By Ankit Jaiswal | Oct 08, 2026
हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए टिकट महंगे होने की एक और वजह सामने आई है। कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर ने ईंधन सरचार्ज में बदलाव का ऐलान किया है। इसका असर 9 अक्टूबर से होने वाली नई बुकिंग पर पड़ेगा।
कंपनियों के मुताबिक, विमानन ईंधन की बढ़ी कीमतों से परिचालन खर्च पर सीधा असर पड़ रहा है। विमान कंपनियों के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने पर उसका कुछ हिस्सा यात्रियों से वसूलने के लिए सरचार्ज लगाया जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए 9 अक्टूबर को रात 12 बजे से की जाने वाली नई बुकिंग पर संशोधित ईंधन सरचार्ज लागू होगा। वहीं, एयर इंडिया की नई बुकिंग पर यह बदलाव 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से प्रभावी होगा। सरचार्ज की राशि उड़ान के मार्ग और दूरी के आधार पर अलग-अलग रखी गई है।
घरेलू एकतरफा उड़ानों के लिए ईंधन सरचार्ज 400 रुपये से लेकर 1,200 रुपये तक होगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर मार्ग के अनुसार 55 डॉलर से लेकर 215 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के मार्गों के लिए यह शुल्क 55 डॉलर से शुरू होगा, जबकि उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर 215 डॉलर तक सरचार्ज लगाया जाएगा।
इस बीच अकासा एयर ने भी घरेलू उड़ानों पर ईंधन सरचार्ज दोबारा लागू करने का फैसला किया है। कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पहले से लागू शुल्क को भी बढ़ाने की घोषणा की है। यह बदलाव 9 अक्टूबर से प्रभावी होगा। अकासा एयर ने इसके पीछे विमान ईंधन की लगातार ऊंची कीमत और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को मुख्य वजह बताया है।
अकासा एयर की घरेलू उड़ानों पर दूरी के हिसाब से 375 रुपये से 1,150 रुपये तक ईंधन सरचार्ज लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह शुल्क 2,500 रुपये निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि अकासा एयर ने मार्च में ईंधन सरचार्ज लगाया था, लेकिन बाद में घरेलू उड़ानों पर इसे हटा दिया था।
बता दें कि विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पिछले कुछ समय से कई विमान कंपनियों पर दिखाई दे रहा है। इससे पहले इंडिगो ने भी ईंधन सरचार्ज लगाने की घोषणा की थी। अब एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर के फैसले के बाद घरेलू हवाई यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो विमान कंपनियों के परिचालन खर्च पर दबाव बना रह सकता है। इसका असर टिकट की कीमतों और यात्रियों के यात्रा बजट पर पड़ सकता है। फिलहाल विमानन क्षेत्र की नजर वैश्विक तेल बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई हैं।