By Ankit Jaiswal | Aug 25, 2026
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया के सामने वित्तीय दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने अपने मालिकाना पक्ष टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग 12,500 करोड़ रुपये की नई पूंजी मांगने की तैयारी की है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।
लेकिन वित्तीय परिणामों ने इस बदलाव की चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में एयर इंडिया और उसकी किफायती विमानन सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा करीब 2.33 अरब डॉलर रहा। यह पिछले वर्ष के नुकसान के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। सिंगापुर एयरलाइंस की मई में जारी वार्षिक रिपोर्ट में एयर इंडिया समूह का घाटा 3.56 अरब सिंगापुर डॉलर बताया गया था, जो उस समय की विनिमय दर के आधार पर करीब 2.80 अरब डॉलर के बराबर था।
रॉयटर्स से बातचीत करने वाले सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया को धन की जरूरत तत्काल है, हालांकि प्रस्तावित राशि को अलग-अलग चरणों में उपलब्ध कराया जा सकता है। सिंगापुर एयरलाइंस के लिए भी अपनी हिस्सेदारी के अनुसार पूंजी देना जरूरी होगा। कंपनी के पास एयर इंडिया में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर कंपनी के बदलाव की प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया की आर्थिक मुश्किलें केवल कंपनी के भीतर की समस्याओं तक सीमित नहीं हैं। पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक, पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में आई बाधाएं और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी कंपनी के खर्च और संचालन पर दबाव बढ़ाया है।
इसके अलावा, पिछले साल अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे का असर भी कंपनी पर पड़ा है। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। एयर इंडिया को विमानों की आपूर्ति में देरी और पुराने ढांचे को बदलने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एयर इंडिया के बदलाव की प्रक्रिया को पूरा होने में करीब एक दशक तक लग सकता है। कंपनी एयरबस और बोइंग से मिलने वाले सैकड़ों विमानों की आपूर्ति को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत कर रही है, ताकि लागत और घाटे पर नियंत्रण पाया जा सके।
सिंगापुर एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट में भी एयर इंडिया के सामने मौजूद मुश्किल परिचालन परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को निवेश के लिए चिंता का संकेत बताया गया था। कंपनी ने हालांकि भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं को देखते हुए एयर इंडिया में अपने निवेश को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में प्रस्तावित नई पूंजी एयर इंडिया के लिए अपने लंबे बदलाव अभियान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।