By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 12, 2026
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण के एवज में दिए गए मुआवजे से संबंधित कई याचिकाएं खारिज करते हुए कहा है कि अदालत के निर्देश पर दिए गए मुआवजे को महज इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसकी गणना 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाजार मूल्य के आधार पर नहीं की गई। ये याचिकाएं वाराणसी जिले के राजातालाब स्थित ग्राम बैरवां में याचिकाकर्ताओं की भूमि के अधिग्रहण के संबंध में वाराणसी के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी की ओर से 10 जनवरी 2024 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत पारित आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थीं। इस भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने वर्ष 2000 में शुरू की थी।
इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह आधार याचिकाकर्ताओं के लिए पूर्व में दायर मुकदमे में भी उपलब्ध था, लेकिन उन्होंने उस समय इसे नहीं उठाया। अदालत ने कहा कि मौजूदा मुकदमे की सुनवाई केवल उच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुसार दिए गए मुआवजे को चुनौती देने तक सीमित है। सात अगस्त 2026 को दिए गए अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मुआवजा उसके पूर्व निर्देशों के अनुरूप दिया गया है, इसलिए किसी अन्य आधार पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है।