पार्टनर से भरण-पोषण का हक नहीं, लिव इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बहुत बड़ा आदेश!

By अभिनय आकाश | Dec 17, 2025

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि यदि किसी महिला का पहला या पिछला विवाह कानूनी रूप से भंग नहीं हुआ है, तो वह अपने उस साथी से, जिसके साथ वह लिव-इन रिलेशनशिप में थी, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती। सूत्रों के अनुसार, एक महिला ने जिला न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें भी भरण-पोषण का अधिकार देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने माना कि उसका पिछला विवाह कानूनी रूप से वैध बना हुआ है, जिससे बाद का कोई भी संबंध, भले ही विवाह समारोह हुआ हो, अमान्य हो जाता हैइसलिए, वह दीर्घकालिक संबंध के आधार पर भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती, क्योंकि कानून इसे वैध विवाह के रूप में मान्यता नहीं देता है

इसे भी पढ़ें: देवताओं का शोषण...बांके बिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था पर CJI ने Supreme Court में क्या कह द‍िया?

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि विवाह समारोह संपन्न भी हो गया हो, तो भी वह अमान्य होगा क्योंकि आवेदक का पिछला वैवाहिक संबंध अभी भी कायम है। इसलिए, वह दीर्घकालिक संबंध के आधार पर सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।" न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने कहा कि इस दावे को स्वीकार करना सीआरपीसी की धारा 125 के उद्देश्य और विवाह संस्था दोनों को कमजोर करेगा। अदालत ने आगे कहा कि यदि समाज में ऐसी प्रथा को अनुमति दी जाती है, जहां एक महिला कानूनी रूप से एक पुरुष से विवाहित रहते हुए भी पहले विवाह को भंग किए बिना दूसरे के साथ रहती है और बाद में उससे भरण-पोषण की मांग करती है, तो सीआरपीसी की धारा 125 का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो जाएगा।

इसे भी पढ़ें: शादी की उम्र न हुई हो, तब भी लिव-इन’ में रह सकते हैं बालिग: राजस्थान उच्च न्यायालय

इसके अलावा, अदालत ने गौर किया कि महिला लगभग 10 वर्षों से उस व्यक्ति के साथ रह रही थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल साथ रहने से वह धारा 125 सीआरपीसी के तहत कानूनी पत्नी नहीं बन जाती। दूसरी ओर, महिला के वकील ने तर्क दिया कि उसके आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे आधिकारिक रिकॉर्ड में उसे उस व्यक्ति की पत्नी के रूप में दर्ज किया गया है और समाज भी उसे उसकी पत्नी के रूप में मान्यता देता है। यह बताया गया कि उस व्यक्ति और उसके बेटों ने कथित तौर पर मार्च 2018 में उसके साथ क्रूरता, उत्पीड़न और परित्याग किया, इसलिए उसने अदालत से भरण-पोषण की मांग की। न्यायालय ने 8 दिसंबर को दिए अपने फैसले में कहा कि धारा 125 सीआरपीसी के प्रयोजन के लिए महिला कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के दायरे में नहीं आती है और इसलिए, उसकी भरण-पोषण याचिका को सही ढंग से खारिज कर दिया गया था।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

T20 World Cup 2026 से पहले बड़ा बवाल, पाक सरकार ने India मैच पर लगाया Ban, Afridi ने क्या कहा?

Smriti Mandhana का बड़ा खुलासा, World Cup के उस एक गलत शॉट ने मुझे सोने नहीं दिया था

T20 World Cup 2026 से पहले बड़ा बवाल, Pakistan ने Team India के खिलाफ मैच का किया Boycott

Carlos Alcaraz ने रचा नया इतिहास, Australian Open Final में Djokovic को हराकर बने सबसे युवा Champion.