By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
प्रयागराज, चार अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) को राहत देते हुए इसकी सभी संपत्तियों, खातों और संसाधनों को हस्तांतरित करने की मांग वाली ‘दि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश’ की याचिका खारिज कर दी है। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि यूपीसीए सोसाइटी की तीन सितंबर, 2005 को हुई आमसभा बैठक में इसके पांच में तीन सदस्यों ने इस सोसाइटी की सभी संपत्तियों, देनदारियों और कार्यों को बंद करने और इसे कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत स्थापित यूपीसीए (कंपनी) में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। याचिका में उठाए गए सभी प्रमुख मुद्दों पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इस याचिका को निराधार बताते हुए सोमवार को खारिज कर दिया।
खंडपीठ ने कहा कि यूपीसीए को उत्तर प्रदेश में क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने से रोकने की मांग पूरी तरह से आधारहीन है और यूपीसीए के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग खारिज की जाती है। अदालत ने बीसीसीआई के साथ यूपीसीए की संबद्धता और इसे प्रदान वित्तीय सहायता की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने औपचारिक रूप से दर्ज किया कि यूपीसीए पिछले दो दशकों से बीसीसीआई का पूर्ण वोटिंग सदस्य रहा है।
यूपीसीए ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता- दि क्रिकेट एसोसिएश ऑफ उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश में आधिकारिक रूप से क्रिकेट गतिविधियां संचालित करने के लिए बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली है, इसके बावजूद, इसने यूपीसीए के नाम की नकल कर बार बार स्वयं को मान्यता प्राप्त क्रिकेट निकाय के तौर पर पेश करने का प्रयास किया है।