सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद योगी सरकार पर अखिलेश का तंज, बोले- अब गैराज में खड़ा हो जाएगा बुलडोजर

By अंकित सिंह | Nov 13, 2024

बुलडोजर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बुलडोजर अब गैराज में ही रहेगा। कन्नौज के सांसद कानपुर के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में एक रैली को संबोधित कर रहे थे, जो उत्तर प्रदेश की उन नौ सीटों में से एक है जहां 20 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। यूपी में उपचुनाव को लेकर वार-पलटवार की राजनीति तेज है। 

 

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अखिलेश यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सरकार का प्रतीक बन चुके बुलडोजर के खिलाफ टिप्पणी की है। सरकार के खिलाफ इस फैसले के लिए मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि जो घर तोड़ना जानते हैं उनसे आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? कम से कम आज तो उनका बुलडोजर गैराज में खड़ा रहेगा, अब किसी का घर नहीं टूटेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ इससे बड़ी टिप्पणी क्या हो सकती है? हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है, एक दिन हमारे विधायक रिहा होंगे और हमारे बीच आएंगे और पहले की तरह काम करेंगे। 


यादव ने कवि प्रदीप की उन पंक्तियों का भी जिक्र किया जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में शामिल किया था। पंक्तियाँ इस प्रकार हैं, "हर कोई एक घर का सपना देखता है, एक व्यक्ति घर के सपने को संजोए रखना चाहता है।" उन्होंने कहा कि "सरकार की इससे कड़ी आलोचना नहीं हो सकती"। 'बुलडोजर' जघन्य अपराधों में आरोपी लोगों पर कार्रवाई करने वाले क्रूर राज्य के प्रतीक के रूप में उभरा था। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बार-बार बुलडोजर कार्रवाई के इस्तेमाल से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को 'बुलडोजर बाबा' का टैग मिला था।

 

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उच्चतम न्यायालय ने हाल में चलन में आए ‘बुलडोजर न्याय’ पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संपत्तियों को ध्वस्त करने के संबंध में बुधवार को देशभर के लिए दिशानिर्देश जारी किये और कहा कि कार्यपालक अधिकारी न्यायाधीश नहीं हो सकते, वे आरोपी को दोषी करार नहीं दे सकते और उसका घर नहीं गिरा सकते। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, ‘‘यदि कार्यपालक अधिकारी किसी नागरिक का घर मनमाने तरीके से सिर्फ इस आधार पर गिराते हैं कि उस पर किसी अपराध का आरोप है तो यह कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।’’

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