ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने पर उच्च न्यायालय ने उठाए संवैधानिक सवाल, यूपी सरकार से मांगा जवाब

By PTI | Jul 10, 2026

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रावधान पर महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल उठाए हैं। अदालत ने बुधवार को कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता की जांच की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा कि प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2000) मामले में एक समन्वय पीठ ने इसी तरह के एक वैधानिक प्रावधान को रद्द कर दिया था। अदालत ने उस समय माना था कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद ‘243-ई’ और ‘243-के’ के तहत पंचायतों के कार्यकाल और राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियों को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने उस मामले में दायर अपील का निपटारा करते हुए कानून से जुड़े सवालों को एक उचित मामले में विचार के लिए खुला छोड़ दिया था।

उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल उठता है कि क्या निवर्तमान ग्राम प्रधान को प्रशासक नियुक्त करने से निर्वाचित पंचायत का कार्यकाल संवैधानिक रूप से निर्धारित अवधि से आगे प्रभावी रूप से बढ़ जाता है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या ऐसी व्यवस्था पंचायत चुनाव समय पर कराने के राज्य निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करती है।

पीठ ने इन मुद्दों के महत्व को देखते हुए निर्देश दिया कि मामले को इसी तरह के सवालों से संबंधित अन्य लंबित जनहित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने राज्य सरकार से निर्वाचित निकाय का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने के कानूनी आधार और संवैधानिक औचित्य को स्पष्ट करने को भी कहा है।

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