By एकता | Jun 24, 2026
असम के गुवाहाटी के हिस्टोरिकल कामाख्या मंदिर में मॉनसून के मौसम में हर साल 'अंबुवाची मेला' मनाया जाता है। यह कोई आम त्योहार नहीं है, बल्कि यह देवी कामाख्या के एनुअल पीरियड्स का सेलिब्रेशन है। जहां आज भी हमारे समाज में पीरियड्स को लेकर लोग बात करने से कतराते हैं, वहीं यह मेला दुनिया को सिखाता है कि पीरियड्स कोई टैबू या शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह तो क्रिएशन, फर्टिलिटी और अर्थ की पालने वाली पावर का सबसे बड़ा सिंबल है।
कामाख्या मंदिर में देवी को 'शक्ति' यानी उस फेमिनिन एनर्जी के रूप में पूजा जाता है, जिससे पूरी दुनिया चलती है। हिंदू ट्रेडिशन में विमेन के पीरियड्स साइकिल को सीधे नेचर, शक्ति और लाइफ से जोड़ा गया है। एक नए जीवन को दुनिया में लाने की इस विमेन पावर को कभी भी नॉर्मल नहीं माना गया, बल्कि इसे हमेशा सुपर पवित्र माना गया है।
ज्यादातर मंदिरों में भगवान की इंसानी मूर्तियां होती हैं, लेकिन कामाख्या मंदिर का कॉन्सेप्ट बिल्कुल नेक्स्ट लेवल है। यहां किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि 'योनि' की पूजा की जाती है, जिसे लाइफ की शुरुआत का सोर्स माना जाता है। यह इस बात का सबूत है कि हमारी संस्कृति में लाइफ के जन्म को कितना प्योर और डिवाइन माना गया है।
जैसे दिन और रात का होना, बदलते मौसम, चांद का घटना-बढ़ना और लाइफ-डेथ का होना एक नेचुरल साइकिल है, ठीक वैसे ही विमेन का पीरियड्स साइकिल भी नेचर के इसी रिदम का हिस्सा है। हिंदू फिलॉसफी मानती है कि ब्रह्मांड की हर चीज एक परफेक्ट साइकिल में काम करती है।
चाहे आप इसे फेथ कहें या एक खूबसूरत ट्रेडिशन, अंबुवाची मेले का मैसेज बहुत लाउड एंड क्लियर है। आज भी हमारे देश में कई जगहों पर पीरियड्स को शर्म की बात माना जाता है, लेकिन यह मेला हमें सिखाता है कि लड़कियों की बॉडी या उनके पीरियड्स कोई ऐसी चीज नहीं हैं जिसे छुपाया जाए या जिसके लिए गिल्ट महसूस हो। यह तो उसी नेचर का हिस्सा है जो इस धरती पर लाइफ को बनाए रखती है।