AI के खतरों की आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर बताई गईं, Global Ban संभव नहीं: Sridhar Vembu

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 23, 2026

प्रौद्योगिकी कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के संभावित खतरों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और एआई के विकास पर वैश्विक स्तर पर रोक लगने की संभावना नहीं है। उन्होंने भारत से रणनीतिक विकल्प खुले रखने और विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश करने का आग्रह किया। वेम्बु ने कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और साझेदारियों का लाभ उठाना चाहिए, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच उभरती प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा में किसी एक पक्ष से बंधने से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमें महत्वपूर्ण बुनियादी अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश करने की जरूरत है। बुनियादी अनुसंधान एवं विकास और एआई मॉडल के विकास या इस्तेमाल पर अरबों डॉलर खर्च करने के बीच अंतर है।” वेम्बु ने कहा कि ऐसा अनुसंधान हर क्षेत्र में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुनियादी क्षमताएं विकसित करने के लिए अत्याधुनिक एआई मॉडल के विकास जितने बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा, “इस पर 10 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करने की जरूरत नहीं है और यह 10-20 करोड़ अमेरिकी डॉलर में किया जा सकता है।” 

वेम्बु ने कहा कि वह उन आशंकाओं से सहमत नहीं हैं कि एआई अनिवार्य रूप से मानवता का विनाश कर देगा। हालांकि, उन्होंने माना कि अधिक सक्षम होते जा रहे एआई तंत्र से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा, “...शायद हम इस पर ध्यान दे सकते हैं, लेकिन क्या मैं वास्तव में इसे लेकर चिंतित हूं? नहीं, बिल्कुल नहीं।” उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी चिंता एआई उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मानवीय निर्णय क्षमता और कौशल में कमी आना तथा रोजगार पर संभावित असर है, विशेषकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में। 

विनियमन के बारे में वेम्बु ने कहा कि सरकारें संभवतः प्रौद्योगिकी के विकास से पीछे रहेंगी, जैसा कि पहले की प्रौद्योगिकियों के मामले में भी हुआ है। उन्होंने एआई के विकास की तुलना वाहन उद्योग के शुरुआती दौर से की, जब कारों का इस्तेमाल व्यापक होने के बाद लाइसेंस, गति सीमा और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियम बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह है कि एआई के लिए नियामकीय व्यवस्था संभवतः प्रौद्योगिकी के साथ-साथ विकसित होगी, जरूरी नहीं कि उससे पहले तैयार हो। 

वेम्बु ने एआई के विकास पर दुनियाभर में रोक लगाने की मांग को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि इसे लागू करना मुश्किल होगा क्योंकि यदि प्रतिस्पर्धी एआई विकसित करते रहे तो प्रमुख एआई प्रयोगशालाओं के पास विकास रोकने की बहुत कम वजह होगी। वेम्बु की एक प्रमुख चिंता युवा कर्मचारियों और छात्रों में कौशल के विकास पर एआई के प्रभाव को लेकर है। उन्होंने अमेरिकी नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के वकीलों पर किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि एआई उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले कनिष्ठ वकीलों ने काम तेजी से पूरा किया, लेकिन जरूरी नहीं कि उन्होंने स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए आवश्यक बुनियादी ज्ञान विकसित या बरकरार रखा हो। 

उन्होंने कहा कि यही स्थिति सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर भी लागू हो सकती है। उनके अनुसार, अधिक अनुभवी पेशेवर एआई का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि उनके पास पहले से मजबूत बुनियादी ज्ञान और कौशल होता है। वेम्बु ने कहा कि जोहो कनिष्ठ इंजीनियरों को बुनियादी कौशल और मूल अवधारणाओं में दक्षता हासिल करने तक एआई की पहुंच सीमित करने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत स्कूलों और कॉलेजों पर भी लागू होना चाहिए। वेम्बु ने कहा, “प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि इंसानों को सीखना चाहिए।” जोहो के सह संस्थापक ने कहा कि कर्मचारियों को महत्वपूर्ण कौशल अपने पास बनाए रखने चाहिए, न कि उन्हें एआई तंत्र के हवाले कर देना चाहिए। 

इस मुद्दे का शिक्षा और कार्यबल विकास पर व्यापक असर हो सकता है। एआई अल्पावधि में उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन सीखने के चरण में प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य के कर्मचारियों द्वारा विशेषज्ञता हासिल करने और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। 

वेम्बु ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि एआई पूरे पेशों को अप्रासंगिक बना देगा। उन्होंने चिकित्सा, कानून और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में मानवीय निर्णय, जवाबदेही और संदर्भ की समझ के लगातार महत्व की ओर इशारा किया। उन्होंने माना कि एआई के अधिक सक्षम होने के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरियों पर दबाव आ सकता है।

 हालांकि, उन्होंने कहा कि स्वचालन से अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में रोजगार की मांग भी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, “मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरियों की संख्या को लेकर चिंतित हूं, लेकिन साथ ही मुझे भरोसा है कि अन्य तरह के काम बढ़ेंगे और हमें उनमें रोजगार मिल सकेगा।

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