टूटे सारे रिकॉर्ड, रूस से रोजाना 28 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा भारत!

By अभिनय आकाश | Aug 04, 2026

दुनिया भर में इस वक्त तनाव चरम पर है। कहीं युद्ध का खतरा है तो कहीं ऊर्जा संकट की चिंता बनी हुई है और ऐसे ही माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को और बढ़ा दिया है। जुलाई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा जो देश के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से भी ज्यादा हिस्सा रहा। जुलाई महीने में भारत ने रूस से अब तक का सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। आंकड़ों के मुताबिक रूस से भारत को करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिला। यानी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पहली बार 55% से ज्यादा हुई। सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में भारत ने जितना भी कच्चा तेल विदेशों से खरीदा उसमें से आधे से ज्यादा हिस्सा रूस का था। 

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आपको बता दें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है। देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम लोगों की जरूरतों के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में भारत की नीति साफ है कि जहां से बेहतर कीमत और भरोसेमंद सप्लाई मिले वहां से तेल खरीदा जाए। भारत, रूस के अलावा अमेरिका, खाड़ी देशों और दूसरे देशों से भी तेल आयात करता है। हालांकि अब एक नई चुनौती सामने जरूर आ रही है। अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल को मंजूरी दी। इस बिल में उन देशों पर 100% तक अतिरिक्त टेरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं। इस बिल के निशाने पर सीधे तौर पर रूस के बड़े तेल खरीददार देशों में भारत और चीन भी आ सकते हैं। हालांकि अभी तक यह बिल कानून नहीं बना। इसे आगे अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी मिलनी बाकी है। 

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भारत ने इस पूरे मामले पर कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बल्कि देश के हित और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यानी एक तरफ भारत रूस से सस्ता और भरोसेमंद तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर भारत की इस रणनीति पर है क्योंकि तेल सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है। लेकिन जिस तरह से पिछले महीने भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा यह जरूर दिखाता है कि भारत किसी भी दबाव में नहीं आने वाला है। 

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