By अभिनय आकाश | Jun 29, 2026
अमेरिका और चीन के बीच हथियारों की मोर्चाबंदी तेज होती जा रही है और दोनों देश एक ऐसी रेस में भिड़ चुके हैं जिसका नतीजा कुछ और नहीं बल्कि सिर्फ जंग है। अमेरिका और चीन की हथियार रणनीति ने साउथ चाइना सी से लेकर पूरे पेसिफिक में जंग के कई मोर्चे खोल दिए हैं और दोनों देश एक दूसरे के हथियारों की काट तलाश रहे हैं। अमेरिकी स्पिरिट स्टिल द बॉम्बा वर्सेस चाइनीस एच20 बॉम्बा। अमेरिकी F47 फाइटर जेट वर्सेस चाइनीज J36 लड़ाकू विमान अमेरिकी एयरफोर्स लॉन्ग रेंज वेपन वर्सेस चाइनीस डोंगफिंग 15 बी हथियारों की इस होड़ ने दो ताकतवर मुल्क अमेरिका और चीन को कई मोर्चों पर आमने-सामने खड़ा कर दिया है। मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ चाइना सीधा ईरान मोर्चे पर पर्दे के पीछे लेकिन ताइवान के फ्रंट पर बिल्कुल प्रत्यक्ष चीन के नजदीक अमेरिकी स्पिरिट स्टथ बमबर क्यों उड़ान भर रहा है?
ईरानी मिसाइलों की ये ताकत चीन की डोंग फ्रेंग 15 बी यानी डीएफ 15 बी मिसाइल की तरह कही जा रही है। B15 बी मिसाइल की बाइकनिक मैनवरिंग रीएट्री व्हीकल डिजाइन जिसे अमेरिकी पेट्रियट और थार जैसे मॉडर्न एंटी मिसाइल सिस्टम के खिलाफ माकुल कहा जा रहा है। जाहिर है अमेरिकी वायुसेना को इसकी कार्ड की जबरदस्त जरूरत महसूस हो रही है। साउथ चाइना सी से लेकर फिलीपींस सागर और जापान सागर तक चीन के सामने अमेरिका को अपनी साख बचाए रखनी है तो फिर उसे अपनी मिसाइलों को और भी विनाशकारी बनाना होगा। इसीलिए अमेरिकी एयरफोर्स की नजर अब 1000 नॉटिकल मील की रेंज वाली नई स्टैंड ऑफ मिसाइल पर है जो एक एयरफोर्स लॉन्ग रेंज वेपन की तरह होगा।
इस नई मिसाइल की रेंज 10,850 किमी तक हो सकती है। जिसका निशाना मेनलैंड चाइना हो सकता है। फिलीपींस के उत्तरी लज़ोन या दक्षिणी जापान में तैनात होने पर यह मिसाइल चीन के पूर्वी और दक्षिणी समुद्री तटों को सीधे अपनी रेंज में ले सकती है। इतना ही नहीं साउथ चाइना सी में चीन के बनाए कृत्रिम द्वीप, नौ सैनिक अड्डे और ताइवान स्टेट में मौजूद चीन के कमांड सेंटर इस मिसाइल का सीध टारगेट बन सकते हैं। चीन की एयर पावर को देखते हुए अमेरिकी एयरफोर्स के अंदर हलचल तेज हो गई है। यह अभी नहीं तो कभी नहीं वाले हालात हैं। अमेरिका सिक्स्थ जनरेशन का लड़ाकू विमान F47 का निर्माण कर रहा है। जिसकी कीमत ₹2,832 करोड़ बताई जा रही है।
F47 अभी भी डेवलपमेंट के स्टेज में इसकी पहली ऑफिशियल उड़ान 2027 या 2028 में हो सकती है। लेकिन रेंज और स्पीड को लेकर अमेरिका संशय में है। चीन अमेरिका के नए एयरक्राफ्ट की इस कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। चीन छठी पीढ़ी के दो लड़ाकों में मार शेंगदू जे36 और शेन यांग जे50 को बेड़े में शामिल करने की फिराक में। अमेरिकी 47 की रेंज को देखते हुए चीन अपने नए विमानों में बदलाव करने के मूड में है। इंडोपेसिफिक बहुत बड़ा इलाका है। गुवाम और जापान का ओकिनावा जैसे अमेरिकी बेस दूर-दूर पर फैले हुए हैं। चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका को रेंज वाले हथियार चाहिए। ये एक वक्त था जब चीन अमेरिकी हमलों से बचने के लिए ढाल बनाने की कोशिश करता था। लेकिन अब अमेरिका को चीन का काउंटर करना पड़ रहा है। दोनों की इस रेस ने दुनिया में हर मोर्चे पर जंग की चिंगारी भड़का रखी है।