मिस्टर ट्रंप #@%*$!...ग्रीनलैंड को हथियाने चला अमेरिका, लेकिन डेनमार्क का ये जवाब आग बबूला कर देगा

By अभिनय आकाश | Jan 15, 2026

एक ऐसा इलाका जो बर्फ से ढका है जहां आबादी बहुत कम है। लेकिन जिस पर दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों की नजर टिकी हुई है और अब उसी जगह को लेकर एक अमेरिकी राष्ट्रपति कह रहा है कि उसे एक तरह से या दूसरे तरह से हासिल किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की दिलचस्पी ग्रीनलैंड में कोई नई बात नहीं है। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने इस विशाल खनिज समृद्ध आर्कटिक इलाके को खरीदने का विचार रखा था। तब डेनमार्क ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था और नाराज होकर ट्रंप ने 2019 में डेनमार्क की अपनी राजकीय यात्रा तक रद्द कर दी थी। 2025 में दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने इस मुद्दे को फिर हवा दे दी। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया। खासकर आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों के संदर्भ में अमेरिकी प्रशासन ने यहां तक कि ग्रीनलैंड से रिश्ते मजबूत करने के लिए एक स्पेशल एनवॉय भी नियुक्त कर दिया। 

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हाल के दिनों में ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया तो वहां प्रतिद्वंदी ताकतों का असर बढ़ सकता है। इस दौरान उन्होंने यह तक कह दिया कि अमेरिका ग्रीनलैंड को वन वे और अनदर हासिल करेगा। ही वो लाइन थी जिसने डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों में अलार्म बजा दिया। डेनमार्क के यूरोपीय संसद सदस्य एंडर्स विस्टीसन ने ट्रंप को ऐसा जवाब दिया जो देखते ही देखते वायरल हो गया। संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड 800 साल से डेनिश किंगडम का हिस्सा है और यह कोई प्रॉपर्टी नहीं है जो बिक सके। 

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फिर उन्होंने कहा कि मैं इसे उस भाषा में कहता हूं जिसे आप समझ सकें। मिस्टर ट्रंप मिस्टर ट्रंप यह बयान सिर्फ गुस्से का इजहार नहीं था बल्कि डेनमार्क की राजनैतिक भावना का प्रतीक बन गया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेम्स फ्रेडरिक नीलसन और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मैटे फ्रेडरिकसन दोनों ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। ग्रीनलैंड ने यह भी दोहराया कि वह नाटो के साथ जुड़ा हुआ है और उसकी सुरक्षा व्यवस्था बहुपक्षीय ढांचे के तहत ही रहेगी। कोपेन हेगन में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीलसन ने कहा कि दुनिया इस वक्त एक जिओपॉलिटिकल संकट का सामना कर रही है और अगर अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़ा तो ग्रीनलैंड डेनमार्क नाटो और यूरोपीय संघ के साथ खड़ा रहेगा। 


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