सबके लिए एआई: प्रमुख घटकों को समझिए, चुनौतियों से निबटिये और अपेक्षित लाभ पाइए

By कमलेश पांडे | Feb 16, 2026

"एआई सबके लिए" भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे इंडियाAI मिशन के रूप में जाना जाता है। यह मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को समावेशी, सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से सभी के लिए सुलभ बनाने पर केंद्रित है। इस मिशन का लक्ष्य भारत में मजबूत AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना है, जो AI प्रणालियों के विकास, परीक्षण और तैनाती को समर्थन देगा। यह घरेलू AI तकनीकों को बढ़ावा देकर विदेशी निर्भरता कम करने, डेटा गुणवत्ता सुधारने और नैतिक AI प्रथाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर देता है। समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए AI लाभ सुनिश्चित करना इसका मूल सिद्धांत है।


इसके प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:- पहला, कंप्यूटिंग क्षमता यानी हाई-एंड GPU क्लस्टर के माध्यम से AI मॉडल ट्रेनिंग को सक्षम बनाना। दूसरा, सामाजिक अनुप्रयोग यानी  स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और शासन जैसे क्षेत्रों में AI-संचालित समाधान विकसित करना। और तीसरा, स्टार्टअप और नवाचार समर्थन यानी शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करना, उद्योग सहयोग बढ़ाना और स्टार्टअप्स को फंडिंग प्रदान करना। चतुर्थ, सामाजिक प्रभाव यानी यह मिशन AI को लोकतांत्रिक बनाकर "AI for All" की अवधारणा को साकार करता है, ताकि यह नौकरियों को प्रभावित न करे बल्कि सतत विकास लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करने में मदद करे। हालिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भी इसकी समावेशी पहुंच पर जोर दिया गया।

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# इंडियाAI मिशन की प्रमुख चुनौतियां के बारे में जानिए


हालांकि इंडियाAI मिशन की प्रमुख चुनौतियां बुनियादी ढांचे, डेटा प्रबंधन और मानव संसाधन से जुड़ी हैं। ये चुनौतियां मिशन के समावेशी लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा बन सकती हैं। इसकी राह की तकनीकी बाधाएं निम्नवत हैं:- सीमित GPU क्षमता और उच्च लागत AI मॉडल ट्रेनिंग को कठिन बनाती है, जबकि क्लाउड कंप्यूटिंग अवसंरचना की कमी तैनाती को प्रभावित करती है। डेटा गुणवत्ता और विविधता, खासकर इंडिक भाषाओं के लिए, अपर्याप्त है। ऊर्जा खपत भी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।


जहां तक नीतिगत व नियामक मुद्दे की बात है तो डेटा गोपनीयता कानूनों का अभाव व्यक्तिगत डेटा दुरुपयोग की चिंता बढ़ाता है, और भू-राजनीतिक प्रतिबंध GPU जैसे हार्डवेयर तक पहुंच सीमित करते हैं। डिजिटल डिवाइड ग्रामीण क्षेत्रों में AI पहुंच को रोकता है। नौकरी विस्थापन का खतरा BPO और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में है। वहीं मानव संसाधन की भी कमीहै। खासकर कुशल AI विशेषज्ञों की भारी कमी है, जहां केवल 11% कार्यबल उन्नत डिजिटल कौशल से लैस है। प्रशिक्षण अंतराल को पाटना समय लेगा। नैतिक AI उपयोग के लिए नियामक ढांचे की जरूरत है।


# इंडियाAI मिशन के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों का समाधान ऐसे कीजिए


लिहाजा इंडियाAI मिशन अपने सम्मुख उपस्थित चुनौतियों का समाधान संरचित घटकों और रणनीतियों के माध्यम से करेगा। यह तकनीकी, नीतिगत और मानव संसाधन संबंधी बाधाओं को दूर करने पर केंद्रित है।जहां तक तकनीकी समाधान की बात है तो GPU क्षमता की कमी को 10,000+ GPU वाले कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से दूर किया जाएगा, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी शामिल है। जबकि डेटा गुणवत्ता के लिए इंडियाAI डेटासेट प्लेटफॉर्म गैर-व्यक्तिगत डेटा तक अबाधित पहुंच प्रदान करेगा, विशेष रूप से इंडिक भाषाओं पर फोकस के साथ। ऊर्जा खपत को नवीकरणीय स्रोतों और ऊर्जा-कुशल AI एल्गोरिदम से प्रबंधित करने की योजना है।


जहां तक इसके नीतिगत उपाय की बात है तो डेटा गोपनीयता और नियामक मुद्दों के लिए जिम्मेदार AI ढांचा विकसित किया जा रहा है, जिसमें दिशा-निर्देश और शासन शामिल हैं। डिजिटल डिवाइड को टियर-2/3 शहरों में AI शिक्षा विस्तार से पाटा जाएगा, जबकि स्वदेशी मॉडल विकास विदेशी निर्भरता कम करेगा। नौकरी विस्थापन पर सामाजिक अनुप्रयोगों के जरिए स्वास्थ्य, कृषि जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित होंगे। वहीं, मानव संसाधन विकास के दृष्टिगत कौशल कमी को भविष्य कौशल पहल से दूर किया जाएगा, जिसमें AI प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्टार्टअप फंडिंग शामिल है। शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करने हेतु नवाचार केंद्र स्थापित होंगे, जिससे 11% डिजिटल कौशल अंतर को कम किया जा सकेगा।


# इंडियाAI मिशन से अपेक्षित आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े बहुआयामी लाभ 


वास्तव में इंडियाAI मिशन से भारत को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों में बहुआयामी लाभ अपेक्षित हैं। यह मिशन AI को लोकतांत्रिक बनाकर समावेशी विकास को गति देगा। जहां तक आर्थिक लाभ की बात है तो यह मिशन स्वदेशी AI मॉडल विकसित कर विदेशी निर्भरता कम करेगा, जिससे स्टार्टअप्स को फंडिंग और कंप्यूटिंग संसाधन मिलेंगे। इससे AI इंडस्ट्री में रोजगार सृजन होगा और GDP में योगदान बढ़ेगा, विशेष रूप से कृषि, स्वास्थ्य और खुदरा क्षेत्रों में कार्यकुशलता सुधार के जरिए। 


जहां तक सामाजिक प्रभाव की बात है तो स्वास्थ्य में पूर्वानुमानित निदान, कृषि में फसल प्रबंधन और शिक्षा में वैयक्तिकृत सीखने जैसे अनुप्रयोग जीवन स्तर सुधारेंगे। जबकि इंडिक भाषाओं पर आधारित डेटासेट से ग्रामीण और हाशिए वाले समुदायों को समान पहुंच मिलेगी।वहीं तकनीकी प्रगति के तहत 10,000+ GPU इंफ्रास्ट्रक्चर से नवाचार केंद्र मजबूत होंगे, जिससे भारत वैश्विक AI नेतृत्व प्राप्त करेगा। क्योंकि जिम्मेदार AI ढांचे से नैतिक उपयोग सुनिश्चित होगा।


- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

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