By अभिनय आकाश | Mar 18, 2026
ईरान की जंग में अब एक नई एंट्री हो चुकी है और यह एंट्री किसी छोटे देश की नहीं बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ताकत की है। चीन अब खुलकर मैदान में उतरता हुआ नजर आ रहा है और इसी के साथ ही बता दें कि अमेरिका और इजराइल की टेंशन इस वक्त कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन सवाल अब सिर्फ जंग का नहीं है बल्कि सुपर पावर टकराव का हो चुका है। ईरान की मदद के लिए चीन से दो बड़े जहाज ईरान की तरफ रवाना हो गए हैं। इस खबर से अमेरिका में इस वक्त बता दें कि खतरनाक हड़कंप भी मचा हुआ है। चीन ने इन जहाजों के अंदर ऐसा क्या भेजा कि अब सबकी नजरें इन जहाजों पर टिक गई है। इसको लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं काफी ज्यादा तेज है। दरअसल बता दें कि चीन और ईरान के बीच बेहद मजबूत आर्थिक रिश्ता है।
ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल चीन खरीदता है। यानी चीन की एनर्जी सिक्योरिटी काफी हद तक ईरान पर टिकी हुई है। अगर ईरान कमजोर होता है तो इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अब सबसे बड़ी खबर यह कि चीन से दो बड़े मालवाहक जहाज ईरान की तरफ रवाना हुए हैं। इन जहाजों के नाम बताए जा रहे हैं शाब्डीस और बर्जी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जहाज चीन के जुहाई के पास एक केमिकल पोर्ट से निकले हैं और दावा यह सामने आया है कि इनमें मिलिट्री ग्रेड केमिकल लदा हो सकता है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा सामने आया है और यह बताया गया है कि इन जहाजों में ऐसे केमिकल हो सकते हैं जो बैलस्टिक मिसाइल और रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी दावा किया है यह बताया है कि इनमें हथियारों की खेप भी हो सकती है। दावा यह भी सामने आया है कि इसमें चीन ने ईरान को बड़ी मानवीय सहायता के रूप में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भेजे हैं। यह सहायता नागरिक आबादी को राहत पहुंचाने के लिए है। इसके साथ ही चीन ईरान में बता दें कि रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करते हुए यहां पर कई हजार गुना डॉलर की सहायता भी प्रदान कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ है कि यह सहायता का उद्देश्य जो है वो यह है कि 13 टन से अधिक दवाइयां के पैकेट्स और मेडिकल सामग्री जो है वो चीन ने ईरान में संघर्ष के दौरान मानवीय संकट को कम करने के प्रयास के तौर पर की है और इन्हीं सभी वजहों के कारण यह अटकलें तेज है कि इन दवाओं के नाम पर चीन ने कुछ और ही ईरान को भेजा है जो इस युद्ध में ईरान की बड़ी मदद कर सकता है। हालांकि इसकी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब इन जहाजों पर नजर रखे हुए हैं अमेरिका और यूरोपियन यूनियन। क्योंकि अगर यह जहाज ईरान पहुंचते हैं तो ईरान को बड़ी सैन्य ताकत मिल सकती है और अगर अमेरिका इन्हें रोकने की कोशिश करता है तो सीधा टकराव चीन से हो सकता है। इस बीच ईरान लगातार इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमले भी कर रहा है। बता दें कि रोशोन लीजियन पर तेल लवीब जैसे शहरों को निशाना बनाया गया है। दावा यह है कि क्लस्टर बम तक इस्तेमाल किए गए हैं। हालांकि इन दावों की अभी कोई भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अगर चीन खुलकर ईरान के साथ आ गया और अमेरिका इजराइल के साथ पहले ही खड़ा है तो यह जंग मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगी।