साथ ही ड्रोन और एयरक्राफ्ट जैसे हवाई खतरों के खिलाफ तेजी से जवाब देने के लिए क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर डिफेंस मिसाइल भी हैं। पैदल सेना के हथियारों में 7.62 x 39 mm AK-203 कैलिबरवाली असॉल्ट राइफल, SIG 716-I शामिल हैं। भारतीय सेना के पास 51 mm कैलिबरवाली बैटल राइफल और INSAS असॉल्ट राइफल भी है। जबकि टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों में "अर्जुन" और "भीष्म" जैसे बैटल टैंक शामिल हैं, हमारी भारतीय सेना 48 km की रेंजवाले एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम से सज्ज है।


अपनी स्पीच के आखिर में मगनभाई पटेलने मिलिट्री परिवारों के बारे में अपने विचार बताते हुए कहा कि जब बॉर्डर सिक्योरिटी या होम सिक्योरिटी का कोई सैनिक देश की सुरक्षा के लिए ड्यूटी पर होता है, तो उसके बच्चों की जिम्मेदारी उसकी पत्नी या परिवारवालों पर आ जाती है और उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सरकार इस मुद्दे पर काम कर रही है, लेकिन यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है,अगर देश की बड़ी कंपनियाँ, देश के सोशल लीडर, अलग-अलग NGOs और देश के नागरिक मिलकर इस मिलिट्री परिवार का ध्यान रखें, तो इसे भी राष्ट्रसेवा माना जाएगा। इसके लिए, इन मिलिट्री परिवारों के बच्चों के लिए एजुकेशनल इंस्टिट्यूट को प्रायोरिटी दी जानी चाहिए, सैनिक की पत्नी या परिवार के सदस्य को सरकारी या प्राइवेट नौकरी में प्रायोरिटी दी जानी चाहिए और उन्हें छोटे-बड़े बिजनेस के लिए एंटरप्रेन्योर बनने के लिए जरूरी मदद दी जानी चाहिए। आप वॉलंटियर बनकर मिलिट्री परिवारों की मदद कर सकते हैं। आप उन्हें मुफ्त में पढ़ाई, हेल्थ या दूसरी सर्विस दे सकते हैं। आप मिलिट्री परिवारों को सरकारी स्कीम के बारे में बता सकते हैं। आप जानकारी दे सकते हैं और उन्हें एप्लीकेशन भरने में मदद कर सकते हैं। आप सोशल मीडिया, ब्लॉग या दूसरे प्लेटफॉर्म पर उनकी समस्याओं के बारे में बात करके उनके बारे में अवेयरनेस फैला सकते हैं। ऐसे में हम सब मिलकर बॉर्डर पर सेवा दे रहे सैनिकों के साथ-साथ होम सिक्योरिटी के सैनिक, शहीद सैनिक, रिटायर्ड सैनिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं और ड्यूटी पर हैं, उनकी मदद कर सकते है । सरकार के अलावा, हमें भी जितनी हो सके उतनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस सेक्टर के सैनिकों का हौसला बढ़ाना चाहिए और उनके परिवारों को हर तरह की वित्तीय और सोशल मदद करनी चाहिए। अगर हम उनकी हर तरह की मदद करेंगे,तो वे अपनी जान की परवाह किए बिना एक महान योद्धा की तरह राष्ट्रसेवा करेंगे और अपना कर्तव्य निभाएंगे और उनके परिवार का अच्छे से ध्यान रखा जाएगा, तो वे देश के लिए कुर्बानी देने से भी नहीं हिचकिचाएंगे।


आज भारत हर सेक्टर में जिस तरह से आगे बढ़ा है, वह सिर्फ हमारी बॉर्डर सिक्योरिटी और होम सिक्योरिटी की वजह से है, जिसमें हमारे देश के तीनों मिलिट्री विंग, यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ अफसर और सैनिक, जो हमारे देश की अंदरूनी और बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, हम उन्हें सलाम करते हैं। हम अपने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमितभाई शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उनकी टीम को भी लाख-लाख वंदन करते हैं ।

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