By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Mar 12, 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नजर अब दुनिया के खनिज संपदा संपन्न देशों की और है। ट्रम्प का यह अब यह छिपा एजेण्डा भी नहीं रहा क्योंकि यूक्रेन को सहायता के बदले उसकी खनिज संपदा के प्रबंधन का जिम्मा अमेरिका लेने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर लगातार दबाव ड़ाल रहे हैं। यूक्रेन 500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की खनिज संपदा को लेकर अमेरिका के साथ समझौता करने को भी लगभग तैयार हो गया पर पिछले दिनों जेलेंस्की की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रम्प और जेलेंस्की में जिस तरह की कड़बाहट भरी नोकझोंक हुई है उसने इस डील को फिलहाल तो कमजोर कर दिया है। हांलाकि यूक्रेन के जेलेंस्की ने यूरोप यात्रा के दौरान राष्ट्रहित में अमेरिका के साथ समझौता करने पर लगभग सहमति वाली बात कही है। उधर रुस नहीं चाहता कि इस तरह का कोई समझौता अमेरिका व रुस के बीच हो, यही कारण है कि रुस ने भी रुस की खनिज संपदा को लेकर अमेरिका से समझौते के लिए खुला निमंत्रण दे दिया है। दरअसल अमेरिका स्वय खनिज संपदा संपन्न देष है। इसके साथ ही खनिज संपदा के मामलें में देखा जाए तो अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। इसके साथ ही अमेरिका खनिजों खासतौर से दुर्लभ खनिजों के मामलें में चीन का बर्चस्व चीन पर निर्भरता खत्म या यों कहे कम करना चाहता है। इसी कारण से दुनिया के खनिज संपदा संपन्न देशों पर ट्रम्प की ललचाई नजर साफ दिखाई दे रही है।
कनाडा और यूक्रेन के प्रति अमेरिकी नीति से यह साफ हो जाता है। अमेरिका यूक्रेन की रेयर अर्थ एलिमेंट संपदा के नियंत्रण के माध्यम से खनिजों के क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़कर स्वयं का नियंत्रण बनाना चाहता है। कनाड़ा में भी सोना, चांदी, निकल, तांबा, यूरेनियम, पोटाश, कोबाल्ट, हीरा आदि के प्रचुर भण्डार है तो यूक्रेन में भी रेयर खनिजों के भण्डार धरती के गर्भ में समाये हुए हैं। यूक्रेन में ग्रेफाइट, लिथियम, आदि रेयर अर्थ के भण्डार है। लिथियम के 19 मिलियन टन भण्डार होने के साथ ही विष्व के प्रमुख पांच ग्रेफाइट उत्पादक देशों में यूक्रेन है। यूक्रेन में आरईई के 17 तत्वों के समूहों वाले खनिजों में से बहुतायत में भण्डार है। अफगानिस्तान के साथ अमेरिका 2017 में समझौता कर चुका है पर तालिबान के प्रवेश के कारण अमेरिका का सपना अधूरा रह गया। हांलाकि 2021 में भी अफगानिस्तान से समझौते की पहल अमेरिका से कर चुका है। अभी भी अमेरिका की अफगानिस्तान की खनिज संपदा पर पूरी नजर है और अमेरिकी-रुस नजदीकी के प्रयास इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। यह साफ है कि आज रिचार्जेबल बेटरी, मोबाईल, कम्प्यूटर चिप, हवाई जहाज के उपकरणों में उपयोग होने वालों के साथ ही उर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपयोग के खनिज भण्डार है। दुनिया के देश आज कच्चे माल के रुप में चीन पर निर्भर है। चीन पर निर्भरता कम करने के साथ ही अमेरिका अपना वर्चस्व बनाने के लिए संभावित सभी देशों पर योजनावद्ध तरीके से दबाव बना रहा है ताकि बदलती औद्योगिक सिनेरियों में अमेरिका की तूंती और अधिक तेजी से बज सके और अन्य देश अमेरिका पर निर्भर हो सके। अमेरिका खनिज संपदा का आर्थिक सामाजिक और औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बनाना चाहता है और इस तरह से वह अपना वर्चस्व कायम करने के लिए योजनावद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा