किस्सा उस मीटिंग का जिसके बाद लिखी गई जैक मा की तबाही की कहानी

By अभिनय आकाश | Jan 06, 2021

एक लड़का जो बचपन में अपने तमाम इम्तिहानों में फेल होता रहा। बड़ा हुआ तो 30 जगहों पर नौकरी के लिए अप्लाई की लेकिन सभी जगह से निराशा ही हाथ लगी। बैक टू बैक तीन अटेंम्ट के बाद अंग्रेजी के शिक्षक के तौर पर करियर की गाड़ी चल पड़ी। दो दशक पहले अपने अपार्टमेंट में एक कंपनी की नींव रखी। और उसके बाद सफल हुआ तो ऐसा कि फोब्स की सूची में दुनिया के 20 अमीर लोगों की सूची में स्थान बनाया। अमेरिका के राष्ट्रपति भी जिससे मिलने की हसरत पालने लगे। तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान । भीलन लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण । तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य बड़ा/छोटा नहीं होता वास्तव में यह उसका समय ही होता है जो बलवान होता है। जैसे एक समय था जब महान धनुर्धर अर्जुन ने अपने गांडीव बाण से महाभारत का युद्ध जीता था और एक ऐसा भी समय आया जब वही भीलों के हाथों लुट गया और वह अपनी गोपियों का भीलों के आक्रमण से रक्षण भी नहीं कर पाए। आम इंसान हो या फिर कोई भी बहुत बड़ा उद्दोगपति समय के सामने किसी का बस नहीं चलता। दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इस आदमी को पिछले दो महीने से किसी ने नहीं देखा है। दुनियाभर के समाचार, अखबार और टेलीविजन का संसार यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जैक मा कहां हैं? जी हां, यही नाम है इस शख्स का जिसकी काहीन आज सुनाऊंगा। साथी ही ये भी बातऊंगा कि आखिर सफलता की इबारत रचने वाले इस अमीर उद्दोगपति से तानाशाही सिस्टम वाला मुल्क चीन इतना क्यों घबरा गया?

चीन के दक्षिणी हिस्से में हांगचो नाम का शहर। 10 सितंबर 1964 को गरीब परिवार में पैदा हुआ लड़का नाम रखा गया- मा यून। पढ़ाई में एकदम फिसड्डी। बड़ा हुआ तो रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत जरूरतों की पूर्ति के लिए नौकरियों के लिए आवेदन दिया। लेकिन एक-एक कर 30 आवेदन खारिज होते गए। जिनमें से एक नौकरी केएफसी में वेटर की भी थी। शिक्षक बनने की सोची लेकिन ये राह भी कहां था इतना आसान। टीचर्स कॉलेज की  एंट्रेंस परीक्षा  में दो बार असफलता मिलने के बाद तीसरी बार आखिर बाजी मार ही ली। कोर्स पूरा कर 24 साल की उम्र में अंग्रेजी टीचर बन गया। लेकिन अपना कारोबार शुरू करने की चाह में करीब दो दशक पहले अपने अपार्टमेंट में ही अलीबाबा की नींव रखी। इसके लिए मा यून ने अपने दोस्तों को ऑनलाइन मार्केटप्लेस में निवेश करने के लिए राजी भी किया। फिर एक दौर ऐसा भी आया कि उनकी कंपनी दीवालिया होने के कगार पर भी पहुंची। लेकिन इन सभी बातों से बेपरवाह अपनी हिम्मत के भरोसे मा यून या फिर कहे जैक मा ने अपनी कंपनी को तो जैसे ऊंचाई पर पहुंचाने की ठान रखी थी। आप कह रहे होंगे की ये मा यून और जैक मा का क्या चक्कर है। इसका भी एक दिलचस्प किस्सा है, जिसके बारे में आगे बताऊंगा। अभी तो वक्त है जैक मा की ऊंचाईयों के सफर की कहानी का। हां तो कहां थे हम... फिर ऐसा वक्त आया जब साल 2013 में 10 लाख करोड़ आईपीओ के साथ अलीबाबा अमेरिका में सबसे बड़ी आईपीओ वाली कंपनी बनकर सामने आई। उस वक्त उनके पास खुद 23 अरब डाॅलर की संपत्ति थी। साल 2014 में अलीबाबा ने दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक हिस्सेदारी के माध्यम से 25 अरब डाॅलर जुटाए। फाॅबर्स की 2017 की सूची के मुताबिक जैक मा चीन के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति बताए गए। फाॅबर्स ने उनकी दौलत को 36.6 अरब डाॅलर बताई थी। ब्लैक फ्राइडे और साइबर मंडे जैसे शाॅपिंग इवेंट के जरिये जैक मा ने अमेरिका में भीअपनी धाक जमाई। साल 2017 में ही अलीबाबा की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैक मा ने माइकल जैक्सन की तरह परिधान पहना था। फिर उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और मार्शल आर्ट्स मास्टर जेट ली के साथ शाॅर्ट फिल्म में नजर आए। 

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दोस्तों ने दिया जैक मा का नाम

मा यून एक जमाने में टूरिस्ट गाइड का काम किया करते थे। उनके टूरिस्ट्स को मा यून का चाइनीज नाम बेहद ही कठिन लगता था। सरल और आसानी से पुकारे जाने वाले नाम के लिए वो उन्हें जैक कहकर पुकारने लगे। फिर पत्र व्यवहार के बाद धीरे-धीरे यही नाम चलन में हो गया। 

कैसे पड़ा अलीबाबा नाम

टेक कंपनियों के नाम वैसे तो अमूमन अजीबो-गरीब तरह से क्रिएटिविटी का इस्तेमाल होता है। माइक्रोसाॅफ्ट हो या आईबीएम जो अपने नाम से अपना काम बताने की मंशा रखते हैं। लेकिन कभी-कभी इनके नाम गूगल, एपल या याहू भी रख दिए जाते हैं। जिनका या तो कोई खास मतलब नहीं निकलता है या फिर उत्पाद से सीधा वास्ता होता है। ऐसा ही नाम है अलीबाबा का। जैक मा ने एक काॅफी शाॅप में वेटर से पूछा क्या तुम अलीबाबा के बारे में जानते हो। जवाब मिला- ओपन सेसमी यानी खुल जा सिम सिम। इसके बाद कई भारतीय, अमेरिकी और अन्य देशों के लोगों से यही सवाल पूछा तो सभी को अलीबाबा के बारे में पता था। जिसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी का नाम अलीबाबा ग्रुप रखा। साल 2006 को दिए एक इंटरव्यू में इसका जिक्र जैक मा ने किया था। 

कहानी उस मीटिंग की जहां बिगड़ी बात

24 अक्टूबर 2020 को एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में चीनी राजनीति और अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े अधिकारी पहुंचे। इसमें जैक मा ने चीनी बैंकों की आलोचना खुलेआम की थी। वे बोले- बैंक फंडिग के लिए कुछ गिरवी रखने की मांग करते हैं। इससे नई तकनीकों को फंड नहीं मिल पाता और नए प्रयोग रूक जाते हैं। जैक यही नहीं रूके उन्होंने वैश्विक बैंकिंग नियमों को बुजुर्गों का क्लब करार दिया था। वाॅल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार जैक मा की बातों से शी जिनपिंग काफी नाराज हुए थे। 

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जैक मा को कर्ज में डुबाने की कोशिश

वो इंसान जिसकी मर्जी के बिना चीन में पत्ता भी न हिल सके इसके नाराज होने का मतलब क्या निकाला जा सकता है। कहानी तो अब शुरू हुई थी, किसी युग के खात्मे के लिए। अक्टूबर 2020 में जैक मा के एंट ग्रुप के 2.7 करोड़ के आआपीओ को रोक दिया गया। फिर कुछ ही दिनों बाद एंटी ट्रस्ट नियम बना दिए गए जिसके तहत अलीबाबा ग्रुप की जांच शुरू कर दी गई। जैक मा से नाराजगी निकालने के लिए चीन इस हद तक गया कि सेंट्रल बैंक ने एंट ग्रुप के अफसरों से पूरे बिजनेस को ही नए नियमों के हिसाब से रजिस्टर करने को कह दिया ताकि क्रेडिट, इंश्योरेंस और मनी मैनेजमेंट से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर किया जा सके। बिजनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी में से एक की पुन: संरचना वाली कोशिश कंपनी को कर्ज में डुबाने के लिए काफी है। लेकिन बावजूद इसके एंट ग्रुप के अधिकारी इससे इनकार नहीं कर सके। 

जैक मा लापता या नजरबंद

एंट ग्रुप पर कार्यवाई चल ही रही थी कि इसी वक्त जैक मा अपने टीवी शो अफ्रीका बिजनेस हीरोज के आखिरी एपिसोड से ठीक पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। यही नहीं शो से उनकी तस्वीर को भी हटा लिया गया। अलीबाबा ग्रुप के प्रवक्त ने कहा कि जैक मा सिड्यूल विवाद की वजह से जजों के पैनल का हिस्सा नहीं बने। हालांकि फाइनल से पहले जैक मा ने ट्वीट करके कहा था कि वह सभी प्रतिभागिय़ों से मुलाकात की प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं। इसके बाद उनके ट्वीटर अकाउंट से कोई पोस्ट नहीं किया गया। जिसके बाद से ही उनकी गुमशुदगी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। कभी उनके गिरफ्तार होने की खबरें सामने आती हैं तो कभी कहा जाता है कि उन्होंने खुद को सार्वजनित जीवन से दूर कर लिया है। 

जैक मा की दौलत छीनना चाहती है चीन सरकार

अमेरिकी अखबार वाॅल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार चाहती है कि जैक मा अपनी पूरी कमाई यानी कंपनी के यूजर्स का डाटा उसे सौंप दे। वाॅल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के नियामक इस कोशिश में लगे हैं कि जैक मा कंपनी के माध्यम से इकट्ठा किए गए यूजर क्रेडिट डेटा को साझा करे। जिसके लिए चीनी नियामक उनपर दवाब बना रहे हैं।  लेकिन जैक मा ने डाटा साझा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद चीनी सरकार की ओर से लगातार कार्यवाई की जा रही है। सरकार की कार्यवाई से कंपनियों में खौफ समाया है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल दो दिनों के भीतर ही चीन की बड़ी कंपनियों को करीब 15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। चीन की इसी तरह की कार्यवाई के तहत जैक मा के देश छोड़ने पर रोक है और उन्हें नजरबंद कर लिया गया है। 

2016 से 2017 के बीच गायब हुए कई अरबपति

चीन में अमीरों के गायब होने की ये कोई पहली घटना नहीं है। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2017 के बीच चीन के कई अरबपति गायब हो गए। रिपोर्ट की माने तो 2016-17 के बीच गायब हुए लोग फिर कभी सामने नहीं नजर आए। इनके गायब होने के पीछे व्यापार प्रतिस्पर्धियों, पत्नियों का हाथ होने का अंदेशा जताया गया। 

भारत के साथ भी है कारोबारी नाता

जैक मा की कंपनी एंट ग्रुप ने चीन में एक मोबाइल पेमेंट सिस्टम अलीपे बनाया है। कंपनी ने भारत के पेटीएम में भी निवेश किया है। सामाचर एजेंसी राॅटर्स की खबर के मुताबिक इस तरह की खबरों के बाद अलीबाबा के शेयरों में हांगकांग में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

चीन में आलोचकों को खामोश करने का पुराना इतिहास

आलोचकों को खामोश करने का रहा है पुराना इतिहास। कम्युनिस्ट पार्टी या शी जिनपिंग सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले कई लोगों को चीन नजरबंद कर चुका है। इससे पहले शी जिनपिंग की आलोचना करने वाले प्रॅपर्टी बिजनेसमैन रेन झिकियांग लापता हो गए थे। उन्होंने कोरोना को सही से निपटने के लिए शी जिनपिंग को मसखरा बताया था। बाद में उन्हें 18 साल की जेल भेज दिया गया। चीन के ही एक अन्य अरबपति शिआन जिआनहुआ वर्ष 2017 से ही नजरबंदी में हैं।- अभिनय आकाश

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