By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 18, 2026
बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य, जप, तप और निवेश करना अक्षय फल देता है। इस दिन दान, तप, जप और पूजा का फल अनंत होता है, जो कभी नष्ट नहीं होता है। अक्षय तृतीया पर 'अबूझ मुहूर्त'होता है, यानी के किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त देखने की कोई जरुरत नहीं होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए जाने वाले दान और किए हुए स्नान, पूजा-पाठ से व्यक्ति को अनंत फल प्राप्त होता है।
अक्षय तृतीया मंत्र
'एष धर्मघटो दत्तो ब्रह्मविष्णुशिवात्मकः ।
अस्य प्रदानात्सकला मम सन्तु मनोरथाः ॥
जानिए अक्षय तृतीया पर घड़ा दान करने के नियम
अक्षय तृतीया को धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, पुष्प, गंध, तिल और अन्न भरकर, इस मंत्र 'एष धर्मघटो दत्तो ब्रह्मविष्णुशिवात्मकः । अस्य प्रदानात्सकला मम सन्तु मनोरथाः ॥' उच्चारण करके उसे दान करें। माना जाता है कि इस उपाय के करने से परलोक में आपको और आपके पितरों को कभी भी प्यासा नहीं रहना पड़ता है। पितृ आपसे प्रसन्न रहते हैं और वंश वृद्धि होती है।
अक्षय तृतीया पर उपाय
अक्षय तृतीया के दिन व्यक्ति विशेष के नाम से अनाज को तौल कर किसी पवित्र स्थान पर रख दें। अगले दिन फिर से उस अनाज को तौले और अनाज कम हुआ है, तो माना जाता है कि भविष्य में कठिनाइयों से भरा रहेगा, यदि अनाज का वजन पहले की तरह समान रहा तो आपका भविष्य सामान्य रहेगा और यदि भार बढ़ता है तो माना जाता है कि आने वाला समय आपके लिए काफी अच्छा रहने वाला है।