By अंकित सिंह | Oct 22, 2026
चुनाव वाले राज्य उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ऐसे में समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार को रामपुर जेल में पार्टी के महासचिव और संस्थापक सदस्य आजम खान से मुलाकात की। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि मैं आदरणीय आज़म खान साहब से मिलकर लौट रहा हूँ। आज़म थे, आज़म हैं और आज़म रहेंगे। किसी भी परिवार ने उतना अन्याय नहीं सहा है, जितना उनके परिवार ने सहा है। किसी भी राजनीतिक परिवार ने उतना अन्याय नहीं झेला है, जितना आदरणीय आज़म खान साहब के परिवार ने झेला है। और इस अन्याय के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन ज़िम्मेदार है? उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने जेल में इतने साल बिताए हैं।
यादव ने कहा कि जो लोग साजिश रचते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं, वे हमेशा इस डर में जीते हैं कि सच कभी न कभी सामने आ ही जाएगा। जो लोग सच जानते हैं, उन्हें पता है कि एक दिन यह सामने आएगा, और जब ऐसा होगा, तो उन्हें समाज, देश और कानून के सामने जवाब देना होगा। लेकिन रामपुर जैसी जगह पर, 'राम राज्य' की मूल भावना को ही कुचल दिया गया है। रामपुर, जिसका नाम ही 'राम' से जुड़ा है, वहीं 'राम राज्य' की भावना का गला घोंटा जा रहा है और उसे नष्ट किया जा रहा है। आपसे बेहतर यह कौन जान सकता है? यहाँ तक कि रावण ने भी अपना भेष बदला था और केवल एक दिन के लिए माता सीता को अपने साथ ले गया था। लेकिन यहाँ तो इतने सालों से भेष बदला हुआ ही है।
अखिलेश की आज़म खान से मुलाकात अहम मानी जा रही है, क्योंकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि मुसलमानों को नेहरू, गांधी या यादव के बजाय अपने खुद के नेताओं की ज़रूरत है। कुछ हफ्ते पहले, लखनऊ और कई अन्य जिलों में अखिलेश यादव के पोस्टर लगे थे, जिनमें आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों की तस्वीरें थीं। इससे पार्टी के 'माफियाओं' के साथ जुड़े होने और 2017 से पहले के उनके कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था के विफल रहने के आरोप फिर से उठ खड़े हुए हैं।